मोदी के मास्टर स्ट्रोक से भाजपा की मजबूती के मिल रहे संकेत

  • पाक में सर्जिकल स्ट्राइक और कालेधन पर रोक के लिए उठाये गये कदम का जनता में जोरदार असर
  • बसपा के हमलों से भी लगातार बढ़ रहा बीजेपी का ग्राफ

सुनील शर्मा

captureलखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मास्टर स्ट्रोक ने निश्चित तौर पर बीजेपी को मजबूती देने का काम किया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कालाधन और भ्रष्टाचार रोकने के लिए 500-100 रुपये के नोट बंद करने का ऐतिहासिक फैसला बीजेपी की लोकप्रियता बढ़ाने वाला कदम साबित हो रहा है। इससे पूर्व यूपी में महागठबंधन और बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से बार-बार प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार को निशाना बनाने और हर मुद्दे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने की छटपटाहट से स्पष्ट है कि यूपी में भाजपा के समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीजेपी की यही लोकप्रियता अन्य दलों को पच नहीं रही, जिसे रोकने के लिए सपा, रालोद, जदयू और अन्य दलों ने मिलकर महागठबंधन बनाने की कोशिशें तेज कर ही हैं। इस पर कभी भी निर्णय आ सकता है लेकिन इससे भाजपा का नुकसान कम और लाभ अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है।
भाजपा को यूपी को रोकने के लिए आपसी वैचारिक मतभेद भुलाकर सपा, कांग्रेस, रालोद, जदयू समेत अन्य दल एकजुट होने को आतुर हैं। सपा के रजत जयंती समारोह और कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कोशिशों से स्पष्ट दिख रहा है। गठबंधन पर प्रशांत किशोर यानी पीके सपा, रालोद, जयदयू समेत अन्य सभी राजनीतिक दलों से नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। गठबंधन में किस दल को कितनी सीटों पर चुनाव लडऩे का मौका मिलेगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द यूपी की 403 सीटों में किस पार्टी को कितनी सीट पर चुनाव लडऩे का मौका मिलेगा, इसका निर्णय हो जायेगा। इसलिए प्रदेश में भाजपा ने अन्य दलों की नीतियों को ध्यान में रखकर यूपी में मजबूती से चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया है। बीते दिनों पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में घुसकर सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक और मंगलवार को 500-1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले ने मोदी सरकार की लोकप्रियता में इजाफा कर दिया। देश की जनता में मोदी को करिश्माई नेता के रूप में स्वीकार किया जाने लगा है। इतना ही नहीं बीजेपी ने आने वाले चुनावों में मोदी को स्टार प्रचारक बनाने और कई रैलियां करवाने का फैसला भी किया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले चुनाव में मोदी के कामों का असर दिखना तय है। इतना ही नहीं सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भाजपा के ग्राफ में बढ़ोतरी से बौखलाए अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने अनाप शनाप बयान भी दिया लेकिन मोदी ने सबका करारा जवाब देकर मुंह बंद करा दिया। वहीं प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी सपा में यादव परिवार के बीच वर्चस्व की लड़ाई अभी भी अंदरखाने जारी है। जो निश्चित तौर पर सपा को कमजोर करेगी। लेकिन प्रदेश में भाजपा को सपा में चल रहे आंतरिक कलह का लाभ मिलना तय है।

आमजन तक पहुंच रही भाजपा

भाजपा की परिवर्तन यात्रा के दौरान आयोजित आमसभा में पार्टी के दिग्गज नेता केन्द्र सरकार के कामों का बखान कर रहे हैं। वहीं परिवर्तन यात्रा के सारथी कोने-कोने में अपने वोटर्स को पहचानने का कार्य कर रहे हैं। करीब 15000 हजार परिवर्तन सारथियों को 50000 परिवर्तन चौपाल आयोजित कराने का जिम्मा सौंपा गया है। यह भी भाजपा की एक अचूक रणनीति साबित हो रही है। इसके माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर भाजपा नेता अन्य दलों के मतदाताओं को अपनी तरफ करने का प्रयास कर रहे हैं। जिसका व्यापक असर पड़ता दिख रहा है। वहीं सम्मेलनों से भी पार्टी को मजबूती मिल रही है।
बसपा सुप्रीमो की सक्रियता बढ़ी

मीडिया से अक्सर दूरी बनाए रखने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती भाजपा पर हमला बोलने के लिए मीडिया का बखूबी इस्तेमाल कर रही हैं। वह देश में कोई भी बड़ा मुद्दा होता है, तो उस पर तत्काल प्रतिक्रिया देने की कोशिश करती हैं। पत्रकार वार्ता में सबसे अधिक भाजपा पर हमलावर रहती हैं। उनके निशाने पर सबसे अधिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रहते हैं। जबकि यूपी में अपनी धुर विरोधी समाजवादी पार्टी पर अपेक्षा के अनुरूप कम ही बोलती दिखती हैं। इसलिए माया को भी लगता है कि आने वाले चुनाव में भाजपा ही उन्हें सबसे अधिक टक्कर देगी।

मुस्लिम वोटों पर निगाह

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिमों को अपने पाले में लाने के लिए मुस्लिम प्रेम का राग अलापना शुरू कर दिया। उन्होंने तीन तलाक को धार्मिक मुद्दा बताकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। जिससे यूपी में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण होने की भी संभावना बन रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इसका लाभ भी भाजपा को ही अधिक मिलेगा। क्योंकि तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम सम्प्रदाय की महिलाएं और पढ़े-लिखे लोगों का समर्थन मोदी सरकार को मिल रहा है। इन सबके बीच कांग्रेस की सबसे अधिक दुर्गति हो रही है। कांग्रेस पार्टी में नेताओं के आपसी मतभेद की वजह से पार्टी को खड़ा करने की राहुल गांधी की कोशिशें भी परवान नहीं चढ़ पा रहीं हैं।

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