महागठबंधन की आहट ने बढ़ाई माया की मुश्किलें

  • बसपा प्रमुख ने सभी कोआर्डिनेटरों व प्रमुख नेताओं को लखनऊ में किया तलब
  • को-आर्डिनेटरों व प्रमुख नेताओं का फीडबैक तय करेगा प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। प्रदेश में महागठबंधन होने की आहट से बसपा सुप्रीमो मायावती की नींद उड़ गई है। तेजी से बदल रहे सियासी घटनाक्रम से निपटने की तैयारियों व महागठबंधन बनने पर पड़ऩे वाले प्रभाव की जानकारी के लिए गुरुवार को पार्टी के सभी को-आर्डिनेटरों व प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई गई है। जिसमें इस पर चर्र्चा के साथ पदाधिकारियों से उनके जिलों के बारे में फीडबैक लिए जाएंगे। चर्चा है कि यह बैठक काफी अहम हैं। इसमें पार्टी मुखिया चुनाव संबंधी दिशा निर्देश तो देंगी ही साथ में कई बदलाव भी हो सकते हैैं।
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सभी राजनैतिक दल सक्रिय हैं। वहीं इधर बीच सपा में कलह समेत अन्य मुद्दों के बाद प्रदेश के सियासी घटनाक्रम में तेजी से बदलाव हुए हैं। भाजपा को रोकने के लिए सूबे में कांग्रेस, सपा अन्य दलों को साथ लेकर महागठबंधन बनाने की फिराक में हैं। इसके लिए इन दलों के प्रमुख नेताओं के बीच मुलाकातों का सिलसिला चल रहा है। महागठबंधन होने की सुगबुगाहट ने बसपा मुखिया मायावती के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। महागठबंधन की चर्चा के बाद बसपा हाईकमान ने 10 नवम्बर को अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक बसपाइयों के लिए अहम इसलिए भी मानी जा रही है, क्योंकि इसमें महत्वपूर्ण फैसले हो सकते हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती इस बैठक में चुनावी तैयारियों को लेकर दिशा-निर्देश तो देंगीं, साथ ही मुस्लिम मतों को लेकर भी रणनीति बनाएंगी। बसपा से जुड़े नेताओं ने बताया कि बसपा सुप्रीमो की इस बैठक में पार्टी के सभी बड़े नेताओं और को-ऑर्डिनेटरों से उनके जिले के बारे में फीडबैक लिया जाएगा। यूपी के सबसे बड़े सियासी नबे में शुमार सत्तासीन सपा में चल रहे विवाद के बाद जनता की सोच के संबन्ध में जानकारी ली जाएगी। साथ ही चर्चा महागठबंधन पडऩे वाले प्रभाव उससे निपटने की तैयारियों पर भी चर्चा की जाएगी।

बदले जा सकते हैं प्रत्याशी

महागठबंधन की चर्चा के बीच बुलाई गई बसपा की बैठक से सबसे ज्यादा प्रत्याशी सशंकित हैं। बसपा सूत्रों के मुताबिक फीडबैक लेने के बसपा सुप्रीमो कई प्रत्याशियों को बदल सकती हैं। बैठक में चर्चा होगी कि महागठबंधन होने के बाद मौजूदा प्रत्याशी मजबूती से चुनाव लड़ सकेगा की नहीं। यदि नहीं तो उसके स्थान पर प्रत्याशी बदल कर मजबूत उम्मीदवारों को टिकट देने पर विचार विमर्श होगा। ऐसे में को-आर्डिनेटरों और प्रत्याशी के द्वारा दिया गया फीडबैक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद से प्रत्याशियों की तरफ से इन को-आर्डिनेटरों के यहां दरबार करने की खबरें भी सुनी जा रही हैं।

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