बासित का बयान पाकिस्तान और वार्ता

सवाल यह है कि अचानक पाकिस्तान भारत के साथ वार्ता का इच्छुक क्यों हो गया? क्या आतंकवाद और कश्मीर मुद्दे को दरकिनार कर भारत-पाक के रिश्ते मधुर हो पाएंगे? क्या इतिहास इसकी अनुमति देगा? क्या पाक आर्मी, खुफिया एजेंसी आईएसआई और कट्टरपंथी वार्ता के पक्षधर हैं? यदि नहीं तो क्या पाकिस्तान के हुक्मरान इनको दरकिनार कर वार्ता कर पाएंगे?

sajnaysharmaसीमा पर गोलीबारी के बीच पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारत के साथ बिना शर्त वार्ता की इच्छा जाहिर की है। उनका कहना है कि भारत का पाक से वार्ता न करने का फॉर्मूला गलत है। रिश्तों को कश्मीर मुद्दे का बंधक नहीं बनाना चाहिए। सवाल यह है कि अचानक पाकिस्तान भारत के साथ वार्ता का इच्छुक क्यों हो गया? क्या आतंकवाद और कश्मीर मुद्दे को दरकिनार कर भारत-पाक के रिश्ते मधुर हो पाएंगे? क्या इतिहास इसकी अनुमति देगा? क्या पाक आर्मी, खुफिया एजेंसी आईएसआई और कट्टरपंथी वार्ता के पक्षधर हैं? यदि नहीं तो क्या पाकिस्तान के हुक्मरान इनको दरकिनार कर वार्ता कर पाएंगे? क्या बासित के बयान के पीछे भारत की पाक को लेकर बदली रणनीति तो नहीं काम कर रही है? आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने पाक को कई वैश्विक संगठनों की बैठक में कटघरे में खड़ा किया है। इस मामले में चीन भी पाकिस्तान की पैरवी खुलकर नहीं कर पाया। यहीं नहीं भारत कई बार कह चुका है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को प्रश्रय देता रहेगा, वार्ता नहीं हो सकेगी।
इसके अलावा भारत ने संघर्षविराम उल्लंघन को लेकर भी कड़ा रुख अपना रखा है। इससे भी पाकिस्तान सकते में हैं और अपने उच्चायुक्त के जरिए वार्ता की जमीन तैयार करना चाहता है। पिछले दिनों पीएम मोदी ने यह कह कर कि सिंधु नदी के हिस्से का एक-एक बूंद वह भारत के किसानों को मुहैया कराएंगे, पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। यदि भारत ऐसा करता है तो पाकिस्तान की आर्थिक हालत और खस्ता हो जाएगी। यही वे वजहें हंै जिसके कारण बासित चाहते हैं कि भारत अगले माह होने वाली हार्ट ऑफ एशिया समिट में पाक से वार्ता कर लें। अमृतसर में होने वाली इस समिट में पाकिस्तान के विदेश सचिव सरताज अजीज आने वाले हैं। लेकिन खुद बासित कश्मीर राग अलापना में पीछे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक मुद्दा है, लेकिन मुख्य मसला कश्मीर है। सवाल यह है कि वार्ता को पटरी पर उतारने का काम कौन करता रहा है। पाक कई बार भारत के साथ कोई न कोई शर्त लगाकर वार्ता को बेपटरी करता रहा है। खुद पाक उच्चायुक्त बासित ने कश्मीरी अलगाववादियों को वार्ता के लिए दिल्ली आने का न्यौता देकर भारत को भडक़ा दिया था। यही नहीं अजीज ने भारत से बातचीत के बीच कश्मीर को मुद्दा बनाने का बयान दिया था। यदि वाकई पाकिस्तान वार्ता को तैयार है तो उसे भारत की चिंताओं पर न केवल गौर करना पड़ेगा बल्कि उसके निदान का आश्वासन भी देना होगा वरना बिना शर्त वार्ता की पेशकश का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

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