मोदी की भावुकता और विपक्ष के चुभते सवाल

सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री के भावुक होने से जनता की परेशानियां दूर हो जाएंगी? क्या किसान अपने खेतों में बिना पैसे के खाद और बीज डाल सकेंगे? क्या बैंक में कतार में लगे लोगों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा? सवाल यह भी है कि मोदी आखिर संसद में अपने फैसले पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने से क्यों बच 

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sajnaysharmaनोटबंदी के फैसले पर विपक्ष ने संसद से सडक़ तक मोदी सरकार को घेर रखा है। विपक्ष संसद में पीएम मोदी से बयान देने की मांग कर रहा है। हंगामे के कारण संसद ठप है। सरकार विपक्ष की मांग को नजरअंदाज कर रही है। विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए भाजपा ने संसदीय दल की बैठक बुलाई। इस बैठक में विपक्ष की आलोचनाओं से आहत पीएम नरेंद्र मोदी अपने सांसदों के बीच भावुक हो गए। भावुक पीएम ने विपक्ष पर नोटबंदी के फैसले को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। भाजपा सांसदों से अपील की कि वे विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों के बारे में लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर बताएं। मोदी ने दोहराया कि नोटबंदी का फैसला देशहित में है। आठ नवंबर को मोदी ने पांच सौ और हजार के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। इसके बाद से देश में अफरा-तफरी का माहौल है। पैसे के अभाव में जनता अपने दैनिक कार्यों को नहीं कर पा रही है। लोग कतार में मर रहे हैं। इन मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने मोदी की भावुकता पर भी सवाल उठाया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कह दिया कि बैठक में भावुक होने वाले मोदी संसद में क्यों भावुक नहीं हो रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री के भावुक होने से जनता की परेशानियां दूर हो जाएंगी? क्या किसान अपने खेतों में बिना पैसे के खाद और बीज डाल सकेंगे? क्या बैंक में कतार में लगे लोगों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा? सवाल यह भी है कि मोदी आखिर संसद में अपने फैसले पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने से क्यों बच रहे हैं? क्या प्रधानमंत्री को पता नहीं है कि राजनीति के अखाड़े में भावुकता से नहीं बल्कि पैने तर्कों से विपक्ष के हमलों का करारा जवाब दिया जाता है? दरअसल, मोदी ने जनता की परेशानियों को मानते हुए इससे पहले भी भावुक अपील की थी और समस्याओं के समाधान के लिए पचास दिन का वक्त मांगा था। अभी उसे पूरा होने में एक महीना शेष है। यह सच है कि मोदी संसद में अपने किसी फैसले पर जल्द बयान नहीं देते। वे अपने कार्यों से विपक्ष को जवाब देने की कोशिश करते हैं। जैसा कि उन्होंने कालेधन को लेकर नोटबंदी की घोषणा कर दी। यह ठीक भी है। लेकिन क्या प्रधानमंत्री मोदी जनता की परेशानियों को दूर करने के लिए युद्धस्तर पर कार्रवाई करेंगे। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उनकी भावुकता पर सवाल उठाते रहेंगे।

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