दीपावली के संदेश को समझें

महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वे घर-बाहर कहीं सुरक्षित नहीं हैं। उन पर तमाम पाबंदियां लागू हैं। धर्म और जाति के नाम पर समान अधिकार की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भारत में स्त्री को गृहलक्ष्मी का दर्जा मिला है। दीपावली के मौके पर लक्ष्मी पूजा तभी सार्थक हो सकती है जब हम स्त्री स्वरूपा गृहलक्ष्मी की न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करें बल्कि उसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प भी लें।

sanjay sharma editor5दीपावली महज प्रकाशोत्सव नहीं। घर पर लगी दीपों की पांतें हमें समाज में फैले बुराई रूपी अंधकार को समाप्त करने का संदेश देती हैं। घर-आंगन को आलोकित करने वाले ये दीए हमें अपने मनोविकारों को खत्म करने और सत्य के पथ पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं। आज जब पूरी दुनिया में आतंकवाद, एक-दूसरे के प्रति घृणा का भाव, मार-काट और स्त्रियों का उत्पीडऩ और दमन लगातार बढ़ता जा रहा है तब दीपावली के संदेश ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं। दीपावली के संदेश को समझे बगैर हम एक सुखद समाज और देश का निर्माण नहीं कर सकते। आतंकवाद ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है। कई देश इससे प्रभावित हैं। हिंसा ने लोगों का सुख-चैन छीन लिया है। आतंकवाद ने अब तक लाखों लोगों की जानें ले ली हैं। इसने विश्व के तमाम देशों के बीच कटुता को बढ़ा दिया है। रूस और अमेरिका जैसी महाशक्तियां आमने-सामने आ चुकी हैं। परमाणु युद्ध का खतरा उत्पन्न हो चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सिरफिरे आतंकियों के हाथ परमाणु अस्त्र लग गए तो क्या होगा। इसकी महज कल्पना की जा सकती है। अमेरिका के राष्टï्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन समेत कई हस्तियां इस पर खुलेआम चिंता जाहिर कर चुकी हैं। लेकिन कई देश आतंकियों को पालने पोसने में लगे हैं। पाक अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए आतंकियों की फौज भेजकर भारत में हिंसा फैला रहा है। अब ये आतंकी उसके लिए भी भस्मासुर साबित हो रहे हैं। लोकतांत्रिक आदर्शों और मानवाधिकार की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। चीन और पाक समेत कई देश इसमें लगे हुए हैं। बलूचिस्तान में आजादी की मांग करने वाले बलूचियों पर दमन चक्र जारी है तो फिलीपींस के समुद्री क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिशें हो रही हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वे घर-बाहर कहीं सुरक्षित नहीं हैं। उन पर तमाम पाबंदियां लागू हैं। धर्म और जाति के नाम पर समान अधिकार की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भारत में स्त्री को गृहलक्ष्मी का दर्जा मिला है। दीपावली के मौके पर लक्ष्मी पूजा तभी सार्थक हो सकती है जब हम स्त्री स्वरूपा गृहलक्ष्मी की न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करें बल्कि उसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प भी लें। कुल मिलाकर पूरी दुनिया बारूद के ढेर में बैठी है, एक चिंगारी संपूर्ण मानवजाति को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है। इससे तभी बचा जा सकता है जब हम केवल दीपोत्सव ही न मनाएं बल्कि इसके निहित संदेश को भी अमल में लाने की कोशिश अभी से करें। तमसो मा ज्योतिर्गमय के आदर्श तभी सार्थक होंगे।

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