बदहाली का शिकार जलकल विभाग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। अंग्रेजों के शासन के दौरान लगभग सौ साल पहले स्थापित ऐशबाग वाटर वक्र्स की हालत वर्तमान में ठीक नहीं है। यहां पानी स्टोर करने के लिए बनाए गए सेटलिंग टैंकों की सफाई पिछले कई सालों से नहीं हुई हैं। टैंक में गंदगी की भरमार है। पानी फिल्टर करके लगभग पंद्रह लाख लोगों को पिलाया जा रहा है। यह हाल तब है जब तकनीक कई गुना विकसित हो चुकी है। कुल मिलाकर सौ साल पुरानी मशीनों के सहारे कई जोन की जनता की प्यास बुझाई जा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह विभाग लोगों के स्वास्थ्य के प्रति कितना सचेत है। जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत जरूर फिल्टरों के आधुनिक बेड बदले गए थे और एक पम्पिंग स्टेशन लगा था।
ऐशबाग वाटर वक्र्स में तीन सेटलिंग टैंक बने हुए हैं। इन टैंकों में गोमती से रॉ वाटर सीधे आता है। इनकी सफाई हर साल होनी चाहिए। क्योंकि कुछ ही महीनों में इन टैंकों में गाद एकत्रित होने लगती है।

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