फर्जी मुकदमों में फंसाकर लोगों से धन उगाही में जुटे राजधानी के कई पुलिसकर्मी

  • तबादलों के बाद भी जमे हैं थाने और चौैकियों में
  • शिकायतों के बाद भी न हुई जांच, न की गई कार्रवाई

आमिर अब्बास
captureलखनऊ। राजधानी में तैनात मठाधीश पुलिसकर्मियों के सामने अधिकारी बेबस हैं। पश्चिम क्षेत्र के कई थानों में तबादले के बाद भी ऐसे कई पुलिसकर्मी डटे हुए हैं। यहां ये न सिर्फ अपना दबदबा बनाये हुए हैं, बल्कि लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर उनसे धन उगाही कर रहे हैं। एक चौकी प्रभारी की लापरवाही के चलते तो राजधानी में बड़ा हादसा होते-होते बचा। हैरत यह कि तमाम शिकायतों के बावजूद आला अधिकारी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कुछ अधिकारी तो इस मामले पर बात तक करने से बचते नजर आते हैं।
राजधानी का पश्चिमी क्षेत्र काफी संवेदनशील माना जाता है। रसूखदार पुलिसकर्मी यहां वर्षों से जमे हैं। ये यहां कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ये पुलिसकर्मियों ने इस संवेदशील क्षेत्र को अपनी धन उगाही का जरिया बना लिया है। इससे संबंधित कई मामले चौक थाना क्षेत्र स्थित नक्खास चौकी के उजागर हुए हैं। यहां लंबे समय से तैनात चौकी प्रभारी नीरज ओझा ने इस संवेदनशील क्षेत्र को धन उगाही का जरिया बना लिया है। इन पर लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर न धन उगाही करने का आरोप है। इस मामले में इनकी शिकायत भी आला अधिकारियों से की गई है। जानकारी के अनुसार बीते माह इरफानिया मदरसे में किरायेदारी को लेकर हुए विवाद में भी नक्खास चौकी प्रभारी ने आरोपित महिला के साथ मिलकर पीडि़ता के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रयास किया था। लेकिन पीडि़ता ने इसकी जानकारी जब बड़े अफसरों को दी तो इसकी जांच पाटानाला चौकी प्रभारी को दे दी गयी। जहां पर एक बार फिर रसूखदार नक्खास चौकी प्रभारी ने मिलीभगत कर उस मामले को ही रफा-दफा करवा दिया। अगर इनकी सतर्कता और कार्य की बात कही जाए तो उसमें भी ये खरे उतरने में नाकाम ही दिखे। सूत्रों के अनुसार बीते दिनों मोहर्रम की शुरू होते ही गुलाम हुसैन पल पर एक बड़ी घटना होते-होते रह गयी। अगर वह घटना हो जाती तो शायद उससे पूरे पश्चिम क्षेत्र में शांति व्यवस्था बिगड़ सकती थी। लेकिन मौका रहते लोगों की सूझबूझ से शांति व्यवस्था बनी रही, जिसमें प्रभारी ने अपने स्थान से हिलने की जहमत तक नहीं की। सूत्र बताते हैं कि चौकी प्रभारी ने नक्खास में वसूली और धन उगाही के लिए एक सिपाही बंसलाल को लगा रखा है। जो प्रभारी के आदेशानुसार ई-रिक्शा चालक, टेम्पो चालक और मकडज़ाल में फंसे बेगुनाह लोगों से वसूली कर प्रभारी तक पहुंचाने का कार्य करता है। बंसलाल भी चौकी पर लंबे समय से तैनात है। यहीं नहीं इसके अलावा चौक थाना क्षेत्र के ही मेडिकल कॉलेज चौकी में तैनात सिपाही दीपक भी अपने रसूख और अधिकारियों की मेहरबानियों से स्थानांतरण के बाद भी मजबूती से जमाये हुए हैं। ऐसा ही एक रसूखदार हाशिम नामक पुलिस कर्मी वजीरगंज थाने में तैनात है जो न सिर्फ लंबे समय से थाने में तैनात है बल्कि पूरे थाने पर अपना दबदबा बनाये हुए है। सूत्र बताते हंै वो कई बार खुद को बड़े अधिकारी का खास बताकर थाने में अपनी मनमानी करता भी नजर आया। यहीं नहीं ये सिपाही कई लोगों पर खुद को बड़े अधिकारी का करीबी बता कर रौब झाड़ता भी देखा गया है। हैरत यह है कि ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई। लिहाजा ऐसे पुलिसकर्मियों के हौसले बुलंद हैं।

आईजी से लेकर एसएसपी तक का नहीं उठा फोन

पुलिस विभाग के मुखिया डीजीपी जावीद अहमद के निर्देश और आदेशों को सभी अधिकारी अब ताक पर रख चुके हंै। इन अधिकारियों के लिए डीजीपी के आदेश कोई मायने नहीं रखते हैं। यही कारण है कि बीते दिनों डीजीपी ने खुद सभी अधिकारियों को उनके सीयूजी नम्बर उठाने के सख्त निर्देश दिये थे। लेकिन उनके निर्देश सिर्फ और सिर्फ वे आदेश बनकर रह गये, जिस पर कोई भी अधिकारी अमल करना तो दूर ध्यान देना भी उचित नहीं समझता। इस बात का खुलासा तब हुआ जब संवाददाता ने रसूखदार और धन उगाही करने वाले ऐसे पुलिस कर्मियों के संबंध में पूछने का प्रयास किया, जो लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर धन उगाही के लिए अपने जाल में फंसा रहे हैं। इस संबंध में आईजी, डीआईजी व एसएसपी सभी को फोन किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन रिसीव करने तक की जहमत नहीं की।

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