नोटबंदी ने बनाया महिलाओं को परफेक्ट मैनेजमेंट गुरू

  • फुटकर पैसे न होने के चलते घर में फिजूल खर्ची बिल्कुल बंद
  • राशन जुटाने में हो रही थोड़ी बहुत दिक्कत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कालाधन और आतांकवाद पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भले ही कड़ा फैसला लिया हो लेकिन ये फैसला महिलाओं के अंदर छिपे मैनेजमेंट के खास हुनर को निखारने वाला साबित हुआ है। देश में पांच सौ के पुराने और हजार रुपये के नोट बंद होने से महिलाओं ने घर में होने वाली फिजूल खर्ची पर पूरी तरह रोक लगा दी है। वह कम पैसे में घर चलाने के तरीके खोज रही हैं। इन तरीकों की वजह से नवंबर से पहले तक लगने वाले घरेलू खर्च में करीब-करीब 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आई है, जो महिलाओं के परफेक्ट मैनेजमेंट गुरू होने की बात को बल देती है।
नोटबंदी का घर के सामान्य खर्चों के बजाय किचन पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। महिलाएं बैंकों से नोट बदलने पर रोक लगने और एटीएम से मात्र 2500 रुपये प्रतिदिन और 5000 रुपये प्रति सप्ताह निकलने की वजह से कम पैसों में खर्च करना सीख गई हैं। अब महीने भर के राशन की जगह एक या दो दिन का राशन घर आ रहा है। नोटबंदी के 20 दिन बाद भी लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं लेकिन लोग इन्हीं परेशानियों के बीच लाइफ को एन्ज्वाय करने लगे हैं। अब महिलाएं पड़ोस में इकट्ठा होकर गप-शप लड़ाने और सीरियल्स पर चर्चा करने के बजाय एटीएम की लाइन में लगकर कैश निकालने और घर के लिए राशन की खरीदारी करने में व्यस्त रहती हैं।
मिडिल क्लास परिवार में आए दिन तीन से चार सौ रुपए के छोटे-छोटे खर्चे होते हैं। इसमें सब्जी, दूध, दवा, किचन के दूसरे सामान, कपड़े की धुलाई और आयरन का खर्च, बच्चों के लिए कुछ सामान खरीदने समेत अनेकों खर्चे होते हैं। सरकार की तरफ से पांच सौ के पुराने और हजार रुपए के नोट बंद किए जाने के बाद अधिकतर घरों में परेशानी हो रही है। इन नोटों पर लगाई गई पाबंदी के बाद राजधानी में अधिकतर सभी गृहणियों की परीक्षा की घड़ी चल रही है। ऐसे में गृहणियों ने मैनेजमेंट की पढ़ाई भले ही न की हो मगर फिर भी घर चलाने में मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वालों को भी पीछे छोड़ दिया हंै। महिलाएं हर चीज को ध्यान में रखकर बजट के हिसाब से सारा काम कर रही हैं। उनका मकसद नोट बंदी से घरेलू खर्चों को बेअसर रखना है। इसलिए महिलाओं ने घर चलाने के तरीके को बदल दिया है।

बचत के लिए सबने खोजा अलग तरीका

जब से नोटबंद हुए हैं, तबसे मेरे पास खुले पैसों की दिक्कत हो रही है। मैं पूरे एक हफ्ते की सब्जी एक ही बार खरीदने के लिए मजबूर हूं। पहले जरूरत के अनुसार सब्जी ले लिया करती थी। लेकिन अब कम से कम 500 रुपये की सब्जी लेनी पड़ रही है। ऐसा न करने पर दो हजार के नोट का छुट्टा ही नहीं होता है।
-मीनाक्षी शर्मा, गृहणी

मैं आज ही एटीएम से नोट निकालने गई थी लेकिन मेरा नंबर आते-आते बैंक में कैश खत्म हो गया। घरेलू सिलेंडर भरवाने के पैसे नहीं हैं। मजबूरन सिलेंडर के बजाय इलेक्ट्रिक स्टोव पर खाना पकाना पड़ा था। इस तरह बिना पैसों के समस्या तो हो रही है लेकिन हम किसी न किसी तरह मैनेज कर ले रहे हैं, क्योंकि यह समस्या कुछ दिनों बाद समाप्त हो जायेगी। – स्नेहा तिवारी, टीचर

परिवार बड़ा होने के चलते मेरे घर की सारी सब्जी जल्दी खत्म हो जाती है। मैंने नोट बदलवाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वे अभी नहीं बदल पाये हैं। इसलिए मजबूरी में शॉपिंग मॉल से सब्जी और फ्रूट खरीदना पड़ रहा है। इसलिए आए दिन रसोईं चलाने की चिन्ता सताने लगी है।
-रूबीना, गृहणी

घर की रसोई में रखे राशन के डिब्बे आजकल खाली पड़े रहते हैं क्योकि एटीएम से नोट निकलने में समस्या हो रही है। बैंक से नोट निकालने में लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा करके जरूरत के हिसाब से सामान खरीदकर घर गृहस्थी चला रहे हैं, क्योंकि अब दुकानदार भी उधार नहीं दे रहे हैं।
-विनीता, सर्विस

नोटबंदी के बाद घर के जरूरी सामान ही खरीद रही हूं। रसोई में उतना ही राशन आ रहा है, जितने भर में काम चल जाये। पहले तो जब भी मार्केट से सामान खरीदकर लाते थे, थोड़ा एक्स्ट्रा सामान जरूर आता था। अब उस एक्स्ट्रा सामान पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। किचन के सामान में थोड़ा कटौती की है लेकिन तब भी घर का खर्च जैस-तैसे ही चल रहा है।
– मीना गुप्ता, गृहणी

मैं नोटबन्दी के बाद से अक्सर घर के जरूरी काम छोडक़र एटीएम की लाइन में लगकर कैश निकालने जाती हूं। इसके बाद घर में रसोईं और अन्य कामों को करती हूं। इसके बाद जो राशन घर में होता है उसी से काम चला रहे हैं। टूटे पैसे होते नहीं हैं। तो ऐसे में जरूरत की चीजें समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती हैं।
रश्मि अग्रवाल, गृहणी

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