बुआ को तकलीफ है कि फिर आ रही है सपा: अखिलेश

मुख्यमंत्री ने मायावती के बयान सपा दो फाड़ में हो चुकी है पर किया पलटवार
लोकभवन में आयोजित कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में 49 प्रस्तावों पर लगाई मुहर
राजधानी के बटलर पैलेस कॉलोनी में राज्य अतिथि गृह बनाने के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
गन्ने के रेट में 25 रुपये की बढ़ोतरी और एसजीपीजीआई के लिए 70 करोड़ रुपये देने का निर्णय

18-nove-page-114पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सपा सुप्रीमो मायावती पर पलटवार करते हुए कहा कि बुआ को ये तकलीफ है कि सपा फिर आ रही है। इसलिए सपा सरकार के खिलाफ जब भी मौका मिलता है, बोलती रहती हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार के नोटबंदी के फैसले पर कहा कि केन्द्र सरकार ने बिना तैयारी के 500 रुपये के पुराने और हजार रुपये की नोट बंद करने का निर्णय लिया। इससे पूरे देश की जनता परेशान है। इससे किसानों की रबी की फसलों की बुआई का काम प्रभावित होगा। छोटे उद्योग धंधे वालों को परेशानी हो रही है। यदि कारखाने बंद हो जायेंगे, श्रमिकों को पैसा कहां से मिलेगा। इसलिए सरकार को नोट बंद करने का फैसला जनता को क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं, उनसे किस तरह निपटा जा सकता है। इस बात का ध्यान रखकर नोट बंद करने का निर्णय लेना चाहिए था।
अखिलेश यादव ने कैबिनेट मीटिंग में 49 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिसमें एसजीपीजीआई को 70 लाख रुपये देने, गन्ने का समर्थन मूल्य 25 रुपये बढ़ाने, लेखपालों को लैपटॉप और स्मार्टफोन देने, 170 नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट परियोजना के संचालन, सैफई में संगीत महाविद्यालय की स्थापना, हरदोई के संडीला क्षेत्र में 400 करोड़ रुपए के निवेश और पेप्सी के बाटलिंग प्लांट स्थापित करने समेत कई अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा सरकार ने पीपे के पुलों पर पथकर वसूली समाप्त करने, पीलीभीत में कलीनगर व अमरिया, कन्नौज में हसेरन, चंदौली में नौगढ़, मैनपुरी में कुरावली, शाहजहांपुर में कलां को तहसील बनाने के प्रस्ताव पर मंजूरी दी। इसके अलावा देवरिया के बरियारपुर को नगर पंचायत का दर्जा देने और मथुरा में वृंदावन को प्रथम श्रेणी की नगर पालिका परिषद बनाने का प्रस्ताव भी पास हो गया। इतना ही नहीं भूमि अधिग्रहण के नये अधिनियम के मसौदे को भी मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट की बैठक में मल्टीप्लेक्स छविगृह खोलने के लिए लागू प्रोत्साहन योजना, राज्य संपत्ति विभाग के बेकार पड़े वायुयान ïएवं हेलीकॉप्टर को बचेने और 13 नए वाहन खरीदने का निर्णय भी लिया गया।

महाराष्टï्र सरकार में भाजपा मंत्री की गाड़ी से पकड़े गये 91 लाख तो उधर चुनाव आयोग ने कहा उंगली में न लगाएं स्याही

भाजपा के पूर्व मंत्री रेड्ïडी की बेटी की शादी के पांच सौ करोड़ का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि महाराष्टï्र के सहकारिता मंत्री की गाड़ी से 91 लाख हुए बरामद, चुनाव आयोग ने दिया नोटिस

लखनऊ। एक तरफ लोग दो हजार रुपये के लिए लाइन लगाकर नोट बदलने को परेशान हो रहे हैं तो दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं के कृत्य से सरकार की मुसीबतें बढ़ गई हैं। आज महाराष्टï्र के सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख की गाड़ी से पांच सौ और एक हजार के लाखों नोट बरामद होने से विपक्ष ने हंगामा किया। उधर, चुनाव आयोग ने सरकार से कहा है कि आने वाले समय में पांच राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में उंगली में स्याही लगाने से कुछ भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, लिहाजा उंगली में स्याही न लगाई जाये।
भाजपा के सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख की जिस गाड़ी से ये नकदी बरामद हुई है उस पर लोक मंगल समूह लिखा है। देशमुख से पहले भाजपा के विधायक सुधीर गाडगिल के भाई की कार से छह करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई थी। मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि यह रकम उन्होंने गन्ना मजदूरों को देने के लिए निकाली थी।
इस वाकये से महाराष्टï्र से लेकर दिल्ली तक हडक़ंप मच गया है। सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग ने नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि जब पांच सौ और एक हजार के नोट बंद कर दिए गये हैं तो उनके पास से इतनी बड़ी रकम कहां से मिली।
महाराष्टï्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सांवत ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सहकारिता मंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाये। इससे पहले पंजाब में एक भाजपा नेता के हाथों में दो हजार का नोट तब वायरल हो गया था जब उन्होंने पीएम की घोषणा से पहले ही यह नोट सोशल मीडिया पर डाल दिया था। इसके अलावा पीएम के नोट बंदी के ऐलान के दिन बंगाल भाजपा द्वारा करोड़ों रुपये बैंक में जमा कराने को लेकर भी भाजपा को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

नोट बंदी का साइड इफेक्ट
मोदी सरकार की नोट बंदी का असर अब मानवीय संवेदनाओं पर भी पडऩे लगा है। राजधानी में जहां एक ओर लोग नोटों को बदलवाने के लिए बैंकों और एटीएम में सुबह से देर शाम तक कतार लगाए हुए है वहीं दूसरी ओर एक पुजारी के जब पैसे खत्म हो गए तो उसने अपने पालतू बंदर की लाश को ही इनकम का जरिया बना लिया। पुजारी ने दुबग्गा में सडक़ के किनारे बंदर की लाश रख दी और उसके अंतिम संस्कार के लिए लोगों से पैसे मांगने शुरू कर दिए। आने-जाने वाले लोगों ने तरस खाकर कुछ पैसे उनकी झोली में डाल दिए।

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