महोबा, मोदी और सियासत

सवाल यह है कि चुनावी शंखनाद के लिए मोदी ने बुंदेलखंड को ही क्यों चुना? क्या इसके जरिए वे प्रदेश की जनता को कोई संदेश देना चाहते हैं? क्या इसके पीछे किसानों को लुभाने की मंशा काम कर रही है या मोदी के भरोसे भाजपा प्रदेश चुनाव जीतने का मास्टर प्लान तैयार कर रही हैï?

sanjay sharma editor5प्यास से तड़प रही बुंदेलखंड की धरती एक बार फिर सियासी घमासान का केंद्र बनने जा रही है। विधानसभा चुनाव से पूर्व सबसे ज्यादा सूखा प्रभावित जिले महोबा में पीएम मोदी अभिनव प्रधानमंत्री खेत सिंचाई योजना की सौगात किसानों को देंगे। वे एक सभा को भी संबोंधित करेंगे। भाजपा ने रैली में तीन लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। भाजपा का दावा है कि प्रधानमंत्री यहां के किसानों की समस्या को लेकर काफी संजीदा रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने जून माह में पानी की किल्लत पैदा होने पर महोबा के लिए वाटर ट्रेन भेजने की पहल भी की थी। यूपी में मोदी ताबड़तोड़ रैलियों की तैयारी में हैं और इसकी पूरी रूपरेखा तैयार हो चुकी है। सवाल यह है कि चुनावी शंखनाद के लिए मोदी ने बुंदेलखंड को ही क्यों चुना? क्या इसके जरिए वे प्रदेश की जनता को कोई संदेश देना चाहते हैं? क्या इसके पीछे किसानों को लुभाने की मंशा काम कर रही है या मोदी के भरोसे भाजपा प्रदेश चुनाव जीतने का मास्टर प्लान तैयार कर रही हैï? दरअसल, हर चुनाव से पहले बुंदेलखंड में सूखे की समस्या मुद्दा बनती रही है। इसके नाम पर कितनों ने सत्ता का सुख भी भोगा, लेकिन यहां के किसानों का दुख आज भी कम नहीं हुआ है। पानी की किल्लत के कारण यहां के हजारों किसान पलायन कर गए। यही हाल रहा तो पलायन और तेज होगा। जाहिर है मोदी एक तीर से कई निशाना साधना चाहते हैं। वे महोबा में सिंचाई परियोजना की सौगात देकर न केवल यहां के किसानों को बेहतरी का भरोसा दिलाने की कोशिश करेंगे बल्कि इसके बहाने पूर्वांचल के उन किसानों को भी बताने की कोशिश करेंगे कि उनके यहां भी केंद्र सरकार सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं होने देगी। मोदी और भाजपा दोनों को यह बात अच्छी तरह पता है कि प्रदेश के किसान यदि उनके पाले में आ गए तो चुनाव के नतीजे उनके पक्ष में आ सकते हैं। फिलहाल, प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए भाजपा कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाहती। लिहाजा वह न केवल जातीय समीकरण बिठाने में जुटी है बल्कि किसानों, मजदूरों और दलितों को भी साधने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, भाजपा बिना मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम की घोषणा चुनाव में उतर रही है। भाजपा को पता है कि उसके पास ऐसा कोई दमदार चेहरा नहीं है जिसके भरोसे वह यूपी के चुनाव को प्रभावित कर सके। भाजपा को उत्तर प्रदेश चुनाव के एकमात्र खेवनहार प्रधानमंत्री मोदी ही दिखाई दे रहे हैं। लिहाजा वह चुनाव से पहले यहां मोदी की ताबड़तोड़ रैलियां आयोजित कर रही है। लेकिन भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि केंद्र और राज्य के चुनाव में जमीन-आसमान का अंतर होता है। यहां स्थानीय मुद्दों और चेहरों पर चुनाव लड़े और जीते जाते हैं। सबक के लिए दिल्ली और बिहार के चुनाव नतीजे वह याद कर सकती है।

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