प्रबंध नगर योजना पर 10 साल बाद भी मंडरा रहा संकट

अभी भी किसानों से बातचीत में फंसे हैं कई पेंच 

किसानों ने आईआईएम रोड पर एलडीए के जॉगर्स पार्कपर जड़ा ताला

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी 10 साल से प्रबंध नगर योजना को धरातल पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन किसानों की जमीनों के बदले चार गुना मुआवजा मांगने की वजह से योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। हालांकि एलडीए के अधिकारी पिछले कुछ महीनों से किसानों के साथ बातचीत कर योजना शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि किसानों को चार गुना मुआवजा देने के बाद भी एलडीए को करीब 2325 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इसलिए एलडीए वीसी डॉ. अनूप यादव ने करीब 2500 एकड़ में बसाई जाने वाली इस योजना को फिर से शुरू करने पर फैसला लेने के लिए बैठकें शुरू कर दी हैं।
एलडीए के पूर्व के कार्यकाल में बनवाई गई एक फिजिबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक अगर एलडीए प्रबंधनगर योजना को आगे बढ़ाएं, तो उसे काफी फायदा होगा। योजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि नया अधिग्रहण कानून आने के बाद किसान लैंड पुलिंग या पुराने अवार्ड पर जमीन देने को तैयार नहीं हैं। नये कानून के अनुसार अब सहमति से ही जमीन ली जा सकती है। ऐसे में चार गुना मुआवजा देना होगा। इससे एलडीए पर मुआवजे का बोझ 300 करोड़ रुपये बढक़र 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि फिजिबिलिटी रिपोर्ट की कास्टिंग के मुताबिक अवस्थापना सुविधा और मुआवजा में कुल 11,301 करोड़ रुपये एलडीए को खर्च करने हैं। इसमें 5825 करोड़ रुपया मुआवजा है। वहीं, आवासीय और कॉमर्शियल व फार्म हाउस की बिक्री के बाद एलडीए को 13,626 करोड़ रुपये मिलेगा। ऐसे में सीधे तौर पर एलडीए को 2325 करोड़ रुपये का फायदा होना है।

योजना से काफी उम्मीदें

एलडीए को सीतापुर-हरदोई बाई पास रोड पर आईआईएम रोड के पास प्रबंधनगर आवासीय योजना विकसित करनी है। 2500 एकड़ में फैली इस योजना में 1500 एकड़ में आवासीय व कॉमर्शियल उपयोग होना है। बाकी 1000 एकड़ में थीम वल्र्ड पार्क और फॉर्म हाउस बनने हैं। प्रबंधनगर, घैला और अल्लूनगर डिगरिया और ककौली गांव की जमीन पर बसाया जाना है। वहीं, गोमतीनगर विस्तार और सीजी सिटी के बाद अब लैंड बैंक विकसित करने के लिए एलडीए को प्रबंधनगर का ही सहारा है। एलडीए की इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार प्रबंधनगर योजना भी गोमतीनगर विस्तार की तरह हाथों हाथ बिक सकती है। ऐसे में एलडीए का कई साल का खर्च निकल जाएगा। सूत्रों की मानें तो चार गुना मुआवजा देने पर किसानों को 1,452 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेअर की जगह कुल 5,808 करोड़ रुपये देना होगा। ऐसे में एलडीए को मुआवजा पर 5825 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। वहीं भूखण्डों की कीमत 28000 रुपये प्रति वर्ग मीटर यानी करीब 2800 रुपये प्रति वर्गफुट होगी। 2325 करोड़ रुपये फायदे का आकलन जमीन का 55 प्रतिशत भूभाग बिक्री के लिए उपलब्ध होने के आधार पर किया गया है।

मुआवजे के लिए प्रदर्शन कर रहे किसान

जमीन के चार गुना मुआवजे को लेकर किसान यूनियन के बैनर तले दर्जनों की संख्या में किसान अड़े हुए हैं। किसान यूनियन की मांग है कि उन्हें जमीन का चार गुना मुआवजा मिलना ही चाहिए, क्योंकि वह अपनी जमीन का पूरा हक चाहते हैं। इसके चलते किसान यूनियन के साथ दर्जनों किसानों ने आईआईएम रोड स्थित जॉगर्स पार्क पर ताला डाल रखा है और अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में लगता है कि एलडीए अधिकारियों और किसानों की साठ-गांठ में कई पेंच फसने हैं। हालांकि इस पर भी एलडीए अधिकारियों का कहना है कि वह प्रबंधनगर योजना की सारी दिक्कतों को दूर कर देंगे और जल्द ही बैठकें कर योजना को अमली जामा पहनाने की कवायद तेज होगी।

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