बढ़ती उम्र के साथ बढ़ जाता है गंभीर बीमारियों का खतरा

  • महिलाओं में मोनोपॉज और पुरुषों में एंडोपॉज की वजह से सामने आती हैं कई तरह की विकृतियां
  • बेहतर खानपान, मेडिसिन, चिकित्सकीय जांच और योग क्रिया को अपनाए

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। इंसान की उम्र बढऩे के साथ ही शारीरिक और मानसिक स्तर पर तमाम तरह के बदलाव होते हैं। इन्हीं बदलावों की प्रक्रिया के दौरान स्त्रियों में मोनोपॉज और पुरुषों में एंडोपॉज की समस्या आती है। यदि समय रहते दोनों बीमारियों का इलाज न किया जाये, तो इंसान के कई अंगों में विकृति आने लगती है, जो बहुत खतरनाक होती है। ये कई बार जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए चिकित्सक हमेशा बढ़ती उम्र में शारीरिक और मानसिक बदलावों के प्रति लोगों को सचेत रहने की सलाह देते हैं।
केजीएमयू के यूरोलॉजिस्ट डॉ. विश्वजीत के मुताबिक महिलाओं में मासिक धर्म के स्थायी रूप से बंद होने की स्थिति को मोनोपॉज कहा जाता है। इस दौरान स्त्रियों में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन इतनी धीमी गति से और अल्प होते हैं कि लोगों को पता ही नहीं चल पाता है। महिलाओं का मामूली बात पर गुस्सा करना और भावुक होना आम बात हो जाती है। इन बदलावों को बहुत सी महिलाएं बीमारी समझकर इलाज कराने लगती हैं। नींद और तनाव दूर करने की दवाएं खाने लगती हैं। जबकि यह कोई बीमारी नहीं होती। यह मोनोपॉज के लक्षण होते हैं। लेकिन कुछ महिलाओं को मोनोपॉज के दौरान यूरीन में कुछ कॉपम्लीकेशंस होने लगते हैं। चूंकि 45 से 50 वर्ष की आयु में महिलाओं में हर्मोन्स में बदलाव होता है। इसलिए महिलाओं के यूट्रस और यूरीन ब्लेडर में शिथिलता आ जाती है। ये दोनों अंग कुछ मामलों में अपनी जगह से खिसक भी जाते हैं। ऐसा होने पर यूरीन में महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को चिकित्सक की सलाह, दवाओं,योगा और कसरत के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।
वहीं आईएमए की पूर्व अध्यक्ष डॉ. रुखसाना खान ने बताया कि मोनोपॉज के बाद स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए बेहतर खानपान, मेडिसिन, चिकित्सकीय जांच और योग को जीवन में अपनाया जाना चाहिए। आमतोैर पर 45 से 50 वर्ष की आयु में महिलाओं का जीवन कई तरह के परिवर्तनों से गुजरता है। मासिक धर्म का आना धीरे धीरे बंद हो जाता है। इसलिए महिलाएं बिना किसी वजह के मायूस रहने लगती हैं। वह अचानक से रोने लगती हैं। कुछ लोगों को बहुत पसीना आने लगता है। किसी भी काम में मन नहीं लगता है। इसलिए खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। महिलाएं अच्छा और संतुलित आहार लें। योग को अपनी दिनचार्य में जरूर शामिल करें।

पुरुषों में भी होते हैं बदलाव

डॉ. विश्वजीत के मुताबिक पुरुषों में भी उम्र बढऩे के साथ कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। पुरुषों में उम्र बढऩे के साथ ही टेस्टोस्टेरान में बदलाव होने लगता है, जिसकी वजह से एन्डोपॉज होता है। उन्होंने बताया कि 40 की उम्र पार करने के बाद यदि लगातार आलस्य बना रहता है,साथ ही व्यक्ति पत्नी से दूरी बनाने लगता है। उसकी तोंद बढऩे लगती है, तो उसे यूरोलॉजिस्ट से सम्पर्क करना चाहिए। चिकित्सक व्यक्ति के शरीर में हर्मोन्स के स्तर की जांच कराकर इलाज शुरू कर सकता है। इस बीमारी का पता चलने पर इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में गलत दिनचर्या तथा खानपान के चलते पुरुषों में एन्डोपॉज का दौर जल्दी शुरू हो रहा है। लेकिन बहुत सारे पुरुष शर्म के चलते चिकित्सक के पास नहीं जाते हैं। ऐसे में शर्म करने की बजाय चिकित्सक से मिलकर अपनी समस्याओं पर बात करनी चाहिए और उसका समाधान निकालना चाहिए।

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