पीजीआई की सुरक्षा दांव पर, तीसरी आंख बंद

सीसीटीवी कैमरे बने शोपीस, कंट्रोल रूम भी नहीं हो रहा है संचालित 

प्राइवेट संस्था ने भुगतान को लेकर बंद कर दिया काम

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान की सुरक्षा दांव पर है। यहां न तो सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं न सुरक्षा पर नजर रखने के लिए बनाया गया कंट्रोल रूम ही संचालित हो रहा है। दरअसल, सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली एक कंपनी ने भुगतान को लेकर काम बंद कर दिया है।
पीजीआई में मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, जांच और अन्य काम ठेके पर कराए जा रहे हैं। इन ठेकों को देने में गुणवत्ता की जगह संबंधों को मानक माना जाता है। लिहाजा यहां कई सालों से एक ही संस्था को बिना टेंडर निकाले ठेके दिए जा रहे हैं। यह खेल पीजीआई प्रशासन द्वारा लंबे समय से जारी है। टेंडर न होने का सीधा असर आउटसोर्सिंग के माध्यम से पीजीआई में काम कर रहे कर्मचारियों पर पड़ रहा है। कर्मचारियों के मुताबिक इसके जरिए उनका शोषण किया जा रहा है। आज भी ज्यादातर कर्मचारी पांच हजार की नौकरी करने पर मजबूर हैं। इसके अलावा पीजीआई में सुरक्षा की दृष्टिï से लगाये गये कैमरे शोपीस बन गए हैं। सुरक्षा पर नजर रखने के लिए लाखों रुपयों से एनीमल बिल्डिंग में बना कंट्रोल रूम बंद पड़ा है। संस्थान के निदेशक ने पीजीआई में सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपए की लागत से कई विभागों में कैमरे लगवाए थे। कैमरों का संचालन अभी पूर्ण रूप से शुरू भी नहीं हुआ था कि जिस संस्था को ठेका दिया गया था, उस संस्था ने हाथ खड़े कर दिए और कंट्रोल रूम बंद कर दिया। लिहाजा संस्था में कार्यरत कर्मचारी बदहाल हो गए और पीजीआई में मरीजों की सुरक्षा फेल हो गई। मामला साल भर पहले का है, जब कमीशन के नाम पर बन्दरबांट चरम सीमा पर थी।
गौरतलब है कि पीजीआई में टाइप-वन, टाइप-टू, टू-बी, न्यू कैम्पस, कम्यूनिटी सेंंटर, बैंक, पोस्ट आफिस, एमआरए दुकानों के पास एचसीएल कम्पनी द्वारा कैमरे लगाए गए जबकि डे केयर वार्ड, एडम ब्लॉक, किचन के पास कैमरे नहीं लगाए गए। फेस -वन का काम पूरा होने के बाद संस्था ने भुगतान की मांग की। प्रशासन ने भुगतान नहीं किया तो संस्था के संचालक ने कैमरों को लगाना बंद कर दिया। लिहाजा कंट्रोल रूम भी बंद हो गया। यही से कैमरों के मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई थी। ठेकेदार का पेमेन्ट रूका तो कर्मचारियों की समस्या भी बढ़ गई। संस्थान की ओर से 20 से 25 लोगों को कंट्रोल रूम में तैनात कि या गया था। पीजीआई प्रशासन और संस्था के बीच खींचतान का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। संस्थान के कई कर्मचारी आज पीएफ और एसआई के भुगतान के लिए परेशान हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजधानी दौरान कैमरों को ठीक कराने की मांग कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश मिश्रा ने पीजीआई निदेशक डॉ राकेश कपूर के सामने उठाई थी। पीजीआई उप्र का सबसे बड़ा अस्पताल है और इसके कई विभागों के चिकित्सक विश्व व देश स्तर के हैं। इसके अलावा मरीजों की भारी तादात यहां रोजाना इलाज के लिए पहुंचती है। सतीश मिश्रा का कहना है कि इसके बाद भी कैमरों के सुचारू रूप से संचालन के लिए अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई कारगर कदम नहींं उठाये गये। जिससे मरीजों तथा पीजीआई स्टाफ की सुरक्षा खतरे में हैं।

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