नोटबंदी से कम हुआ अपराधों का ग्राफ

चोरी, लूट और चेन स्नैचिंग की घटनाओं में दर्ज हुई गिरावट

आमिर अब्बास
captureलखनऊ। उत्तर प्रदेश में बढ़ती क्राइम की घटनाओं पर पुलिस भले ही लगाम न लगा पा रही हो लेकिन देश में पांच सौ के पुराने और हजार रुपये के नोट बंद होने से क्राइम के ग्राफ में जरूर गिरावट आ गई है। चोरी, लूट और स्नैचिंग की वारदातें में काफी कमी आई हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 14 दिनों में चोरी और लूट की बमुश्किल 10 घटनाएं हुई हैं, जबकि अन्य दिनों में चोरी और लूट के आंकड़े दस गुना थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवंबर की रात आठ बजे पांच सौ रुपये के पुराने और एक हजार रुपये के नोट बंद करने का आदेश जारी किया। इस घटना के चौबीस घंटे बाद राजधानी में चोरी और लूट की एक भी वारदात नहीं हुई। नोटबंदी के एक आदेश ने कालाधन रखने वालों के साथ-साथ चोरों और डकैतों की भी नींद उड़ा दी। नोटबंदी की वजह से आम जनता को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लेकिन नोटबंदी का सबसे बड़ा असर क्राइम की घटनाओं पर पड़ा है। 14 दिनों में चोरी और लूट की मात्र 10 घटनाएं हुईं। इससे चोरी और लूट की घटनाओं से परेशान पुलिस को भी काफी राहत मिली है। राजधानी समेत प्रदेश के अन्य जिलों में भी चोरी, लूट और डकैती की घटनाओं में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। नतीजतन प्रदेश में क्राइम की घटनाओं को कंट्रोल नहीं कर पाने की आलोचना झेल रही यूपी पुलिस को काफी राहत मिली है। अब पुलिसकर्मियों को बड़ी संख्या में बैंकों के बाहर जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगा दिया गया है।
वहीं पुलिस और आम जनता के बीच इस बात की भी चर्चा हो रही है कि शायद अपराधियों को भी अंदाज हो गया कि अब नोटबंदी के चलते चोरी, लूट और डकैती वारदात को अंजाम देना और उस रकम को सफेद करने का काम आसान नहीं है। लूट की रकम को सफेद करवाने के लिए हर हाल में बैंक जाना ही पड़ेगा। वहां पकड़े जाने का खतरा होगा। इसलिए जब तक सरकार कालेधन को लेकर सख्त रुख अख्तियार करती है, चोरी, लूट और डकैती को अंजाम देना बड़ी चुनौती बन गई है। राजधानी में क्राइम की घटनाओं में कमी आने की प्रमुख वजह शायद यही है, जिसके चलते पूरी राजधानी में आपराधिक घटनाओं का ग्राफ काफी गिरता नजर आ रहा है।
बता दें कि राजधानी में महज 8 नवंबर से अब तक पिछले माह की भांति आपराधिक घटनाओं में न सिर्फ कमी दिखाई दी। बल्कि नोटबंदी के बाद से अपराधियों ने चुनिंदा वारदातों को ही अंजाम दिया।

पुलिस और जनता के बीच बढ़ी नोकझोंक

नोटबंदी की घोषणा के बाद देश भर के बैंकों और एटीएम में आम जनता की भीड़ उमड़ रही है। प्रदेश की राजधानी में भी बैंकों और एटीएम के बाहर का नजारा बिल्कुल वैसा ही है। आम जनता की सुरक्षा और लॉ एंड आर्डर मेंटेन करने के लिए काफी संख्या में पुलिस बल भी बैंक और एटीएम के बाहर तैनात किए गए हैं। नोट जमा करने और निकालने के लिए लंबी कतार में लगे लोगों के गुस्से का शिकार अक्सर पुलिस को बनना पड़ता है। वहीं बहुत सी जगहों पर बेकाबू भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस बल प्रयोग भी करने लगी है। ऐसा ही एक मामला 15 नवंबर को अमीनाबाद स्थित बैंक आफ बड़ौदा के सामने देखा गया, जिसमें किन्नरों ने जमकर उत्पात मचाया। लाइन तोडक़र बैंक में अंदर घुसने का प्रयास कर रहे किन्नरों को पुलिसकर्मियों ने रोकने का प्रयास किया, तो वे बदतमीजी पर आमादा हो गये। किन्नरों ने अपशब्द कहना शुरू कर दिया। पुलिस ने काफी देर तक संयम से काम लिया लेकिन जब मामला शांत नहीं हुआ, तो डांट फटकार कर किन्नरों को शांत करवाया। इस तरह की अनेकों घटनाएं लगातार राजधानी में घट रही हैं लेकिन चोरी, लूट, डकैती और स्नैचिंग की घटनाओं का ग्राफ लगातार गिर रहा है।

आंकड़ों में पिछले 14 दिनों में होने वाली घटनाएं

10 नवंबर चौक थाना क्षेत्र में मेडिकल छात्र की गाड़ी हुई चोरी।
14 नवंबर इटौंजा के बरगति खेड़ा में आशाराम के घर चोरी की वारदात को अंजाम दिया।
15 नवंबर गोमती नगर में अपराधियों ने एक ही रात में पजोरो और टाटा सफारी कार चुराई।
15 नवंबर तालकटोरा थाना क्षेत्र स्थित राजाजीपुरम निवासी महिला आशा देवी से चेन लूट।
16 नवंबर गुडम्बा थाना क्षेत्र स्थित एक व्यापारी के घर में चोरों ने नगदी व जेवर साफ कर दिये।
17 नवंबर जानकीपुरम थाना क्षेत्र में लुटेरों ने महिला से चेन लूटी।
21 नवंबर पीजीआई थाना क्षेत्र स्थित मधुवन विहार कॉलोनी निवासी भानू प्रताप सिंह के घर ताला तोडक़र जेवर व नगदी उड़ाये।
21 नवंबर पीजीआई थाना क्षेत्र स्थित चरन भट्टïा रोड निवासी वैभव सचान के घर से जेवर व नगदी चोरी कर फरार हो गये।
21 नवंबर पीजीआई थाना क्षेत्र में बदमाशों ने महिला से रुपयों के भरा बैग लूटा।
22 नवंबर गोसाईगंज थाना क्षेत्र स्थित खुर्दरी बाजार में दिलीप कुमार अवस्थी की मोबाइल शॉप से नगदी व मोबाइल चोरी।

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