महापौरों के अधिकारों में कटौती पर राष्ट्रपति लेंगे निर्णय

राज्यपाल ने संबंधित आर्डिंनेंस को भेजा राष्ट्रपति के पास

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। उत्तर प्रदेश में महापौरों और नगरपालिका अध्यक्षों के अधिकारों की कटौती की आजम खां की एक और कोशिश को राजभवन ने झटका दे दिया है। राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश नगरीय स्थानीय स्वायत्त शासन विधि (संशोधन) अध्यादेश, 2016 को निर्णय के लिए राष्ट्रपति को भेज दिया है। अब राष्ट्रपति की उस पर अंतिम फैसला लेंगे।
प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 28 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश नगरीय स्थानीय स्वायत्त शासन विधि (संशोधन) अध्यादेश- 2016 को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा था। प्रस्तावित अध्यादेश में नगर निगम के महापौर और नगरपालिका के अध्यक्ष से नगर निगमों और नगर पालिकाओं में विभिन्न श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार छीन लिया गया है। इसे राज्य सरकार एवं स्थानीय निकायों के निदेशक में निहित किये जाने का प्रस्ताव है। परीक्षण के बाद राज्यपाल ने पाया कि प्रस्तावित संशोधनों से नगर निगम एवं नगर पालिका जैसी स्वायत्तशासी संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित होती है। वहीं यह प्रस्ताव लोकतंत्र की मूल अवधारणा और संविधान के प्रावधानों के भी विरुद्ध है। उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 और उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 के वर्तमान प्रावधानों के अन्तर्गत विभिन्न श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार मेयरों व अध्यक्षों में निहित है। वहीं 74वें संविधान संशोधन के जरिए नगर निगमों एवं नगर पालिकाओं जैसे स्थानीय निकायों को स्वायत्तशासी निकाय का दर्जा दिया गया है। इससे पहले राज्यपाल उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2015 एवं उत्तर प्रदेश नगरपालिका विधि (संशोधन) विधेयक 2015 भी राष्ट्रपति को संदर्भित कर चुके हैं। दोनों ही विधेयक मेयरों व अध्यक्षों के अधिकारों की कटौती और उनके खिलाफ राज्य सरकार को कार्रवाई की ताकत देते थे।

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