पॉल्यूशन को फुस्स करने मार्केट में आया ईको फ्रेंडली पटाखा

  • बच्चों में सबसे अधिक पॉपुलर हो रहा ईको फ्रेंडली पटाखा
  • पिछली दीपावली में लखनऊ की आबोहवा नहीं थी दुरुस्त

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। दीपावली का त्यौहार मनाने के चक्कर में लोग जाने-अनजाने में पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। सजावट के समान, दीपावली में जलाए जाने वाले पटाखे और केमिकल वाली मूर्तियों की वजह से काफी नुकसान होता है। इसलिए बाजार में ईको फ्रेंडली पटाखों का ट्रेंड बढ़ रहा है लेकिन बहुत से लोगों को अभी भी धूम-धड़ाके और धुआं वाली दीपावली काफी पसंद है। इसलिए वह तेज आवाज वाले पटाखे खरीदने और उन्हें जलाकर इन्ज्वाय करने का प्लान कर रहे हैं।
शहर में ईको-फ्रेंडली पटाखों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन पटाखों का इस्तेमाल करने से प्रदूषण में काफी कमी आयेगी। दीपावली के इस सीजन में ईको फ्रेंडली पटाखों के अलावा और भी बहुत से पटाखे बिक रहे हैं। इसमें फुलझड़ी और तेज आवाज वाले पटाखों के अलावा तमाम तरह के पटाखे मौजूद हैं। मगर लोगों की पहली पसंद ईको फ्रेंडली पटाखे ही हैं।

प्रदूषण के मामले में लखनऊ भी आगे

पूरे साल में पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान दीपावली के दिन फोड़े जाने वाले पटाखों से निकलने वाली गैस, धुआं, आवाज और धूल के कारण होता है। लखनऊ में प्रदूषण को मापने के लिए सेंटर फॉर इन्वायरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट की अंकिता ज्योति ने बताया कि एक रिपोर्ट में कहा है कि दीपावली पर पटाखों से होने वाला प्रदूषण लखनऊ में खतरनाक स्तर पर है। पिछले दो महीने में किए गए अध्ययन के दौरान पाया गया कि लखनऊ में एयर इंडक्स ऐसे पाये गये हैं, जो नेशनल एयर क्वालिटी इंडक्स से भी अधिक था। ये मानव स्वास्थ के लिए बहुत अधिक घातक है।
दीपावली के समय शहर में ध्वनि का स्तर 50 डेसिबल होता है और 75 डेसिबल के ऊपर कई व्यक्तियों के लिए ध्वनि को सहना मुश्किल हो जाता है। पिछली दीपावली के दौरान इंदिरा नगर में सबसे कम हुई। यहां ध्वनि प्रदूषण का स्तर 57 डेसीबल रहा। इसके अलावा पीजीआई में इसका स्तर 60 डेसिबल, गोमतीनगर में 65 डेसिबल, तालकटोरा में 63 डेसिबल था। हजरतगंज में दीपावली के दिन सबसे ज्यादा पटाखे छोड़े गए थे। धूम-धड़ाके से घनी आबादी वाले इस इलाके में प्रदूषण का स्तर 70 डेसिबल तक पहुंच गया था। एनजीओ की रिपोर्ट की मानें तो हजरतगंज ने दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों को भी पीछे छोड़ दिया था।

साउंड और धमाकों से ऊब चुके हैं लोग

युवाओं को रॉकेट्स और चटाई वाले पटाखे काफी पसंद आते हैं। इसलिए लोगों की पसंद पर्यावरण को ध्यान में रखकर बाजार में ईको- फ्रेंडली रॉकेट और चटाई बेची जा रही है। ऐशबाग स्थित पटाखा बाजार के व्यापारी शंकर बताते हैं कि पटाखे के रेट्स भले ही पिछले बार के मुकाबले बढ़े हों लेकिन अवेयरनस के चलते इनकी डिमांड बढ़ी है। ये पटाखे बाकी के पटाखों से कम आवाज वाले होते हैं। इस बार बाजार में 12 शॉट्स से लेकर 500 शॉट्स वाले स्काई शॉट मौजूद हैं। 6500 रूपये से लेकर 15000 की कीमत में साधारण और ईको- फ्रेंडली पटाखों की भरमार है। पटाखा बेचने वाले सचिन बताते हैं कि ईको- फ्रेंडली पटाखों की डिमांड इस साल पूरे इंडिया में है, जिसके चलते इस प्रकार के पटाखे बनाए गए हैं, जो कम धुआं फैलाते हैं। अब लोग ज्यादा धमाके और साउंड वाले बम नहीं खरीदते। इसकी जगह हवा में ऊपर जाकर अलग-अलग रंग बिखेरने वाले रॉकेट और अनार को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं जानकीपुरम निवासी अमित बताते हैं कि बचपन में मैंने हाई साउंड वाले बम बहुत खरीदे हैं लेकिन अब स्काई शॉट्स के साथ दिवाली मानाने में ज्यादा मजा आता है।

पटाखों की ढेरों वैरायटी

इको फ्रेंडली पटाखा की दुकान लगाने वाले अतुल कुमार ने बताया कि उनके पास ढेर सारे ईको फ्रेंडली पटाखे उपलब्ध हैं। उनमें मैजिक पाइप, सुपर सिक्स, कनपटी सेलिब्रेटी, मैजिक अनार, मैजिक कृष्णजाल, फ्लॉवर पोस्ट, ग्राउंड चक्र, सुप्रीम कलर के अलावा कुछ और वैरायटी के पटाखे भी शामिल हैं। ईको फ्रेंडली पटाखों को जलाने पर वतावरण दू्षित नहीं होता है। इन पटाखों से धुंआ नहीं निकलता बल्कि रंग बिरंगी कागजों की पतंगियां और थरमोकोल की रंग बिरंगी गोलियां फव्वारे के रूप में निकलती हैं। इसलिए दीपावली पर पटाखों पर होने वाले पॉल्युशन से लोगों को राहत मिलेगी। ऐशबाग में पटाखों की दुकान लगाने वाले सोनू कहते हैं कि हमारे घर में भी बच्चे हैं और प्रदूषण के साइड इफेक्ट्स के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। मैं कई सालों से पटाखे बेच रहा हूं, लेकिन पहली बार लोगों की हेल्थ को ध्यान में रखकर ईको- फ्रेंडली पटाखे लाया हूं। ये पटाखे दूसरे पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं। इसके अलावा दीपावली पर ईको- फ्रेंडली पटाखों के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ाने के लिए पटाखों पर डिस्काउंट भी दिया जा रहा है।

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