दुकानों पर स्लोगन लिखकर किया जा रहा है चाइनीज सामानों का बहिष्कार

  • चाइनीज सामान होने के बावजूद नहीं बेच रहे दुकानदार
  • सोशल मीडिया पर भी विरोध, देशी पटाखों व झालरों की मांग बढ़ी

 ऐश्वर्या गुप्ता
captureलखनऊ। राजधानी में चाइनीज सामान के बहिष्कार का नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहां दुकानदारों ने स्लोगन लिखकर चाइनीज सामान की खरीदारी रोकने और बिक्री न करने की अपील की है। अमीनाबाद की कई दुकानों पर लिखा है कि चाइनीज पटाखे मांगकर शर्मिन्दा न करें। इसके अलावा दुकानों में चाइना मेड पुरानी झालरें, पटाखे और अन्य सामानों का स्टाक होने के बाद भी दुकानदार नहीं बेच रहे हैं। वहीं दीपावली नजदीक होने पर चाइनीज सामान की डिमांड करने वाले लोग भी देशी मेड पटाखे और झालरें खरीद रहे हैं। इससे बाजारों की रंगत भी फीकी लग रही है।
चाइनीज सामान के बायकॉट की अपील का असर चारों तरफ दिखने लगा है। सोशल मीडिया पर काफी समय से -हैज बायकॉट चाइनीज प्रोडक्ट ट्रेंड कर रहा है। देश के कुछ जिम्मेदार सिलेब्स, नेता, सोशल वर्कर और जनता चीनी सामान का बायकॉट करने के लिए आगे आ रहे हैं। माना जा रहा है कि फेस्टिवल सीजन के बावजूद चाइनीज प्रोडक्ट्स की मांग में 30 से 40 प्रतिशत का घाटा होना तय है। उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ खड़े होने के कारण चीन में बनने वाले सामानों से लोगों का मोह भंग होने लगा है। व्हाट्सएप, फेसबुक या फिर ट्विटर सभी पर राजधानी के लोगों से चीनी आइटम नहीं खरीदने की अपील की जा रही है। अभियान से जुड़े लोग मैसेज के जरिए चाइनीज सामानों से दूरी बनाने और भारत में बनने वाली वस्तुओं का अधिक से अधिक प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। वहीं जगह-जगह दुकानों में चाइनीज पटाखे इस्तेमाल में न लाने के लिए कई दुकानदार भी आगे आ रहे हैं। जिससे ग्राहक खुद ब खुद चाइनीज प्रोडक्ट की डिमांड नहीं करेंगे।

चीन के खिलाफ गुस्सा

अलीगंज में रहले वाले शिखर कहते हैं कि हमें ऐसा बहुत पहले ही कर देना चाहिए था। लेकिन देर आये दुरूस्त आये अब चाइनीज आइटमों को बॉयकॉट करके चीन को सबक सिखा सकते हैं। वहीं प्राइवेट जॉब करने वाले हर्ष कहते हैं कि इस बार तो मेरे बच्चों ने ही पटाखे न खरीदने का मन बनाया है। उनका कहना है कि हमारे स्कूल टीचर ने हमें चाइनीज पटाखों को इस्तेमाल में न लाने के लिए समझाया है और पटाखों से वैसे भी वातावरण दूषित होता है। इसलिए पटाखों से दूर ही रहेंगे।

देशभक्ति का जोश

आजकल के युवा आधुनिक सोच और मौज मस्ती करने में चाहे जितने व्यस्त रहते हों लेकिन जहां कहीं भी देश के मान सम्मान की बात आती है, तो वह किसी से पीछे नहीं हटते और दुश्मनों से लडऩे का हौसला रखते हैं। ऐसे मौकों पर युवाओं के मौज-मस्ती और दोस्तों के साथ गपशप का जरिया माना जाने वाला व्हाट्स एप और फेसबुक अपनी बात रखने का माध्यम बना लेते हैं। यूथ ने फेसबुक और व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाकर लोगों को चाइनीज आइटम का विरोध करने का मैसेज भेजना शुरू कर दिया है। जानकीपुरम में रहने वाली शिखा सिंह कहती हैं कि नवरात्र और दीपावली में 3000 करोड़ की लाइट चीन बेचता है। चीन के सामान का बहिष्कार किया जाना चाहिए। मैं अब इन चीजों के लिए बाकी के लोगों को जागरुक करना चाहती हूं। इसके लिए मैं व्हाट्सएप और फेसबुक का इस्तेमाल कर रही हूं। इसके जरिए मेरी बात कई लोगो तक पहुंच सकेगी। वहीं इंजीनीयरिंग कॉलेज में पढऩे वाले सौरभ त्रिपाठी कहते हैं कि चीन उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ खड़ा है, इसलिए मैं शपथ लेता हूं कि इस दीपावली क्या आगे आने वाले हर साल में कोई भी चाइनीज सामान नहीं खरीदूंगा। साथ ही बाकी लोगों को भी इसके लिए व्हाट्सएप के जरिए अवेयर करना शुरू कर दिया है।

चाइनीज पटाखे मांग कर शर्मिंदा न करें

दुकानदारों ने तो अब मन बना लिया है कि ग्राहकों को भी इस बार देसी पटाखों को लेने के लिए उत्साहित करेंगे। जिसके लिए दुकानों पर लिखा जाएगा कि हमारे यहां चाइनीज पटाखे नहीं मिलते, मांग कर शर्मिदा न करें। अमीनाबाद में पटाखे की दुकान लगाने वाले रजनीश कहते हैं कि गांवों, कालोनियों और कुछ बाजारो में पटाखें की दुकान लगाने वालो में कुछ लोग चोरी-छुपे चाइनीज पटाखे बेचते हैं। बहाना यह रहता है कि पुराना माल पड़ा है, तो किसी तरह पटाखे बेचना है। घरो में रोशनी के लिए सजावट करने वाली झालरों का भी लोगों ने बायकॉट करना शुरू कर दिया है।

गोदाम में पड़े हैं चाइनीज पटाखे

दीवाली पर चाइनीज पटाखे न बिकें इसके लिए हर साल किसी न किसी तरह की कोशिश की जाती थी, लेकिन इस बार ज्यादातर जगह दुकानदार खुद पीछे हट गए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान और चीन के खिलाफ देश में बने माहौल ने इन पटाखों को फिलहाल फैक्ट्री तक सीमित कर दिया है। जिन दुकानदारों के पास पुराने चाइनीज पटाखे पड़े हैं, वे उन्हें डिब्बों से बाहर निकालने से भी हिचक रहे हैं। लखनऊ के ऐशबाग स्थित रस्तोगी इंटर कॉलेज मैदान में हर साल की तरह इस बार भी सजी थोक पटाखा मार्केट में मंगलवार से पटाखों की बिक्री शुरू हो गयी है। जो कि 31 अक्टूबर तक चलेगी। मैदान में पटाखों की दुकान लगाने वाले राजू कहते हैं कि मैं कई सालों से यहां पटाखे की दुकान लगाता आ रहा हूं। हर बार यहां पटाखे की अच्छी बिक्री होती है, लेकिन इस बार उम्मीद कम लग रही है । हमारे पास पिछले साल के चाइनीज पटाखे पड़े हुए हैं। दो दिनों में जो भी लोग पटाखे खरीदने आने वालो में से किसी ने भी चाइनीज पटाखों की मांग नहीं की है। हालांकि हम भी कोशिश यही कर रहे हैं कि चाइनीज पटाखे न बिकें। अपने देश और जवानों के साथ इस बार जो हुआ वो गलत हुआ। चाइनीज समानों के बहिष्कार के लिए हम सब अपने देश के साथ हैं।

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