धुंध के चलते अस्पतालों में सांस व नेत्र रोगियों की संख्या में हुआ इजाफा

  • सीएम के आदेश के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य महकमा, शुरू किया मरीजों का इलाज

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ । राजधानी में धुंध के चलते सरकारी अस्पतालों में सांस व नेत्र के रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों को आंखों में जलन तथा सांस लेने में दिक्कतें हो रही है। बीते तीन दिनों में सिविल, बलरामपुर, लोहिया और किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) समेत अन्य अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
केजीएमयू में रोज सांस के 100 से अधिक नये रोगी पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर हालात जल्द न सुधरे तो लंदन में 1952 में हुए ग्रेट स्मोग जैसी स्थिति बन सकती है, जिसके चलते वहां चार हजार लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली सरकार ने राजधानी में पांच दिन कंस्ट्रक्शन, डिमोलिशन बंद करने समेत 10 बड़े फैसले लिए हैं। चिकित्सकों के अनुसार हमारी शारीरिक प्रणाली जब कुछ खास पदार्थों को सहन नहीं कर पाती तो एलर्जी के तौर पर उनके प्रति अपना विरोध प्रकट करती है। ऐसे में प्रदूषण बढऩे से सांस, दमा व अस्थमा के मरीज रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल का जहां पर सांस रोगियों की संख्या तीन सौ का आंकड़ा पार कर गयी। ओपीडी में नेत्र रोगी में दो सौ से अधिक आये। इसी प्रकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल व गोमतीनगर डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रो. संतोष कुमार ने बताया कि धुंध की वजह से सांस संबंधी विशेषकर अस्थमा रोगियों की संख्या बढ़ गयी है। पिछले तीन दिनों से केजीएमयू की ओपीडी में सांस व अस्थमा के रोगी अधिक आ रहे हैं। उन्होंने बताया है कि धुंध के चलते फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है। लोगों को सांस लेने तक में तकलीफ और आंखों में चुभन, ब्रान्काटिस, कंजक्टीवाईटिस की शिकायतें होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ज्यादातर लोगों को छाती में जकडऩ, कफ जमा होने और सांस लेने में मुश्किल की शिकायतें बढ़ जाती हैं। धुंध में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देंगे। इसके अलावा कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ भी हो रही है। दरअसल, उप्र की राजधानी लखनऊ में इस समय वायु प्रदूषण में बड़ी तेजी से इजाफा हुआ है। दीवाली के बाद इसमें और बढ़ोत्तरी हुई, जिसके चलते कोहरे में प्रदूषित धुएं की मात्रा बढ़ गयी और सूबे के कई शहर धुंध के चपेट में आ गये हैं। प्रदेश में छाए इस धुंध को गम्भीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने सोमवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड तथा पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए थे कि वे इस धुंध के लिए जिम्मेदार कारणों का शीघ्र पता लगाकर इनके निदान के उपाय प्रस्तुत करें। उन्होंने प्रदूषण की रोकथाम के लिए बनाए गए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

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