नोटबंदी, कोर्ट और कटघरे में सरकार

सवाल यह है कि वित्त मंत्रालय में बैठे विशेषज्ञ और अफसर क्या इसके परिणामों का अंदाजा नहीं लगा सके? क्या सब कुछ ठीक-ठाक है कि तर्ज पर मंत्रालय के sajnaysharmaअफसरों ने योजना को हरी झंडी दिखा दी? क्या खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसके परिणामों पर बिना विचार किए अपनी सहमति दे दी?

नोटबंदी के फैसले पर विपक्ष के हमलों का सामना कर रही मोदी सरकार को अब अदालतों और चुनाव आयोग ने कटघरे में खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट और कोलकता हाईकोर्ट ने दो टूक कहा है कि यह फैसला बिना होमवर्क के लागू किया गया। सरकार रोज नियम बदल रही है, जिसके चलते जनता बेहाल है। ऐसे हालात में गलियों में दंगे भी हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने सरकार के नोट बदलने के लिए बैंक पहुंच रहे लोगों की पहचान के लिए उंगली में स्याही लगाने के निर्देश पर ऐतराज जताया है। आयोग ने वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि इस माह कई राज्यों में उप चुनाव होने हैं लिहाजा बैंक लोगों की उंगली पर स्याही न लगाएं। इससे चुनावों के दौरान वोटरों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट के वक्तव्य से यह साफ हो गया है कि सरकार ने नोटबंदी पर आनन-फानन में फैसला ले लिया लेकिन उसे बिना लोगों को परेशानी में डाले कैसे लागू किया जाए, इसके लिए जरूरी कदम उठाने पर कोई ध्यान नहीं दिया। वह यह समझने में विफल रही है कि फैसलों को लागू करने में क्या-क्या व्यवहारिक दिक्कतें आएंगी। सवाल यह है कि वित्त मंत्रालय में बैठे विशेषज्ञ और अफसर क्या इसके परिणामों का अंदाजा नहीं लगा सके? क्या सब कुछ ठीक-ठाक है कि तर्ज पर मंत्रालय के अफसरों ने योजना को हरी झंडी दिखा दी? क्या खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसके परिणामों पर बिना विचार किए अपनी सहमति दे दी? क्या यही वजह है जिसके चलते जैसे-जैसे लोगों की समस्याओं से सरकार अवगत हो रही है, निर्णयों को बदल रही है या नए फरमान जारी कर रही है? ताजा परिप्रेक्ष्य में देखे तो कोर्ट की इस बात से असहमत होने का सवाल नहीं उठता कि सरकार ने बिना किसी तैयारी के यह फैसला लागू किया है। यही वजह है कि लोग बैंकों में सारे कामधाम छोडक़र कतार में लगे हैं। कई लोगों की इस दौरान मौत तक हो गई है। लोग जरूरी सामान तक पैसों के अभाव नहीं खरीद पा रहे हैं। अधिकांश एटीएम धोखा दे रहे हैं। जरूरी नकदी तक बैंकों में उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में मरीज इलाज तक नहीं करा पा रहे हैं। नोटबंदी के दस दिन बीत जाने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि हाईकोर्ट के जज को वक्तव्य देते समय यह कहना पड़ा कि लोगों को परेशानी हो रही है। मेरे बेटे को डेंगू है लेकिन अस्पताल वाले नोट नहीं ले रहे हैं। जाहिर है यह केवल जज साहब का दर्द नहीं। इस देश के लाखों लोगों का दर्द है। इसका जवाब मोदी सरकार को देना ही होगा।

Pin It