प्रियंका गांधी कहेंगी विकास के लिए अखिलेश को बनाओ सीएम!

  • मुख्यमंत्री की लोकप्रियता के सहारे प्रदेश में सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस 
  • कांगेस चाहती है कि गठबंधन की बात नेताजी से नहीं अखिलेश से हो
  • अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट रखने के लिए दोनों दल आ रहे हैं नजदीक

1संजय शर्मा
अगर कांग्रेस और सपा के बीच सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ दिनों में कांग्रेस की सुपर स्टार प्रियंका गांधी यूपी की जनता से अखिलेश यादव को एक बार फिर सीएम बनाने की अपील करती नजर आ सकती है। कांग्रेस और सपा के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन के बारे में अंतिम फैसला तभी लिया जाय जब अखिलेश यादव इस पर अपनी मुहर लगाएं। सपा की मजबूरी है कि अगर वह कांग्रेस के साथ नहीं आई तो मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है। दूसरी ओर राहुल गांधी की रथ यात्रा का कोई सार्थक परिणाम न देखकर और कांग्रेस के बड़ेे नेताओं के बीच मची भगदड़ से कांग्रेस भी समझ रही है कि अगर उसे अपनी इज्जत बचानी है तो सपा का साथ लेना ही होगा।
कुछ ही महीने पहले राहुल गांधी ने अपने यूपी यात्रा के दौरान इस बात के संकेत भी दिए थे जब वह सीधे तौर पर अखिलेश यादव पर हमला करने से बचते हुए नजर आए थे। उन्होंने अखिलेश को अच्छा लडक़ा बताया था। बदले में अखिलेश यादव ने भी कहा था कि राहुल भी अच्छे लडक़े हैं अगर वह यूपी में आते रहेंगे तो दोस्ती हो सकती है। इसी बातों से दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
मगर इस दौर में सपा गठबंधन के साथ-साथ अकेले चुनाव लडऩे की संभावनाओं पर भी विचार कर रही थी क्योंकि उसको लगता था कि सीएम अखिलेश यादव की छवि के सहारे वह चुनाव में काफी बेहतर प्रदर्शन कर लेगी, मगर यादव परिवार में मचे घमासान के बीच सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा उसका सबसे मजबूत अल्पसंख्यक वोट भी बिखरने की स्थिति में आ गया। ऐसे में सपा के लिए भी यह जरूरी हो गया था कि वह कांग्रेस जैसे किसी दल के साथ गठबंधन करे जिस पर अल्पसंख्यक को भरोसा हो।
कांग्रेस भी पीके की सारी रणनीति देखने के बाद हताश हो गई। उसको समझ में आ गया कि यूपी में अगर वह अपनी पिछली सीटें भी बचा लें तो उसके लिए बड़ी बात होगी। शीला दीक्षित के रूप में उसका ब्राह्मïण कार्ड लगभग फेल हो गया। क्योंकि रीता बहुगुणा जैसी तेज तर्रार नेता ने भाजपा का दामन थाम लिया। उसके कई विधायक भी भाजपा के खेमे में चले गए। कांग्रेस समझ गई थी कि उसका गठबंधन किसी बड़े दल से नहीं हुआ तो उसका खासा नुकसान हो जाएगा।
गठबंधन की पहल के लिए शिवपाल सिंह यादव ने केसी त्यागी के घर पर पीके से बातचीत की और आज पीके सपा मुखिया मुलायम सिंह से भी मिले। बताया जाता है कि इस मीटिंग में गठबंधन के विषय में विस्तार से बात हुई।
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि गठबंधन का अंतिम फैसला तभी हो जब अखिलेश यादव के साथ बातचीत हो और वह इस गठबंधन के लिए सहमति दें। जिस समय यादव परिवार में झगड़ा चरम पर था तब भी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने संकेत दिया था कि वह अखिलेश खेमे से बात करना चाहते हैं।
इस गठबंधन के बारे में कोई बोलना नहीं चाहता, मगर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गठबंधन लगभग तय है। यह बात सभी जानते हैं कि एक मंच से अगर प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव दोनों संबोधित करें तो इसका जबरदस्त फायदा दोनों दलों को होगा। प्रियंका गांधी का जादू अभी भी बरकरार है और जाहिर है जब वह अखिलेश को सीएम बनाने की बात कहेंगी तो उनकी बात की सबसे ज्यादा अपील नौैजवानों को भाएगी जो यूपी के सबसे बड़े
वोटर हैं।

गठबंधन की राजनीति में सबसे भरोसेमंद अखिलेश

अखिलेश यादव ने न सिर्फ यूपी में बल्कि देश की राजनीति में भी खुद को भरोसेमंद नेता साबित किया है। चाहें नीतीश कुमार हो या फिर कांग्रेस के नेता। सब चाहते हैं कि अगर गठबंधन की बात हो तो सिर्फ अखिलेश यादव से हो। सपा के रजत जयंती समारोह में नीतीश कुमार ने आने के लिए जो मना किया उसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही बताया जाता है कि नीतीश यह संदेश नहीं देना चाहते थे कि वह यादव परिवार में अखिलेश के विरोध में बनें दूसरे खेमे के समर्थन में हैं, जाहिर है अब जो भी गठबंधन होगा उसमें सबसे प्रमुख भूमिका अखिलेश की ही रहने वाली है।

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