थोड़ी हकीकत ज्यादा अफसाना हैं ममता दीदी के शिकवे!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हमेशा से ही शिकायत रही है कि वर्तमान मोदी सरकार भी उनके राज्य के साथ सौतेला रवैया अपना रही है। राज्य की मुखिया होने के नाते ममता बनर्जी का अपने राज्य के विकास के प्रति उत्सुक और अधीर होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर आंकड़ों पर गौर करें तो उनका केन्द्रीय सरकार के खिलाफ शिकवा-शिकायत करना कुछ हजम नहीं होता है। वैसे अगर बात सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से लांछन लगा कर सियासत की बिसात पर मोहरे चलने की है तो इस तरह की राजनीति का असर उल्टा भी होता रहा है। कारण इंटरनेट के दौर में पर्दानशीं भी बेपर्दा हो सकते हैं।
आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय तथा कई अन्य स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों की मानें तो आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने पांच राज्यों जिसमें बंगाल भी शामिल है, को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए 84,460 और मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। इनमें कुल मिलाकर 3,073 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कुल योजना के लिए 1,256 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी गई है। बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के ‘लाभार्थी की अगुवाई में निर्माण’ घटक के तहत इन मकानों का निर्माण किया जाना है। जिसके तहत पश्चिम बंगाल के लिए 1,918 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 47,379 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। यानि बंगाल को योजना के तहत 711 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता को स्वीकृति दी गई है।
आइये जानते हैं कि देश के उक्त पांच राज्यों के तहत किसको क्या मिलेगा। पंजाब के लिए 424 करोड़ रुपये के निवेश एवं 217 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 15,209 मकानों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इसी तरह झारखंड के लिए 464 करोड़ रुपये की कुल लागत एवं 192 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 12,814 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। केरल के लिए 179 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 5968 मकानों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिनके लिए 89 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी गई है। मणिपुर के लिए पहली बार 3,090 मकानों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिनमें कुल मिलाकर 88 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और जिनके लिए 46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी गई है।
ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के ‘लाभार्थी की अगुवाई में निर्माण’ घटक के तहत आर्थिक दृष्टि से पिछड़े तबकों से वास्ता रखने वाले हर पात्र लाभार्थी को संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुरूप मौजूदा मकानों के विस्तारीकरण, उन्नयन के लिए 1.50 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता दी जाती है। साफ कर देना होगा कि इन नवीनतम मंजूरियों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत पिछले एक वर्ष के दौरान 62,740 करोड़ रुपये के निवेश के साथ कुल मिलाकर 10,95,804 किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिनके लिए 16289 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता को स्वीकृति दी गई है।
अब एक बार फिर से बंगाल की बात करते हैं लेकिन तथ्यों और आंकड़ों के साथ। बीते दिनों केंद्र द्वारा पश्चिम बंगाल में सागर बंदरगाह परियोजना विकास के लिए 515 करोड़ रुपये का अनुदान मंजूर किया गया है। केंद्र ने पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित सागर बंदरगाह परियोजना के विकास के लिए सिद्धांत रूप से 515 करोड़ रुपये के अनुदान देने की मंजूरी दी है। यह शिपिंग मंत्रालय के पिछले दो वर्षों से जारी प्रयास के हिस्से के रूप में है। एक स्पेशल परपस व्हिकेल, भोर सागर पोर्ट लिमिटेड (बीएसपीएल) को परियोजना लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के पास 74 प्रतिशत शेयर हैं और पश्चिम बंगाल सरकार की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत की है। तटीय सुरक्षा, जमीन का फिर से दावा करने तथा तलकर्षण सामग्री के उपयोग के लिए मॉडलिंग को शामिल करते हुए विस्तृत योजना रिपोर्ट तैयार करने के काम में आईआईटी मद्रास को लगाया गया है। विस्तृत योजना रिपोर्ट तैयार करने का काम जारी है।
बंदरगाह संपर्क को विकसित करने का भी काम हो रहा है। सागरद्वीप को मुख्य भूमि से जोडऩे के लिए मुड़ीगंगा नदी के ऊपर एक सडक़ सह रेल पुल बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने विस्तृत योजना रिपोर्ट तैयार की है। पुल बनाने में 1822 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस सडक़ और रेल पुल को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और रेलवे नेटवर्क से जोडऩे का कार्य भी किया जा रहा है। सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सिद्धांत रूप में एनएच-117 को काकद्वीप से जोका और सागरद्वीप को सडक़ और रेल पुल से जोडऩे के लिए 4 लेन की सडक़ बनाने पर सहमति दी है। रेल बोर्ड ने बंदरगाह को रेल नेटवर्क से जोडऩे के लिए सर्वेक्षण की मंजूरी दी है।
बंगाल के लोगों को पता है कि 34 वर्ष की शासन व्यवस्था के दौरान वाममोर्चा की सरकार ने राज्य पर भारी भरकम कर्ज लाद दिया है। तमाम योजनाएं वाममोर्चा की सरकार के समय दम तोड़ चुकी हैं। वाममोर्चा के नेता व मंत्रियों का भी यही आरोप जनता की अदालत में लगता रहा कि दिल्ली सरकार के रवैये से राज्य के विकास पर ब्रेक लगा है। कहीं ममता बनर्जी की सरकार भी आरोप जडऩे के मामले में वाममोर्चा के पथ की राही तो नहीं बन रही है।

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