नगर निगम की सुस्त चाल से पॉलीथीन अभियान गर्त में

  • अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर झाड़ रहे पल्ला
  • पॉलीथीन अभियान पर नगर निगम को हाईकोर्ट ने किया तलब

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। नगर निगम के अफसरों की सुस्ती के चलते शहर में पॉलीथीन का उपयोग धड़ल्ले से जारी है। बाजारों में लगातार बढ़ रहे पॉलीथीन के उपयोग को देखते हुए लगता है कि विभाग द्वारा चलाया जा रहा पॉलीथीन विरोधी अभियान खुद पॉलीथीन में पैक हो गया है। इसी के चलते हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नगर निगम और प्रदेश सरकार को 28 नवंबर को तलब किया है जबकि पॉलीथीन पर बैन लगाये जाने के बाद नगर निगम ने शुरुआती दौर में हजरतगंज, गोमतीनगर जैसे कई मुख्य इलाकों में पॉलीथीन विरोधी अभियान चलाकर कई कुंतल पॉलीथीन जब्त किया था। लेकिन बाद में यह अभियान दूसरे सरकारी अभियानों की तरह ठण्डे बस्ते में चला गया।
अब हालात यह है कि बीते कई माह से ज्यादा समय हो रहा है लेकिन विभाग की तरफ से पॉलीथीन की बन्दी के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया और न ही शहर में कोई अभियान चलाया जा रहा है।
शहर में धड़ल्ले से हो रहा पॉलीथीन का उपयोग
नगर निगम की सुस्ती के चलते शहर में चारों ओर पॉलीथीन का प्रयोग धड़ल्ले से होने लगा है। चाय की दुकान हो या फिर अन्य दुकानें हर ओर पॉलीथीन का व्यापार हो रहा है। जानकार बताते हैं कि पॉलीथीन के प्रयोग से शरीर से संबंधित बीमारियां होती हैं। यहीं नहीं गाय और अन्य पशुओं के पॉलीथीन खाने से पशुओं की मौत के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बाद भी कई निजी संगठनों के साथ-साथ शासन के आदेश दरकिनार होते नजर आ रहे हैं। वहीं कुछ दुकानदारों का कहना है कि पुराने स्टॉक में बची पॉलीथीन को खत्म करने की सुविधा दी गई है, इसलिए अभी भी पॉलीथीन का प्रयोग किया जा रहा है। गौरतलब है कि व्यवसाय की दृष्टि से कई व्यापार ऐसे हैं, जहां पॉलीथीन का प्रयोग आवश्यक है। यदि उनके विकल्प के रूप में किसी अन्य पैकेजिंग सुविधा का प्रयोग किया जाए तो वस्तु की लागत अपने आप ही बढ़ जाएगी, जिसका सीधा बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा।

ठंडे बस्ते में गया अभियान

नगर निगम ने शुरुआती तौर पर हजरतगंज, गोमतीनगर जैसे कई मुख्य इलाकों में पॉलीथीन विरोधी अभियान चलाकर अधिकारियों ने कई

क्विंटल पॉलीथीन जब्त की जबकि आदेश थे कि मार्च महीने से पॉलीथीन का इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों का चालान कर आर्थिक दण्ड लगाया जाएगा। लेकिन समय के साथ अभियान ठंडे बस्ते में चला गया। वहीं इस अभियान के न चलने से एक बात तो साफ है कि निगम के आला अधिकारियों को शासन के आदेश से भी कोई सरोकार नहीं है, न ही आम जनता की सेहत से कोई मतलब है।

पोस्टर व पम्पलेट पर खर्च किए गए थे लाखों रुपये

पॉलीथीन अभियान के चलते नगर निगम ने लाखों रुपये लोगों को जागरूक करने के नाम पर बर्बाद किये थे। जनता को जागरूक करने के लिए नगर निगम की ओर से करोड़ों रुपये के पोस्टर व पम्पलेट छपवाये गये थे। लेकिन समय के साथ जब अभियान ठंडे बस्ते में चला गया, तो यह पोस्टर व पम्पलेट कमरों में पड़े-पड़े धूल खाने लगे और वह बाहर निकलने से पहले ही रद्दी हो गये। मतलब साफ है कि नगर निगम के अधिकारियों ने अभियान के चलते आनन-फानन में कमीशनखोरी की लालच में करोड़ों रुपये का पोस्टर बैनर छपवा डाला। लेकिन इसका नतीजा सिफर ही रहा।

हाईकोर्ट सख्त

नगर निगम की ओर से पॉलीथीन अभियान शुरू में जोर-शोर से चला और कई दुकानों व पॉलीथीन बनाने वाले कारखानों से पॉलीथीन जब्त की गई। बहुत से दुकानदारों का चालान काटा गया लेकिन कुछ ही दिनों के बाद सब कुछ ठप हो गया। इसके बाद अधिकारी शासन से दोबारा आदेश मिलने की दुहाई देने लगे और अभियान की नये सिरे से शुरुआत करने की बातें की जाने लगीं। लेकिन हुआ कुछ नहीं। लिहाजा कई महीने बीतने के बाद अब हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नगर निगम और प्रदेश सरकार को 28 नवंबर को तलब किया है।
सीयूजी नंबर भी नहीं उठाते अधिकारी
लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने का काम नगर निगम के जिन अधिकारियों को सौंपा गया है। उनके पास अपना सीयूजी नंबर उठाने तक की फुर्सत नहीं है। यदि निगम से संबंधित किसी समस्या पर बात करने के लिए अधिकारियों के सीयूजी नंबर पर फोन किया जाता है, तो न ही फोन रिसीव होता है और न ही पलटकर फोन आता है। पॉलीथीन अभियान के संबंध में नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को उनके मोबाइल नंबर पर फोन किया गया लेकिन दोनों अधिकारियों के फोन नहीं उठे। ऐसे में जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

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