बच्ची की मौत के मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहा अस्पताल प्रशासन

  • इरम अस्पताल में गलत इंजेक्शन की वजह से बच्ची की मौत पर परिजनों ने लगाया आरोप
  • बच्ची का पिता न्याय की आस में भटक रहा दर-दर, अस्पताल प्रशासन ने शुरू नहीं की जांच

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। राजधानी के निजी और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की लापरवाही का मामला कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसलिए तीमारदारों की तरफ से चिकित्सकों की लापरवाही से मरीजों की मौत की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। इसी क्रम में इरम अस्पताल में एक बच्ची को गलत इंजेक् शन लगाये जाने और उसकी वजह से बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। बच्ची के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकों पर गंभीर आरोप भी लगाये हैं लेकिन अस्पताल प्रशासन मामले की जांच करवाने से बच रहा है। वहीं बच्ची के परिजन न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं।
गुडम्बा स्थित इरम अस्पताल में दस दिन पहले इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि इरम अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से बच्ची की हालत बिगडऩे पर भी इलाज नहीं किया गया। परिजनों की तरफ से मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर करने की गुहार भी नहीं सुनी गई। इसलिए परिजनों ने चिकित्सकों की दबंगई के खिलाफ 100 नम्बर पर फोन करके पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया और चिकित्सक से बच्ची का उचित इलाज कराने के लिए ट्रामा सेंटर भेजने का निर्देश दिया। उस वक्त तक बच्ची की हालत बहुत अधिक बिगड़ चुकी थी, इसलिए अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों के अपनी गर्दन फंसती देखकर बच्ची को रेफर कर दिया।

एक सप्ताह से आ रहा था बुखार

जानकीपुरम के गुडिय़नपुरवा निवासी पूजा (4) को पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। इसलिए परिजनों ने बच्ची को 15 अक्टूबर की शाम इरम अस्पताल में भर्ती कराया था। पूजा के पिता रामलखन का आरोप है मरीज का सिटी स्कैन समेत दर्जनों जांच कराने के बाद 17 तारीख को अस्पताल के चिकित्सकों ने डेंगू होने की बात बताई। इस दौरान इलाज के नाम पर चिकित्सक केवल खानापूर्ति करते रहे। इसी बीच 18 अक्टूबर को नर्स ने गलती से बगल वाले बेड पर भर्ती मरीज को लगाया जाने वाला इंजेक् शन बच्ची को लगा दिया। उसी के बाद बच्ची की हालत बिगडऩे लगी। बच्ची की हालत गंभीर होने पर पिता ने चिकित्सकों से इलाज करने का आग्रह किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए दूसरे अस्पताल में रेफर करने की बात कही लेकिन उसे भी चिकित्सकों ने नहीं माना। अस्पताल के कर्मचारी मरीज की फाइल इस काउंटर से उस काउंटर पर टहलाते रहे। आखिरकार परिजनों ने 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को बुलाया, तब अस्पताल प्रशासन ने बच्ची की फाइल बनाकर रेफर किया।

ट्रामा सेंटर से भी लौटाया गया मरीज

पुलिस की फटकार के बाद इरम अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्ची को रेफर तो कर दिया लेकिन अपने अस्पताल के जिस कर्मचारी को बच्ची के साथ ट्रामा सेंटर भेजा था, वह ट्रामा के गेट पर मरीज को छोडक़र फरार हो गया। वहीं ट्रामा सेन्टर के चिकित्सकों ने बच्ची की नब्ज टटोलने और इलाज करने की जहमत भी नहीं उठाई। ट्रामा के डॉक्टरों ने अस्पताल में वेंटीलेटर न होने की बात कह बच्ची को लोहिया अस्पताल ले जाने का फरमान सुना दिया। तब रामलखन मरीज को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे। वहां भी इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने बच्ची की फाइल देखी और भर्ती करने के इंकार कर दिया। लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। परिजनों का कहना है कि यदि चिकित्सकों ने जरा भी संवेदना दिखाई होती और बच्ची को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी।

पिता ने लगाई मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार

राम लखन ने अपनी बेटी के इलाज में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों की जांच को लेकर मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई है। वह बच्ची की मौत के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ जांच और जांच में दोषी पाये जाने पर सजा दिलवाने का संकल्प कर चुके हैं। लेकिन विभागीय व्यक्ति से जुड़ा मामला होने की वजह से स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी कुछ बोलने और जांच करने को तैयार नहीं है। इसलिए बच्ची की मौत के मामले को काजगों में दफन करने की साजिश रची जा रही है। इसमें अस्पताल प्रशासन भी मिला हुआ है। शायद मुख्यमंत्री की गुहार पर मरीज के परिजनों को न्याय मिल सके।

Pin It