नोटबंदी ने कंगाल बिजली विभाग और नगर निगम को किया मालामाल

  • अब तक 450 करोड़ का बकाया बिल जमा, अभी और जमा हो सकती है धनराशि
  • करोड़ों रुपए गृहकर व जलकर मद में आए नगर निगम पर रिकार्ड तोड़ धन वर्षा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नोटबंदी ने भले ही आम आदमी को मुश्किलों में डाल दिया हो लेकिन निगम और बिजली विभाग मालामाल हो गया है। एक सप्ताह के भीतर बिजली विभाग में बकाएदारों ने 450 करोड़ जमा किए हैं। दूसरी ओर नगर निगम में 11 करोड़ रुपये से अधिक का गृहकर जमा कराया जा चुका है। इन विभागों को उम्मीद है कि आगामी 24 नवंबर तक पुराने नोटों से टैक्स जमा करने की छूट से विभाग के खाते में कुछ करोड़ और आ जाएंगे।

मोदी सरकार ने आठ नवंबर को पांच सौ व हजार के पुराने नोट बंद कर दिए हैं। लेकिन जरूरी सेवाओं में पुराने नोट लिए जा रहे हैं। लिहाजा लोग पुराने नोटों से अपनी बकाएदारी विभिन्न सरकारी विभागों में जमा करा रहे हैं। बिजली विभाग ने बकाया जमा करने के लिए शिविर लगाए हैं। केंद्रों पर उपभोक्ताओं की भीड़ जुट रही है। पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र के मुताबिक नोटबंदी के बाद से पूरे प्रदेश में अब तक करीब 450 करोड़ रुपए की बकाएदारी जमा हुई है। इस धनराशि में और अधिक इजाफा हो सकता है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के पांच जोन लखनऊ परिक्षेत्र, लखनऊ लेसा, बरेली, फैजाबाद आदि में अब तक 250 करोड़ रुपए से अधिक बकाया बिल काउंटर पर जमा किए गए हैं, जबकि 110 करोड़ रुपए आनलाइन भुगतान किए गए हैं। राजधानी में विद्युत आपूर्ति करने का जिम्मा संभालने वाले लेसा ने करीब 115 करोड़ रुपए बकाया बिल वसूला है। डिफॉल्टर उपभोक्ता भी बिल जमा करने के लिए लाइन में लग रहे हैं। वहीं नगर निगम का खजाना भी नोटबंदी के फैसले के बाद भर गया है। जो लोग निर्धारित समय में कर जमा नहीं करते थे, वो भी पुराने नोटों से नगदी बिलों का भुगतान कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में नगर निगम में 11 करोड़ से अधिक गृहकर जमा हो चुका है। नगर आयुक्त उदय राज सिंह कहते हैं कि सामान्य दिनों में प्रति जोन का औसत ग्राफ दो से तीन लाख रुपये के बीच होता था। लेकिन बड़ी नोट का चलन बंद होने की खबर से अब तक पांच करोड़ रुपये से अधिक कर के रूप में नगर निगम के खाते में आ चुके हैं। ऑनलाइन भुगतान भी करोड़ों में हुआ है। आंकड़ों पर गौर करें तो जोन एक में सवा करोड़ रुपये जमा हुए हैं, जबकि अन्य सभी जोन में तीस लाख रुपये से अधिक का कर जमा हुआ है। जिन प्रचार एजेंसियों पर करोड़ों रुपये बकाया था, उन्होंने भी एक दिन में 85 लाख रुपये जमा कर दिए। इस तरह 24 नवंबर तक बिजली विभाग और निगम के राजस्व में और अधिक इजाफा होने का अनुमान लगाया जा सकता है, जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम के लिए अच्छी बात है।

जलकर के लिए भी खुली तिजोरी

नगर निगम और बिजली विभाग ही नहीं जलकर में भी बकाया भुगतान करने वालों की लाइन लग रही है। जो लोग जलकर का बकाया भुगतान करने में दिलचस्पी नहीं लेते थे, वो भी घंटों लाइन में लगकर कर जमा कर रहे हैं। आलम ये है कि एक दिन में औसतन दो करोड़ रुपये कर के रूप में जमा हो चुके हैं जबकि आम दिनों में यह आंकड़ा दो करोड़ तक शायद ही कभी पहुंचा हो। जलकल विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जनता हाउस टैक्स और बिजली का बिल जमा करने में भले ही तत्परता दिखाती हो लेकिन जलकर जमा करने में रुचि नहीं लेती है। विभाग की तरफ से तमाम नोटिस देने और कालोनियों में लाउडस्पीकर के माध्यम से सूचना प्रसारित करने के बाद भी लोग जलकर जमा नहीं करते हैं। लेकिन बड़े नोटों का चलन क्या बंद होने के बाद जलकल विभाग ने अभी तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। अब तक 11 नवंबर को दो करोड़ से अधिक जलकर जमा हुआ, जबकि अन्य सभी जोनो में सामान्य दिनों में दो से तीन लाख रुपये ही जलकर के रूप में ही जमा होता है।

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