रोडवेज के टिकटों के पैसे से करोड़ों का कालाधन सफेद किया परिवहन मंत्री गायत्री ने

  • एक बार फिर सरकार की बदनामी करायी गायत्री ने  
  • विपक्ष ने कहा, हो सीबीआई जांच

कालाधन इम्पैक्ट

  • गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गायत्री रातों-रात बन गये करोड़पति
  • अवैध खनन से पूरे प्रदेश में अरबों रुपये की काली कमाई करने का आरोप

संजय शर्मा
captureलखनऊ। यूपी के सबसे ताकतवर मंत्री गायत्री प्रजापति ने अपनी बेशुमार दौलत को नम्बर एक करने का नया रास्ता ढूंढ लिया है। यूपी रोडवेज के टिकटों की धनराशि से जुटे छोटे नोट इकठ्ठा करके गायत्री के गुर्गों को दिये जा रहे हैं। यूपी रोडवेज के हर आरएन के पास गायत्री के गुर्गे पहुंच रहे हैं और काला धन सफेद करने के लिए उनके पास दबाव बना रहे हैं कि जितनी धनराशि भी उनके पास इकठ्ठी हो वह उन्हें सौंप दें। यूपी रोडवेज के पास टिकटों की धनाशि के रूप में लगभग दस करोड़ रुपया रोज आता है। मंत्री जी की कोशिश है कि इस बहाने 31 दिसंबर तक दो सौ करोड़ से ज्यादा का काला धन सफेद कर लिया जाये। गायत्री के इस कारनामे से रोडवेज के वह लोग बेहद परेशान हैं जिन्हें ये जिम्मेदारी दी गई है। मगर खुलकर कोई भी बोलने को तैयार नहीं है।
रोडवेज की बसों से आम तौर पर मध्यम वर्ग और गरीब लोग सफर करते हैं। इनमें से अधिकांश का किराया 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक होता है। इस छोटी-छोटी रकम से यूपी रोडवेज के पास रोज लगभग दस करोड़ की धनराशि इकठ्ठी होती है। इस धनराशि को इकठ्ठा करके जमा करने का काम आईसीआईसीआई बैंक करता है। कुछ और बैंक भी यह धनराशि एकत्रित करते हैं। जब अचानक मोदी सरकार ने पांच सौ और एक हजार के नोटों पर प्रतिबंध लगाया तो पूरे यूपी के नेताओं में खलबली मच गयी। सोशल मीडिया पर भी कहा जाने लगा कि इस प्रतिबंध से सबसे ज्यादा या तो बसपा सुप्रीमो मायावती परेशान होंगी या गायत्री प्रजापति। जाहिर है प्रदेश की जनता भी जानती थी कि सबसे ज्यादा कालाधन गायत्री प्रजापति के पास ही है।
इस प्रतिबंध से सभी लोग परेशान हो गये और खास तौर पर वह लोग जो कालाधन बेशुमार रखे हुए थे। अधिकांश नेता अपने-अपने कालेधन को ठिकाने लगाने की तरकीबें ढूढने लगे। किसी नेता ने सोना खरीदने की जुगाड़ लगायी तो किसी ने अपने कर्मचारियों के खाते में पैसे डलवाये।
मगर गायत्री प्रजापति ने पहली बार माना कि उन्हें परिवहन विभाग मिला तो यह उनके लिए लॉटरी लगने जैसा था। कालाधन खपाने का इससे बढिय़ा जरिया किसी और विभाग में नहीं हो सकता था। गायत्री के गुर्गों ने पहले तो मुख्यालय पर संपर्क साधा। उनकी कोशिश थी कि यहीं से मैनेज होकर पूरे सूबे का पैसा उनके पास आ जाये और वह बड़े नोट दे दें। मगर परिवहन विभाग के एमडी मृत्युंजय से यह कहने की किसी की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि मृत्युंजय कडक़ छवि के ईमानदार अफसर माने जाते हैं। लिहाजा गायत्री के गुर्गों ने सूबे के रीजनल मैनेजरों से संपर्क साधना शुरू किया और उन पर दबाव बनाया कि वह सारे छोटे नोट उन्हें दे दें और बदले में उनसे बड़े नोट ले लें।
कई स्थानों पर इस तरह की कार्यवाही से रोडवेज विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गयीं, मगर चूंकि विभाग के मंत्री खुद गायत्री हैं लिहाजा किसी की हिम्मत नहीं पड़ी की वह इस व्यवस्था का विरोध करे। शुरूआती दौर में कुछ आरएम से कहा गया कि मंत्री जी को अपने पिताजी की तेरहवीं के लिए कुछ छोटे नोट चाहिए, मगर बाद में तेरहवीं के बाद भी यह सिलसिला जारी है। गायत्री यूपी सरकार के सबसे बदनाम मंत्री रहे हैं। अवैध खनन के कारोबार ने कई बार सरकार को परेशानी में डाला है। सीएम अखिलेश यादव भी गायत्री को बिल्कुल पसंद नहीं करते। उन्होंने गायत्री के कारनामों के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी कर दिया था मगर बाद में गायत्री नेताजी के चरणों में लोट गये और अपनी कुर्सी फिर हासिल कर ली। गायत्री ने दोबारा भी खनन विभाग लेने की कोशिश की थी, मगर सीएम उन्हें खनन देने को राजी नहीं हुृए।

सीबीआई करे जांच: आईपी सिंह

भाजपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने कहा है कि गायत्री के इस गोरखधंधे की जांच सीबीआई से कराने के लिए वह प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जी देश से कालाधन खत्म करना चाहते हैं, मगर गायत्री जैसे लोग अपने पद का दुरुपयोग करके कालेधन को सफेद कर रहे हैं।

मोदी की शह पर हो रहा खेल: वैभव

आप के प्रवक्ता वैभव माहेश्वरी ने कहा है कि सभी बैंक केंद्र सरकार के अधीन आते हैं, ऐसे में यह सम्भव नहीं है कि वह सूबे के एक मंत्री के करोड़ों की ब्लैकमनी व्हाइट करते रहें और केंद्र सरकार को पता न हो। उन्होंने कहा कि एक महिला और एक बच्ची अस्पताल में नोट न होने के कारण मर गयी, मगर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा और इधर मंत्री करोड़ों का काला धन सफेद कर रहे हैं।

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