नगर आयुक्त के ठेंगे पर क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी

  • मुख्यंमत्री की मंशा को नजरअंदाज कर रहा नगर निगम
  • सार्वजनिक टॉयलेट की नहीं हो रही साफ-सफाई

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। नगर निगम की सुस्ती मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी नारे पर भारी पड़ रही है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री यूपी को बेहतर बनाने के प्रयास में लगे हैं वहीं दूसरी ओर लम्बे समय से नगर निगम इसकी धज्जियां उड़ा रहा है।
पिछले साल नगर निगम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 22 मॉड्यूलर टॉयलेटों का निर्माण कराया था, जोकि वर्तमान समय में जनता को सुविधा प्रदान करने की जगह संक्रमण बांट रहे हैं। इन टॉयलेटों का निर्माण सरकारी संस्था सीएंडडीएस से कराया गया था। इनके निर्माण पर लगभग 52 लाख का खर्च आया था लेकिन नगर निगम और सीएंडडीएस के बीच मॉड्यूलर टॉयलेटों को हैंडओवर करने को लेकर मामला नहीं सुलझ पाया है। नतीजतन जनता की सुविधा के लिए बनाये गये ये टॉयलेट रख-रखाव और साफ-सफाई के अभाव में है। कुछ टॉयलेटों में सीटें टूट चुकी हैं। कुछ अन्य जगहों से क्षतिग्रस्त हैं। 3-4 जगह छोडक़र देखा जाए तो पानी की टंकी भी गायब है, जबकि टंकी रखने के लिए स्टैंड भी बनाया गया था। इसमें भी मजे की बात यह है कि कुछ में पानी व सीवर का कनेक्शन तक नहीं है। बावजूद इसके नगर निगम ने इन टॉयलेटों पर क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी का नारा चस्पा कर रखा है। इसकी बानगी हजरतगंज स्थित एलडीए की मल्टीलेवल पार्किंग के पास बना टॉयलेट है। आलम यह है कि टॉयलेटों में बजबजा रही गन्दगी के चलते जनता टॉयलेट का प्रयोग नहीं कर रही। कहीं-कहीं हालात इतने बदतर हैं कि इन टॉयलेटों के पास से निकलना दूभर हो गया है। ऐसे में जनता के बीच क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी नारा फ्लॉप होता नजर आ रहा है। नगर आयुक्त उदयराज सिंह इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आये।

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