निजी अस्पताल में नोट का चक्कर पड़ रहा भारी

  • नोट बंदी का साइड इफेक्ट
  • अस्पतालों में धन के अभाव में 40 फीसदी मरीज घटे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के निजी अस्पतालों में मरीजों के उपचार पर नोट का चक्कर भारी पड़ रहा है। उन्हें काफी मुश्किल से उपचार मिल पा रहा है। निजी अस्पताल में मरीजों से पांच सौ व एक हजार के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। तीमारदारों की तमाम मिन्नतों के बाद निजी अस्पतालों ने पोस्ट डेटेड चेक लेकर इलाज शुरू किया गया। वहीं ओपीडी में चालीस फीसदी कम मरीज आये। निजी अस्पतालों के प्रबंधक वित्त मंत्री के बयान का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि पांच सौ व एक हजार के नोट लेने का अधिकार सिर्फ सरकारी अस्पतालों को है। दवा की दुकानों पर फुटकर पैसों की किल्लत है। पांच सौ व एक हजार के नोट लिए गये लेकिन बाकी पैसे पर्ची पर लिखकर दिए जा रहे हैं। कई मेडिकल स्टोर पर ताला लगा रहा।
सरकारी अस्पतालों में बलरामपुर अस्पताल में बुधवार को सुबह जांच के पैसे जाम करने पर पांच सौ का नोट लेने से इनकार कर दिया गया। इससे नाराज मरीज व तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन के शिकायत की, इसके बाद नोट लेने का काम शुरू हुआ। लेकिन बाद में कैश काउंटर पर छुट्टे पैसे खत्म हो गए। अब तीमारदारों को खुले पैसे लाने की बात कही गयी है। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. राजीव लोचन ने बताया कि यदि छुट्टे पैसे नहीं हैं तो पर्ची पर बैलेंस पैसे लिखकर देने की व्यवस्था शुरू करने के निर्देश देंगे ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होने पाए। लखनऊ नर्सिंग होम एसोसिएशन के महामंत्री डा. अनूप अग्रवाल ने बताया कि पांच व एक हजार रुपये लिए जाने का अधिकार निजी अस्पतालों को नहीं है। ओपीडी में करीब चालीस फीसद मरीजों की कमी आयी है। जिन मरीजों को एडमिट किया जाना है, उनके लिए ई-बैंकिंग या चेक लेकर उपचार कर किया जाता है।

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