नोटबंदी, सुप्रीम कोर्ट और स्याही

सवाल यह है कि क्या कालेधन पर केंद्र के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद सियासत थमेगी? क्या जनता की परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ और कदम सरकार उठाएगी? क्या स्याही लगाने के निर्णय से कालेधन पर एक और चोट पहुंचेगी या इसका खामियाजा भी जनता को ही भुगतना पड़ेगा?

sajnaysharmaकालेधन पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ताओं को न्यायालय ने दो टूक जवाब दिया है। न्यायालय ने साफ कर दिया है कि इस मामले में वह न तो केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने के मूड में है न ही किसी प्रकार की दखल देना चाहता है। कोर्ट, सरकार की इस दलील पर भी सहमत है कि कालेधन पर लगाम लगाने के दौरान कुछ परेशानियां आएंगी। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने सरकार से लोगों को राहत पहुंचाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी जरूर मांगी है। वहीं, सरकार ने एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार बैंक से नोट बदलने वालों पर शिकंजा कसने के लिए नया फरमान जारी किया है। इसके मुताबिक अब नोट बदलने के लिए बैंक पहुंचे लोगों की उंगली पर स्याही का निशान लगाया जाएगा और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह है कि क्या कालेधन पर केंद्र के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद सियासत थमेगी? क्या जनता की परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ और कदम सरकार उठाएगी? क्या स्याही लगाने के निर्णय से कालेधन पर एक और चोट पहुंचेगी या इसका खामियाजा भी जनता को ही भुगतना पड़ेगा? दरअसल, मोदी सरकार ने कालाधन पर नियंत्रण लगाने के लिए जब 8 नवंबर को अचानक पांच सौ और हजार के नोट पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया तो देशभर में हडक़ंप मच गया। लोगों को बैंकों के जरिए पहले चार हजार और बाद में साढ़े चार हजार की धनराशि तक के लिए नोट बदलने की सुविधा दी गई। लोगों की भीड़ बैंकों पर उमड़ पड़ी। नकदी की कमी के चलते लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सियासी दलों ने मोदी सरकार के इस फैसले की आलोचना की हालांकि उन्होंने कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार का साथ देने का भी वादा किया है। अब जब कोर्ट ने सरकार फैसले से अपनी सहमति जता दी है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे सरकार की मंशा पर उठने वाले सवाल कुछ कम जरूर होंगे। लेकिन कोर्ट ने जनता की परेशानियों को लेकर फिलहाल क्लीन चिट नहीं दी है। इस मामले पर कोर्ट ने सरकार से जनता की परेशानियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी तलब की है। दूसरी ओर नोटों को बदलने बैंक पहुंचने वालों की पहचान के लिए उंगली पर स्याही का फरमान जारी कर सरकार ने कालेधन को खपाने की कोशिश को नाकाम करने का भी प्रयास किया है। कुल मिलाकर न्यायपालिका का रुख भी सरकार के इस निर्णय के साथ खड़ा दिख रहा है। यदि सरकार ने जनता की परेशानियों को दूर कर दिया तो यह निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि होगी।

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