देश में लगातार बढ़ रही मधुमेह रोगियों की संख्या दस साल में चालीसवें से चौथे स्थान पर पहुंचा भारत

  • अनियमित जीवनशैली की वजह से गंभीर बीमारियों का शिकार बन रहे लोग
  • आने वाले समय में महामारी का रूप ले सकता है मधुमेह

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दस साल में मधुमेह रोगियों के मामले में अपना देश चालीसवें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस बीमारी से पीडि़त लोगों की संख्या सात से आठ करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। जो बहुत ही खतरनाक है। इसलिए व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने के साथ ही सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
आदर्श स्वास्थ्य के लिए समेकित चिकित्सा विषय पर इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान दिल्ली सरकार के आयुर्वेदिक सलाहकार डॉ. अखिलेश शर्मा ने बताया कि मौजूदा समय में हमलोग भारतीय वैदिक पद्घति को छोडक़र पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं। इसी वजह से तमाम तरह के शारीरिक और मानसिक रोगों से ग्रसित होते जा रहे हैं। यह स्थिति और अधिक भयावह होने वाली है। क्योंकि 10-15 सालों में हालात इतने बदतर हो जायेंगे कि पचास साल की उम्र आते-आते लोगों का शरीर उनका साथ छोडऩे लगेगा। वे गंभीर बीमारियों के शिकार हो जायेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इसमें काफी हद तक सरकार भी जिम्मेदार है।
डॉ. शर्मा के मुताबिक देश की आजादी के बाद सत्तर सालों तक स्वास्थ्य पर खर्च होने वाले बजट में मात्र पांच प्रतिशत बजट ही आयुर्वेद के विकास अथवा शोध के लिए दिया गया है। अभी हाल में इस बजट को बढ़ाकर कुल बजट का सात प्रतिशत कर दिया गया हैं। उन्होंने बताया कि आज भी जब किसी गम्भीर बीमारी से पीडि़त होने पर कोई मरीज सब तरफ से निराश हो जाता है, तो वह आयुर्वेद की तरफ आता है। उसे स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते अच्छे चिकित्सक देश छोडक़र बाहर के देशों में जा रहे हैं,जहां उन्हें शोध करने का अच्छा मौका मिल रहा है।

बेहतर स्वास्थ्य के लिए जीवनशैली में सुधार आवश्यक

फार्मा डायरेक्टर होम्योपैथी प्रो. बीएन. सिंह के मुताबिक अच्छे स्वास्थ्य के लिए जीवनशैली का सही होना अति आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि आहार, बिहार तथा विचार का बहुत बड़ा फर्क हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। जिस व्यक्ति में उक्त तीनों चीजें गड़बड़ होती हैं। वही लोग बीमारी की चपेट में आते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में सभी बीमारियों की जड़ पेट से शुरू होती है। यदि हम अपना खान-पान सही रखें तो जीवन में आने वाले रोगों के गम्भीर खतरों से बच सकते हैं।
आयुर्वेद औषधियों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान

एनबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ.एके.रावत के मुताबिक मौजूदा समय में आयुर्वेदिक के प्रति लोगों का रुझान काफी बढ़ गया है, जिसके चलते आयुर्वेदिक दवाओं का करोबार भी तजी से बढ़ा है। कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के चलते दवाओं की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इस पर नजर रखना अति आवश्यक है। वहीं कुछ दवा कम्पनियां दवा बनाते समय कच्चे माल का सही इस्तेमाल नहीं करती हैं, जिससे दवा उतनी असरदार नहीं होती,जितनी होनी चाहिए।

मधुमेह पर नियंत्रण जरूरी

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. जितेन्द्र मिश्रा ने बताया कि शुरुआती दौर में जापानी इंसेफ्लाइटिस और डेंगू आदि पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए ये बीमारियां महामारी का रूप धारण कर चुकी हैं। अब यदि मधुमेह के बारे में सब लोग सचेत नहीं हुए, तो वह भी महामारी का रूप ले सकती है। मधुमेह की रोकथाम के लिए आज तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया। हालिया स्थिति ये है कि भारत मधुमेह रोगियों की संख्या के हिसाब से चौथे स्थान पर है। यदि इसी प्रकार से चलता रहा तो आने वाले समय में हम पहले स्थान पर भी पहुंच सकते हैं।
गौरलतब है कि तीन दिवसीय सेमिनार में अमेरिका, ब्रिट्रेन, मलेशिया, बांग्लादेश और नेपाल से 25 चिकित्सकों ने सेमिनार में भाग लिया। साथ ही एलोपैथ, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथ, योग, प्राकृतिक चिकित्सक अपने-अपने अनुभव साझा किये। जानकारों की मानें तो एलोपैथ की किसी भी बीमारी में को ठीक करने के लिए अपनी सीमा निर्धारित है। वहीं आयुर्वेद , होम्योपैथ तथा युनानी चिकित्सा में गम्भीर रोग से पीडि़त मरीजों को इलाज मुहैया करा कर स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा चुका है।

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