राजधानी के गली-मोहल्लों में तख्त पर लिटाकर मरीजों का हो रहा इलाज

संक्रामक बीमारियों के नाम पर मरीजों के जीवन के साथ हो रहा खिलवाड़

अस्पताल चलाने वालों का दावा सीएमओ को है पूरी जानकारी

वीरेंद्र पांडेय
captureलखनऊ। हाईकोर्ट के फटकार के बाद भी राजधानी का स्वास्थ्य महकमा कुंभकरणीय नींद में सोया है, जिसकी वजह से डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों के नाम पर मरीजों को लूटने वाले अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। गली-मोहल्लों में तख्त पर लिटाकर मरीजों का इलाज हो रहा है। जो संक्रामक बीमारी से पीडि़त लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, जबकि अस्पताल संचालकों का दावा है कि वह सीएमओ की जानकारी में अस्पताल चला रहे हैं। वहीं मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे अस्पतालों के बारे में सब कुछ जानकर भी अधिकारी अनजान बने हुए हैं। इन चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो
रही है।
शहर में संक्रामक बीमारियों के नाम पर पैसा कमाने के लिए गांवों और नगरीय क्षेत्र के गली मोहल्लों में सैकड़ों अस्पताल चल रहे हैं। दो से तीन कमरों के अस्पताल में मरीजों को भर्ती कर इलाज के नाम पर बीमारियां बांटी जा रही है। चारों तरफ गंदगी का अम्बार फैला हुआ है। इतना ही नहीं संक्रामक रोग से पीडि़त मरीजों को बकायदा तख्त पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। वहीं इन अस्पताल संचालकों का दावा है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संज्ञान में वो अस्पताल चला रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो अनुमानित रूप से राजधानी में तीन सौ से अधिक ऐसे अस्पताल चल रहे हैं।

तीन कमरों के अस्पताल में बीस मरीज भर्ती
गोमतीनगर विस्तार के मलेसेमऊ गांव स्थित शिफा अस्पताल तीन कमरों में चलाया जा रहा है। इन अस्पतालों में पैथालॉजी जांच से लेकर मेडिकल स्टोर पर सस्ती दवा उपलब्ध कराने का लालच देकर मरीजों को भर्ती किया जाता है। जब मरीज अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं, तो उनकी अनेकों जांचें करवाकर लूटने का सिलसिला जारी है, जो मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज होने तक चलता है। यदि इलाज के दौरान चिकित्सकों की लापरवाही और संसाधनों की कमी के कारण मरीज की मौत हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी लेने में भी अस्पताल वाले बचते हैं। खरिका वार्ड निवासी शरद कुछ दिन पहले बुखार होने पर सिफा अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचा। वहां अस्पताल संचालक डॉ. रेहान ने मरीज की जांच कराई और रिपोर्ट के आधार पर मरीज को डेंगू होने की बात बताई। डेंगू का नाम सुनते ही मरीज के परिजन डर गये और बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने लगे। इस पर डॉ. रेहान ने दावा किया कि वो मरीज को ठीक कर देंगे। किसी अन्य अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं है। इसके बाद घबराये परिजनों ने मरीज को अस्पताल में भर्ती करा दिया। मरीज शरद के मुताबिक अस्पताल में एक घंटे के अन्दर डेंगू की रिपोर्ट मिल गयी और इलाज के नाम पर ग्लूकोज भी लगा दिया गया। लेकिन शाम को मरीज की हालत बिगडऩे पर परिजनों ने जब डॉ. रेहान से इलाज की जानकारी लेने की कोशिश की तो वो भडक़ गये। जबकि क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक डॉ. रेहान खुद को आयुर्वेदिक चिकित्सक बताते हैं,लेकिन इलाज एलोपैथिक विधि से करते हैं। इतना ही नहीं अस्पताल में जच्चा-बच्चा केन्द्र भी खुला है। जहां प्रसव कराया जाता है लेकिन किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपरेशन थिएटर और आईसीयू का इंतजाम नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल में हर समय बीस से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं।

रोज आते हैं चार से पांच मरीज: डॉ. रेहान
शिफा अस्पताल के संचालक डॉ. रेहान का दावा है कि उनके अस्पताल में रोजाना डेंगू से पीडि़त पांच-छह मरीज आते हैं। जिनकी जांच करवा कर सफलतापूर्वक इलाज किया जाता है। इस बात की जानकारी यहां के सीएमओ डॉ.एसएनएस यादव को भी है। जब रेहान से पूछा गया कि आप तो आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, ऐसे में मरीजों का एलोपैथिक विधि से इलाज किस प्रकार करते हैं, इतना सुनने के बाद वो बगलें झांकने लगे। इतना ही नहीं उनके अस्पताल में कहीं भी रजिस्ट्रेशन से संबंधित विवरण डिस्प्ले नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि शिफा अस्पताल की तरह ही मोहान रोड स्थित बुद्घेश्वर अस्पताल में भी चिकित्सकों का बोर्ड लगाकर मरीजों को अच्छा इलाज दिलाने का दावा किया जाता है, जबकि बोर्ड पर जिन चिकित्सकों का नाम लिखकर अस्पताल संचालक भोले-भाले मरीजों को सस्ते इलाज का झांसा देते हैं, उनमें ज्यादातर चिकित्सक यहां आते ही नहीं हैं। इसके अलावां यहां के चिकित्सक पैथालॉजी जांच तथा आपरेशन कराने वाले को छूट देने की बात भी अक्सर कहते हैं।

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