राजधानी में फल-फूल रहा जुआ का काला कारोबार

  • हल्की धाराओं में मामला दर्ज होने का लाभ उठाते हैं जुआरी
  • पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से नहीं लग पा रही जुआरियों पर लगाम

आमिर अब्बास
captureलखनऊ। राजधानी में जुआ का काला कारोबार बुरी तरह से फैल चुका है। जुआ और सट्टे का कारोबार करने वाले जुआरियों के मददगार बनकर पुलिसकर्मी भले ही अमीर हो रहे हों लेकिन आम आदमी जुआ की लालच में कंगाल होता जा रहा है। वहीं जुआ और सट्टे का कारोबार चलाने वाले लोग मोटी कमाई कर रहे हैं। इस कमाई का 60 प्रतिशत हिस्सा जुआ कारोबारी रखते हैं। इसके अलावा 40 प्रतिशत हिस्सा अपने गुर्गों, होटलों में व्यवस्था करने और पुलिस को मैनेज करने पर खर्च कर देते हैं। यदि कोई जुआ खेलते समय पकड़ लिया जाता है, तो पुलिस कर्मियों की मिलीभगत से हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर और मुचलका लेकर छोड़ दिया जाता है।
जुआ और सट्टा के कारोबारियों को धारा 13 जी के तहत गिरफ्तार किया जाता है। इस धारा में थानाध्यक्ष को ही पकड़े गये जुआरियों को थाने से जमानत देने का अधिकार है। इसलिए मोटी रकम और ताश की गड्डियों के साथ अक्सर गिरफ्तार होने वाले जुआरियों को थाने से ही जमानत दी जाती है। जमानत पर छूटने के बाद ये जुआरी दोबारा उसी तरह से सक्रिय हो जाते हैं और जनता की तबाही का कारोबार फिर से शुरू हो जाता है। जुआरियों के लिए दीपावली सबसे मुफीद माना जाता है। सप्ताह भर पहले से ही जुआ कारोबारी सक्रिय हो जाते हैं। ये लोगों को जुआ खेलने का स्थान और सामान मुहैया कराने का आश्वासन देकर बुकिंग करते हैं। इसमें पुलिस कर्मियों की भी मिलीभगत होती है।
शहर में एएसपी पश्चिम जय प्रकाश ऐसे अधिकारी हैं, जो एसपीटीजी रहने के दौरान क्षेत्र में संगीन अपराधियों और जुआरियों पर लगाम लगाने में पूरी तरह असफल रहे थे। इसी वजह से उन्हें एसपीटीजी के बजाय एसपी पश्चिमी बना दिया गया, जबकि ट्रांसगोमती (टीजी) क्षेत्र में सबसे अधिक जुआ खेला जाता है। इस क्षेत्र में जुआ खेलने के सबसे बड़े अड्डे हैं। टीजी में हसनगंज थाना क्षेत्र के कई मोहल्ले और होटल जुआरियों के लिए मशहूर हैं। सूत्रों के अनुसार हसनगंज थाने के मदेहगंज चौकी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जुआरियों ने अपना मकड़ जाल बिछा रखा है, जिसमें मसालची टोला, पकरिया व पानी की टंकी क्षेत्रों में जुआ की बड़ी फड़ लगती है और पुलिस न सिर्फ जुआरियों को संरक्षण देती रही है। बल्कि जुआ खेलने वालों की इन फड़ों से मोटी वसूली के कारनामे को भी अंजाम देती है।
जुआरियों की गिरफ्तारी के बाद छोटा पड़ गया था लॉकअप
शहर में तीन महीनों में इन्दिरानगर, वजीरगंज, सआदतगंज और बाजार खाला इलाकों में 50 से अधिक जुआरी पकड़े जा चुके हैं। सआदतगंज पुलिस ने जुआरियों के सबसे बड़े अड्डे का खुलासा कर एक ही दिन में 29 लोगों को गिरफ्तार कर दो लाख 10 हजार रुपए बरामद किए थे। तत्कालीन एएसपी सर्वेश मिश्रा के निर्देशन पर हुई 29 जुआरियों की गिरफ्तारी के बाद सआदतगंज कोतवाली का लॉकअप छोटा पड़ गया था। इस कार्रवाई के बाद बाजार खाला क्षेत्र के मेहंदीगंज कच्ची कालोनी में इन्स्पेक्टर को सूचना दिए बगैर बाजार खाला में 10 जुआरियों को गिरफ्तार कर 3 लाख 86 हजार रूपए बरामद किए गए थे। जुआरियों की गिरफ्तारी में खास बात ये रही थी कि सीओ बाजार खाला ने जुआरियों के अड्डे पर छापा मारने के बाद स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाया था। इसके अलावा वजीरगंज पुलिस ने भी बड़े जुआ के अड्डे का भंडाफोड़ कर मोटी रकम बरामद की थी। इन्दिरानगर पुलिस ने भी 5 जुआरियों को गिरफ्तार कर मोटी रकम बरामद की। ये चार मामले तो गुड वर्क हैं, जो किसी न किसी पुलिस कर्मी की नाराजगी की एवज में किए गए। लेकिन अन्य थाना क्षेत्रों में जुआरियों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया गया, जबकि एसएसपी मंजिल सैनी ने सभी थानाध्यक्षों को जुआरियों और सट्टेबाजों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया था।

नए थानेदार क्या जुआरियों पर लगा पाएंगे अंकुश

लखनऊ के 43 थानों में से अगर महिला थाना छोड़ दिया जाए तो 42 थाना क्षेत्रों में शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र हो जहां जुआरियों का वर्चस्व न हो। जुआ और सट्टा खेलने वालों के कारोबार को संरक्षण देने और काली कमाई में हिस्सेदारी लेने के आरोप पुलिसकर्मियों पर भी लगते रहे हैं। लेकिन इस दीपावली में पुलिसकर्मी चाह कर भी जुआ और सट्टा से होने वाली काली कमाई नहीं कर पायेंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह चुनाव आयोग के निर्देश पर लखनऊ के अधिकतर थानेदारों का गैर जनपदों में तबादला और रवानगी किया जाना है। वहीं, नये पुलिसकर्मियों के लिए जुआरियों पर नियंत्रण लगा पाना मुश्किल लग रहा है।

पुलिस को सतर्क कर दिया गया है: डीआईजी

राजधानी में दीपावली पर बड़े पैमाने पर चल रहे जुआ और सट्टा के कारोबार में जहां जुआरियों ने अपने कदम जमा लिए हैं। वहीं पुलिस भी सतर्क हो चुकी है । इस संबंध में डीआईजी आरकेएस राठौर ने बताया कि पुलिस को सतर्क कर दिया गया है, जो जुआरियों पर निगाह बनाये हुए हैं और अगर कोई भी पुलिसकर्मी इसमें संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, उम्मीद जताई जा रही है कि जुआरियों का साथ देने वाले पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिर सकती है।

Pin It