प्रशासन ने लोकवाणी केंद्रों को बंद करने का लिया फैसला

लखनऊ। फर्जी निवास प्रमाणपत्र बनवाकर सेना में भर्ती के खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने राजधानी के सभी लोकवाणी केंद्र बंद करने का फैसला लिया है। इनकी जगह जनसुविधा केंद्रों से ही डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। इन्हें जारी करने से पहले लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट भी ऑनलाइन ही लगेगी। डीएम सत्येंद्र सिंह ने इस मामले में मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं। जिला प्रशासन ने हर वॉर्ड स्तर पर एक जनसुविधा केंद्र संचालित करने का निर्णय किया है। इस संबंध में प्रभारी अधिकारी और एडीएम एफआर ने ई-सुविधाओं से जुड़े अनुभाग प्रबंधक से दस दिन में वॉर्डवार नए जनसुविधा केंद्रों के लिए स्थलीय सर्वे रिपोर्ट देने को कहा है। राजधानी में अभी 105 जनसुविधा केंद्र हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक 400 जनसुविधा केंद्र और खोले जाएंगे। जिन वार्ड की आबादी 35 हजार से अधिक होगी, वहां दो केन्द्र चलाये जाने की योजना है। वहीं डीएम सत्येंद्र सिंह ने बताया कि फर्जी प्रमाणपत्र के मामले में मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच का जिम्मा एडीएम ईस्ट वीरेंद्र कुमार पाण्डेय को दिया गया है।

सिटी बस में मिलेगा लखनऊ महोत्सव का टिकट
लखनऊ। लखनऊ महोत्सव को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। महोत्सव देखने के लिए लोगों को टिकट लेने में कोई परेशानी न हो, इसलिए सिटी बस में लखनऊ महोत्सव का टिकट देने का प्रबंध किया गया है। इतना ही नहीं घर बैठे-बैठे भी एप के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुक कराया जा सकता है। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर लखनऊ महोत्सव की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने 25 नवंबर से 5 दिसंबर तक होने वाले महोत्सव में विकास कार्यों की प्रदर्शनी लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा महोत्सव स्थल तक लगभग 100 सिटी बसों का संचालन किया जायेगा। इसमें सिटी बस के किराये में लखनऊ महोत्सव का टिकट भी शामिल रहेगा। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार दर्शकों को नई करेंसी उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित बैंकों से काउंटर लगाने के लिए अनुरोध किया जायेगा।

मुख्यमंत्री के फैसलों को अनदेखा कर रहा स्वास्थ्य महकमा:डॉ.अशोक
लखनऊ। प्रान्तीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार यादव ने कहा कि चिकित्सा संवर्ग के हित में मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण फैसले जैसे विशिष्ट एसीपी को लागू करने में स्वास्थ्य महानिदेशालय और शासन स्तर पर शिथिलता बरती गई है। शिथिलता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चााहिए। एसीपी समेत कई बिन्दुओं पर शासन-प्रशासन की लापरवाही के कारण एसोसिएशन के पदाधिकारियों में रोष व्याप्त है। यदि मांगों का निस्तारण जल्द नहीं किया गया तो एसोसिएशन की ओर से कई महत्वपूर्ण कदम उठाये जा सकते हैं। जिसके लिए कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की चार दिसम्बर को बैठक आहूत की गई है। बैठक में पदाधिकारी मांगों के निस्तारण के लिए कई बिन्दुओं पर चर्चा कर अहम निर्णय लेंगे। संघ के महासचिव डॉ. सचिन वैश्य ने बताया कि संवर्ग के 11 हजार चिकित्सक एसीपी एवं विभागीय प्रोन्नतियों की प्रतीक्षा करते-करते सेवा निवृत्त हो रहे हैं। यह स्थिति दुखदायी है। उन्होंने कहा कि सेवा निवृत्त चिकित्साधिकारियों को पेंशन पुनर्निर्धारण कराने के लिए शासन एवं महानिदेशालय की शिथिलता के कारण चक्कर लगाने पड़ रहे है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 1990-92 में तदर्थ नियुक्ति चिकित्साधिकारी को उनकी तदर्थ नियुक्ति की तिथि से सभी सेवा सम्बन्धी लाभ दिए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन शासन एवं निदेशालय की मनमानी के चलते तदर्थ नियुक्ति से चिकित्साधिकारियों को लाभों से वंचित रखा जा रहा है, ऐसे 286 चिकित्साधिकारियों की सूची पिछले डेढ़ सालों से लेटलतीफी का शिकार है।

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