बच्चों में तेजी से फैल रहा ऑस्टियोपोरोसिस

  • विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस आज
  • इस बीमारी से पीडि़त व्यक्ति के हाथ, कूल्हों और कमर में होता है लगातार दर्द

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। आजकल अनियमित दिनचर्या और खान-पान में असंतुलन की वजह से बुजुर्गों के साथ ही बच्चों में भी ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी तेजी से फैल रही है। लेकिन लोग बच्चों को अपना शिकार बना रही इस साइलेंट बीमारी को लेकर गंभीर नहीं है। इस कारण बच्चों की हड्डियां पिचकने और टूटने का डर अधिक होता है। यदि कमर और कूल्हे की हड्डी टूट जाये, तो बच्चे को ठीक होने में काफी समय लग जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी को आम भाषा में खोखली हड्डी की बीमारी नाम दिया गया है। इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए प्रत्येक वर्ष 20 अक्टूबर को जागरुकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस बीमारी को लेकर आम जनमानस में भ्रान्तियां बहुत है, जिसमें से प्रमुख है कि लोग इसे बुजूर्गों को बीमारी मानते हैं। जबकि चिकित्सकों की राय इससे जुदा है।
केजीएमयू के बाल अस्थि शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अजय सिंह के मुताबिक इस बीमारी को लेकर लोगों में सामान्य धारणा बन गयी है कि यह बीमारी 40 से 45 वर्ष की उम्र में होती है। इस बीमारी का खतरा बुजुर्गों में अधिक होता है। लेकिन हकीकत यह है कि बुजूगों के साथ ही यह बच्चों में भी होती है। उन्होंने बताया कि बच्चों में यह बीमारी दो प्रकार से होती है। एक अवस्था में इस बीमारी के होने की वजह का ही पता नहीं चल पाता है,जबकि दूसरे में बीमारी के कारणों का पता चल जाता है। केजीएमयू में भी इलाज के लिए आने वाले अधिकांश बच्चों में बीमारी के वजह का पता ही नहीं चल पाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों में इस बीमारी के प्रारम्भ में कमर दर्द, कूल्हों का दर्द, पैरों में दर्द का बना रहना और साथ ही चलने-फिरने में समस्या होना पाया जाता है। यदि इस तरह के लक्षण लगातार बच्चे में बने हुए हैं, तो चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। सामान्य जांचों मे दर्द के कारणों का पता नहीं चल पाता है ,जिसके बाद बीएमडी डेक्सा नामक जांच करायी जाती है
डॉ. अजय का कहना है कि बच्चों की कमर की हड्डी बिना किसी विशेष चोट के पिचक जाती है, तो बीएमडी द्वारा इस बीमारी की जांच करनी चाहिए तथा बच्चों में विशेष मानकों द्वारा इस बीमारी की पुष्टि की जानी चाहिए। साथ ही यदि कोई बच्चा बिना किसी वजह के हाथ एवं पैर में दर्द की शिकायत करे तो भी बीएमडी के विशेष मानकों द्वारा ऑस्टियोपोरोसिस की पुष्टि की जानी चाहिए। जो लोग धूम्रपान करते हैं तथा लेड के अत्यधिक प्रभाव में होते हैं। उनके बच्चों में इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ यूके एवं डब्ल्यूएचओ ने वयस्कों में बीएमडी डेक्सा के जो मापदंड इस बीमारी के निदान के लिए बताये हैं, वह इससे पीडि़त बच्चों पर लागू नहीं हो सकते। लेकिन बच्चों में ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ बीएमडी से नहीं करना चाहिए। यदि समय पर बच्चों की बीमारी का पता चल जाए, तो इलाज के माध्यम से समस्या को दूर किया जा सकता है।

 

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