धरनास्थल पर खुले आसमान के नीचे हो रही पढ़ाई

  • बीबीएयू में दलित छात्रों के निष्कासन का मामला

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के निष्कासित छात्र खुले आसमान के नीचे धरनास्थल पर ही पढ़ाई कर रहे हैं। इन छात्रों को अलग-अलग विषयों के प्रोफेसरों द्वारा शिक्षा दी जा रही है। छात्रों ने बुधवार को सत्रहवें दिन धरना जारी रखने के साथ ही दलित छात्रों के निष्कासन का मामला राष्टï्रपति के समक्ष भेजने का निर्णय लिया है।
बीबीएयू से निलम्बित दलित छात्रों को विश्वविद्यालय में पढ़ाई का अवसर न दिए जाने के विरोध में चल रहा धरना बुधवार को 17वें दिन भी जारी रहा। धरने में शामिल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने धरने पर ही देश के जाने माने विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से उन्हे शिक्षा दिलवाने का निर्णय लिया। इसकी शुरूआत बीबीएयू के ही प्रोफेसर नन्दकिशोर मोरे द्वारा दीपावली के दिन धरने पर छात्रों को शिक्षा देने से शुरू की गयी। उसके बाद एमिटी युनिवर्सिटी की सहायक प्रोफेसर सीमा चन्द्रा ने सोमवार को धरने पर बैठे छात्रों को पढ़ाया था। इसी क्रम में मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र के प्रो.डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा द्वारा दलित छात्रों को धरने पर शिक्षा दी गयी। छात्रों के धरने को समर्थन दे रही आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मामले को राष्ट्रïपति तक भेजने का निर्णय लिया है।
समिति अभी तक मानव संसाधन विकास मंत्री से मुलाकात कर उन्हें प्रकरण से अवगत करा चुकी है। समिति ने आरोप लगाया है कि बीबीएयू के कुलपति आरसी सोबती की हठधर्मिता के चलते दलित छात्रों का भविष्य अंधकार में लटका है। यह सिद्ध हो गया है कि बीबीएयू में दलित छात्रों के हितों की बात करने वाला कोई नहीं है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए स्थापित विश्वविद्यालय में ही उनके सिद्घांतो का माखौल उड़ाया जा रहा है।

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