निजी अस्पतालों पर आखिर कब होगी कार्रवाई

  • हाईकोर्ट की फटकार के बाद सक्रिय अधिकारी फिर हुए सुस्त

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। डेंगू के कहर और हाईकोर्ट की फटकार के कारण लंबे समय बाद स्वास्थ्य महकमा कुछ देर के लिए कुम्भकरणीय नींद से जागा था। उसके बाद राजधानी के मझोले अस्पतालों पर दिखावे के लिए कार्रवाई भी की। लेकिन वक्त गुजरने के साथ ही स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी एक बार फिर सुसुप्तावस्था में चले गये हैं। इनकी कारगुजारियों के आगे उच्चाधिकारियों का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा है। वहीं चिकित्सकों की लापरवाही के कारण जान गंवाने वाले मरीजों के परिजन और स्वयं मरीज न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रमुख सचिव ने राजधानी में मानकों के खिलाफ चलने वाले अस्पतालों की जांच करने और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए एक टीम का गठन किया था। अक्टूबर में पांच तारीख को मोहनलालगंज के श्री संाई अस्पताल, रमा अस्पताल, वर्धन पथैलॉजी, सरोजनीनगर के बजरंग हास्पीटल,डॉलीगंज अस्पताल समेत कई अन्य अस्पतालों पर कार्रवाई कराई गई थी। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अवैध रुप से चलने वाले नौ चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसमें दो अस्पतालों को सील किया गया और सात चिकित्सा संस्थानों को कारण बताओ नोटिस दिया गया था। इसमें दो डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अस्पताल प्रशासन के खिलाफ एक मरीज की डेडबॉडी न देने की शिकायत प्रदेश सरकार के मंत्री से की गई थी। तब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को जांच करने और अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। लेकिन वक्त गुजरने के साथ ही नतीजा ढाक के तीन पात साबित हुआ। जिन अस्पतालों पर कार्रवाई की गयी थी उनमें से आज भी कई संचालित हो रहे हैं। गरीब जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

शेखर अस्पताल के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई

शेखर अस्पताल में 9 अक्टूबर को डॉक्टरों की लापरवाही के कारण आलमबाग निवासी मनप्रीत (13) की मौत हो गई थी। इस पर परिजनों ने काफी हंगामा किया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही के चलते बच्चे मौत हो गयी। इससे पहले भी शेखर अस्पताल पर प्लेटलेट्स को लेकर उगाही करने का आरोप लग चुका है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चुप हैं।

इरम अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगाने का मामला
 

गुडम्बा स्थित इरम अस्पताल में नर्स द्वारा गलत इंजेक्शन लगाने से गुडिय़न पुरवा निवासी रामलखन की चार वर्षीय बेटी पूजा की मौत के मामले में भी स्वास्थ्य महकमा चुप्पी साधे है। जबकि परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से बच्ची की हालत बिगड़ी लेकिन अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने न तो बच्ची का इलाज किया और न ही किसी अन्य अस्पताल के लिए रेफर किया। बच्ची की मौत के बाद नाराज परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया तो अस्पताल के लोगों ने 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को बुला लिया। मौंके पर पहुंची पुलिस ने चिकित्सक से बच्ची को उचि इलाज के लिए ट्रामा भेजने का निर्देश दिया, तब बच्ची को रेफर कर दिया। लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो गई।
निजी अस्पतालों में टॉस्कफोर्स को मिली थीं कई खामियां

डेंगू की रोकथाम के लिए गठित टास्क फोर्स के निरीक्षण में निजी अस्पतालों में ढेरों खामियां मिली थीं। टीम ने उन सभी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने से संबंधित रिपोर्ट भी सौंपी थी। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्य महकमे के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि जिन अस्पतालों में खामियां मिली थीं। उन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

एसकेडी अस्पताल से मरीज को जबरन रेफर करने का मामला

एसकेडी अस्पताल में 17 अक्टूबर को साइनस का इलाज कराने आयी 20 वर्षीय युवती की आपरेशन के बाद हालत बिगड़ गयी थी। इसलिए अस्पताल प्रशासन ने अपना दामन बचाने के लिए मरीज को जबरन केजीएमयू रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में ही मरीज की मौत हो गयी। इस मामले में भी परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से शिकायत की थी। लेकिन आज तक कार्रवाई के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। आलम ये है कि सीएमओ की तरफ से अब तक अस्पताल को नोटिस तक नहीं भेजा गया।

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