परिवर्तन यात्रा के साथ भाजपा का चुनावी शंखनाद

  • पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। भाजपा ने सहारनपुर से परिवर्तन यात्रा की शुरुआत कर उत्तर प्रदेश में चुनावी शंखनाद कर दिया है। यात्रा को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूरा सहारनपुर केसरिया रंग से सराबोर कर दिया गया है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूरे शहर को होर्डिंग्स, बैनर और झंडों से पाट दिया है। अगले छह महीने में पाटी ऐसी चार यात्राओं का आयोजन करने जा रही है। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी ओम प्रकाश माथुर, केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र, संजीव बालियान, राष्ट्रीय मंत्री व परिवर्तन यात्रा के संयोजक महेन्द्र सिंह, सांसद हुकुम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य आदि मौजूद रहे।
परिवर्तन रथ में कार्यकर्ताओं की काफी भीड़ उमड़ी रही। हाइड्रोलिक सिस्टम से युक्त इस परिवर्तन यात्रा रथ में न गुण्डाराज न भ्रष्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार, योजनाओं का नहीं मिलता लाभ-किसान दुखी और बर्बाद जैसे स्लोगन लिखे हुए हैं। बीजेपी की परिवर्तन रथ यात्रा के चेहरे राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, उमा भारती और केशव प्रसाद मौर्य हैं। परिवर्तन रथ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा सिर्फ चार नेताओं की तस्वीर ही नजर आई। माना जा रहा है कि इन चार नेताओं, जो की अलग-अलग वर्ग से आते हैं, इनको आगे करके भाजपा प्रदेश के वोटरों में संदेश देने की कोशिश करेगी। ऐसे में जब ये संकेत मिल रहे है कि भाजपा प्रदेश में बिना सीएम कैंडिडेट घोषित किए, पीएम मोदी के चेहरे को आगे करके ही चुनाव में उतरेगी, लेकिन परिवर्तन रथ पर लगी तस्वीरों से ये संदेश जरूर जा रहा है कि बीजेपी यूपी में चार चेहरों को आगे करके चुनावी मैदान में जाएगी।

दूसरी परिवर्तन यात्रा 6 नवम्बर से झांसी से शुरू होगी। यह परिवर्तन 6 से लेकर 8 नवम्बर तक बुन्देलखण्ड क्षेत्र में घूमेगी। सोनभद्र और बलिया से भी निकलेगी। तीसरी परिवर्तन यात्रा 8 नवम्बर को सोनभद्र तथा आखिरी व चौथी परिवर्तन 9 नवम्बर को बलिया से शुरू होगी। सभी परिवर्तन यात्राएं प्रदेश भर में भ्रमण करेंगी। परिवर्तन यात्राओं से बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही 10 हजार से अधिक कार्यकर्ता परिवर्तन सारथी के रूप में गांवों में चौपाल लगाने का काम करेंगे।

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