दलित-मुस्लिम गठजोड़ को अमली जामा पहनाने में जुटी बसपा

  • पार्टी कार्यकर्ता मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में बांट रहे हैं बुकलेट
  • यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में दलित-मुस्लिम होंगे निर्णायक

सुनील शर्मा
captureलखनऊ। मुसलमानों का साथ पाने को बेकरार बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक और दांव खेला है। उन्होंने दलित मुस्लिम गठजोड़ के सहारे सत्ता पाने की हसरत को अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी है। बसपा मुसलमान बाहुल्य क्षेत्रों में ‘मुस्लिम समाज का सच्चा हितैषी कौन, फैसला आप करें’ शीर्षक से आठ पन्नों की बुकलेट का वितरण करवा रही है। बुकलेट के जरिए मायावती ने भाजपा के साथ अपने पूर्व के संबंधों पर सफाई भी दी है। हिंदी व उर्दू में छपी इस बुकलेट में भविष्य में बसपा व भाजपा के बीच किसी भी प्रकार का गठबंधन करने से साफ इंकार किया गया है। इसके पूर्व मुस्लिमों को अपने पाले में लाने के लिए पार्टी 2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव में 128 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट देने का ऐलान कर चुकी है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ बसपा सुप्रीमो मायावती की मुस्लिमों को अपने पाले में लाने की बेकरारी भी बढ़ती जा रही है। पार्टी को पूरा भरोसा है कि 24 फीसदी दलित व 19 प्रतिशत मुसलमानों के गठजोड़ से प्रदेश की सत्ता हासिल की जा सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए पार्टी ने मुसलमानों को लुभाने के लिए पहले ही 128 मुस्लिमों को टिकट देने की घोषणा कर दी है। अब इसके बाद एक रणनीति के तहत पार्टी कार्यकर्ता मुस्लिम मतदाताओं के बीच बुकलेट बांट रहे हैं, जिसके मुख पृष्ठ पर मायावती की तस्वीर छपी है। यह पुस्तिका पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में वितरित की जा रही है।
इसके जरिए बसपा सुप्रीमो ने अतीत के 13 विभिन्न पहलुओं पर सफाई देने की कोशिश की है। बुकलेट में दावा किया गया है कि उन्होंने भाजपा के साथ भले ही सरकार बनाई थी लेकिन इसके बावजूद बसपा ने अयोध्या, मथुरा, काशी में कोई नई परंपरा नहीं शुरू होने दी। हिंदूवादी संगठनों को नए धार्मिक कार्य नहीं करने दिए गए। मायावती ने पुस्तिका में लिखा है ‘हमने 1999 में भाजपा को सबक सिखाया था, जब हमारे एक वोट के कारण उसकी सरकार गिरी थी। प्रदेश में जब भी सपा की सरकार रही केन्द्र में भाजपा की शक्ति में वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 में जब बसपा की सरकार उत्तर प्रदेश में थी तब भाजपा को केवल नौ लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी। इसके मुकाबले वर्ष 2014 में सपा सरकार में भाजपा को 73 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई।’

भाजपा-सपा के बीच आंतरिक गठजोड़ दिखाने का प्रयास

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुसलमानों को समाजवादी पार्टी से दूर करने के लिए बुकलेट में कई राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देकर भाजपा-सपा के बीच आंतरिक गठजोड़ होने की बात को साबित करने का प्रयास किया है। बुकलेट में मुसलमानों से पूछा गया है कि बाबरी मस्जिद पर पहला फावड़ा मारने वाले साक्षी महाराज को राज्यसभा में किसने भेजा था। कल्याण सिंह पर बाबरी मस्जिद गिराने के आरोप के बावजूद उनको सपा में किसने शामिल किया था। बुकलेट के जरिए मायावती ने कहा है कि 2003 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त केंद्र की भाजपा सरकार व विधानसभा अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी की बदौलत सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव अल्पमत में होने के बावजूद मुख्यमंत्री बने। इटावा में बीते दिनों मुलायम सिंह यादव परिवार में हुए वैवाहिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिरकत करने का हवाला देते हुए सपा सुप्रीमो व मोदी के बीच निकटता साबित करने का भी प्रयास किया गया है। भाजपा के पुराने संगठन जनसंघ की मदद से 1967 में जसवंतनगर सीट पर मुलायम सिंह यादव के जीतने व सरकार बनाने को याद कराते हुए मुसलमानों के घावों को हरा करने का भी प्रयास बुकलेट के जरिए किया गया है। बसपा ने मुसलमानों को याद दिलाया है कि वर्ष 1995 में भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने के बावजूद उसने वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में विश्व हिंदू परिषद को जलाभिषेक करने और मथुरा ईदगाह में विष्णु यज्ञ करने की अनुमति नहीं दी।

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