नोट बंदी, इंतजार और सेल्फी

निश्चित तौर पर नोट बंद होने की वजह से आम जनता को होने वाली परेशानी काफी हद तक दूर होती दिख रही है। लेकिन व्यापार क्षेत्र में लंबी रकम का टर्नओवर करने वाले अभी भी परेशान हैं। इनको बैंक में 50,000 रुपये से अधिक पुराने नोट बदलने के लिए निर्धारित फार्म भरने पड़ेंगे, तब नोट जमा होगा।

sanjay sharma editor5सरकार ने देश में 500 रुपये का पुराना और 1000 रुपये का नोट बंद कर दिया। इस आदेश के बाद जनता बड़ी बेसब्री के साथ बैंक खुलने और नये नोट मिलने का इंतजार कर रही थी। बैंक खुलने के पहले से ही लोग अपने पास रखा नोट बदलने, जमा करने और नया नोट निकालने के लिए लाइन में लगे थे। बैंक से मिलने वाले नये नोट को देखने की उत्सुकता भी नजर आ रही थी। ऐसे में जब दो हजार रुपये का नोट मिला तो लोगों के चेहरे खिल उठे। अब भला ऐसे मौके पर नोट के साथ सेल्फी लेने और उसको दोस्तों के बीच शेयर करने से कोई खुद को रोक सकता है। शायद हर व्यक्ति सेल्फी लेना चाहेगा। इसलिए नये नोट के साथ सेल्फी लेने और सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने के साथ ही लोगों के चेहरे से पिछले दो दिनों की परेशानी काफूर हो गई।
वित्तमंत्री ने नोट बंद होने के बाद जनता की परेशानियों को ध्यान में रखकर पुराने नोट को जमा करने के विकल्पों को बढ़ा दिया है। अब जिन लोगों के पास 500 और 1000 रुपये के नोट बचे हैं। वह रेलवे, परिवहन, अस्पताल और पेट्रोलपंप के अलावा बच्चों की फीस, बिजली का बिल, हाउस और वाटर टैक्स के रूप में भी जमा कर सकते हैं। इसके अलावा केन्द्र सरकार को टैक्स चुकाने में भी पुराने नोटों का इस्तेमाल कर सकते हैं। जो व्यक्ति पुराने नोट बैंक में बदलना चाहता है, उसको अपने साथ पहचान पत्र लेकर जाना होगा। ग्राहक बैंकों से एक दिन में 10 हजार रुपये और सप्ताह भर में 20 हजार रुपये निकाल सकता है। एटीएम भी खुल गये हैं, जिनके माध्यम से व्यक्ति एक दिन में 2000 रुपये निकाल सकता है। इसलिए निश्चित तौर पर नोट बंद होने की वजह से आम जनता को होने वाली परेशानी काफी हद तक दूर होती दिख रही है। लेकिन व्यापार क्षेत्र में लंबी रकम का टर्नओवर करने वाले अभी भी परेशान हैं। इनको बैंक में 50,000 रुपये से अधिक पुराने नोट बदलने के लिए निर्धारित फार्म भरने पड़ेंगे, तब नोट जमा होगा। जिन लोगों के पास कालाधन है, उन्हें कर देने के साथ ही जुर्माने की रकम भी अदा करना होगा। ऐसे में पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के बयान में जिस गरीब की समस्या का हवाला दिया जा रहा था, वह काफी हद तक समस्या से निजात पा चुका है।
फिलहाल देश की जनता एक बार फिर पुरानी बातों को भूलकर नये नोट और नये कामों में जुट गई है। उसके पास नोट बंद करने के पीछे की राजनीति पर बहस करने का समय नहीं है। ये अलग बात है कि पब्लिक सब जानती है। उसका निर्णय मतदान में नजर आयेगा।

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