महिलाओं को आगे बढ़ाने की पहल

राज्य सरकार के इस फैसले का निश्चित रूप से सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे न केवल हाशिए पर रह रही महिलाएं समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगी बल्कि आत्मनिर्भर होकर अपने मनमुताबिक जीवनयापन कर सकेंगी। सच तो यह है कि समाज और देश की तरक्की तब तक नहीं हो सकती जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत न किया जाए।

sanjay sharma editor5जब पूरे देश में तीन तलाक पर सियासत चल रही हो, बहसें चल रही हों, ठीक उस वक्त प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में विधवा और तलाकशुदा महिलाओं की अधिकतम उम्र सीमा को समाप्त करने के ऐलान को एक स्वागत योग्य कदम माना जा सकता है। ताजा फैसले के मुताबिक अब ऐसी महिलाएं चाहें तो सेवानिवृत की उम्र से पूर्व प्रदेश की किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकती हैं। वे अपनी योग्यता के मुताबिक नौकरी प्राप्त कर सकती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। यह कड़वी सच्चाई है कि हमारे समाज में व्याप्त पितृसत्तात्मक सोच ने ऐसी महिलाओं को हमेशा हाशिए पर रखने की कोशिश की है और यह कोशिश आज भी जारी है। यह दीगर है कि अब समय बदल रहा है और महिलाएं भी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में काम कर रही हैं। वे तेजी से आगे बढ़ रही हैं। बावजूद इसके अभी भी महिलाओं की भागीदारी उनकी संख्या के अनुपात में बेहद कम है। विधवा और तलाकशुदा महिलाएं तो बेहद विपरीत स्थितियों में जीवनयापन करने को अभिशप्त हैं। शहरी क्षेत्र में भले की उन पर उतनी बंदिशें न हों लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी हालत अच्छी नहीं है। उन महिलाओं की हालत और भी खराब है, जिनके पास न किसी प्रकार के आय का जरिया है न ही सगे-संबंधियों का आसरा। ऐसी महिलाएं रोजी-रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। इसमें तमाम महिलाएं ऐसी भी हैं जो शिक्षित हैं, लेकिन उन्हें जरूरत के वक्त नौकरी नहीं मिल पाती है। लिहाजा उन्हें तमाम जटिल परिस्थितियों से दो-चार होना पड़ता है। ऐसी शिक्षित महिलाओं के सरकारी नौकरी पाने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा अधिकतम आयु सीमा ही है। लिहाजा वे योग्यता रखते हुए भी सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन तक नहीं कर पाती हैं। राज्य सरकार के इस फैसले का निश्चित रूप से सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे न केवल हाशिए पर रह रही महिलाएं समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगी बल्कि आत्मनिर्भर होकर अपने मनमुताबिक जीवनयापन कर सकेंगी। सच तो यह है कि समाज और देश की तरक्की तब तक नहीं हो सकती जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत न किया जाए। आर्थिक रूप से सक्षम महिला ही एक स्वस्थ और जागरूक समाज का निर्माण कर सकती है। महिलाओं के हित में उठाया गया हर कदम देश को खुशहाली के करीब ले जाता है। अत: ऐसे निर्णयों के पीछे सियासत देखने से बचने की जरूरत है।

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