प्रवर्तन अधिकारी अवनीन्द्र की साठ-गांठ से बिल्डरों के हौसले बुलंद

  • मानकों की अनदेखी कर संकरी गलियों में बना रहे बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें
  • बिल्डिंग मैटीरियल में भी धड़ल्ले से की जा रही है मिलावट
  • चार पहिया तो क्या दो पहिया लेकर गली से गुजरना भी मुश्किल
  • शहर के कई इलाकों में पांच फुट की गली में तन गया पांच मंजिला अपार्टमेण्ट

अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। एलडीए के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सूरत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी और अभियंता इतने बेशर्म हो गए हैं कि उन्हें शासनादेश और मानकों की जगह केवल अपनी जेबें भरने की चिन्ता है। इसके लिए वह किसी भी उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना और जनता की जान के साथ खिलवाड़ करने के भी नहीं चूकते हैं।
शहर की तंग गलियों में मनमाने ढंग से एलडीए के अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत से अवैध निर्माण हो रहा है, जिसकी जानकारी एलडीए के प्रवर्तन अधिकारी अवनीन्द्र कुमार सिंह और अन्य संबंधित अफसरों को भी बखूबी है लेकिन सब अनजान बने रहते हैं। लेकिन क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति बिना जानकारी के निर्माण शुरू करता है, तो उसके बाद वसूली करने और मानकों का हवाला देखकर निर्माण कार्य रुकवाने के लिए अभियंता और उनके कारिन्दे जरूर पहुंच जाते हैं। इसी वजह से अवैध निर्माण कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नरमी बरती जाती है। जो शहर में अवैध रूप से बिल्डिंगें बनाकर और खराब मैटीरियल लगाकर लोगों को मकान और फ्लैट बेचने वालों की संख्या बढ़ाने वाला कदम साबित हो रहा है। यदि ऐसी ही रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब शहर में रहने वाले लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाये।

बिल्डिंग मैटीरियल में भी नहीं है पारदर्शिता

शहर में बन रहे अवैध निर्माणों में इस्तेमाल होने वाले बिल्डिंग मैटीरियल में भी बिल्डर घपला करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बिल्डरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह मकान खरीदने वालों की जान से खिलवाड़ करने में भी गुरेज नहीं करते हैं। अपार्टमेंट निर्माण में खराब मैटीरियल का इस्तेमाल और कम से कम कीमत लगाकर अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं। इसलिए शहर में फ्लैट लेने वाले लोग कुछ ही वर्षों में मकान खराब होने की शिकायत करने लगते हैं।
जानकारी के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई

अवैध निर्माण के संबंध में प्रवर्तन अधिकारी अवनीन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अगर मेरे पास कोई शिकायत आती है, तो मैं कार्रवाई कराता हूं। वैसे भी मैं अपने क्षेत्र में कई बार अभियान चला चुका हूं और कार्रवाई भी की गयी है। इसके अलावा यदि गुपचुप तरीके से अवैध निर्माण किया जा रहा है, तो दोबारा कार्रवाई की जाएगी।

ट्रांस गोमती में तेजी से फल-फूल रहा अवैध निर्माण

शहर के ट्रांस गोमती इलाकेकी तंग गलियों में अवैध निर्माण तेजी से फल फूल रहा है। इसकी भनक एलडीए के अधिकारियों को भी है, लेकिन बिल्डर्स के माध्यम से हर महीने लाखों रुपये की कमाई करने वाले अभियंता खुद को अनजान दिखाने की कोशिश करते हैं। यदि क्षेत्र का कोई व्यक्ति शिकायत करता है, तो उसको गंभीरता से नहीं लेते हैं। जबकि डालीगंज, त्रिवेणीनगर तथा निरालानगर इलाकों में रिहायशी कालोनी के बीच संकरी गलियों में पांच-छह मंजिला फ्लैट्स और काम्प्लेक्स बन रहे हैं। डालीगंज के पास शंकरपुरवा और चरही मोहल्ले में तीन से चार फुट संकरी गलियां हैं, जिनमें टू व्हीलर गाड़ी लेकर गुजरना मुश्किल है। लेकिन ऐसी गली में अंदर अपार्टमेंट बन रहा है। इतना ही नहीं क्षेत्र की दस फिट चौड़ी गलियों में भी अपार्टमेंट और कामर्शियल काम्प्लेक्स की भरमार है।

मानक रखे ताक पर

यहां अपार्टमेण्ट्स बनाने में मानकों की अनदेखी की गयी है। यहां पांच फिट की गली में बने पांच मंजिला अपार्टमेण्ट्स में न तो फायर सिस्टम की व्यवस्था की गयी है और न ही एलडीए से अप्रूवल लिया गया है। बस अपार्टमेण्ट बनाकर मन चाहे दामों पर फ्लैटों को बेचा जा रहा है। वहीं इन फ्लैटों को खरीदने वाले भी भवन निर्माण की जांच कराने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। वो किसी प्रकार की पड़ताल किये बिना ही फ्लैट खरीदारी लेते हैं। इसके बाद हकीकत का सामना होता है, तो कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं।

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