तीन माह बाद एक बार फिर बुजुर्गों को नौकरी पर लेने की कवायद तेज

  • आवास-विकास में आउटसोर्सिंग के तहत कर्मचारियों की भर्ती पर उठ रहे सवाल

 

  • कमीशनखोरी के चक्कर में पुराने कर्मचारियों को तिहरा लाभ दिलाने की कोशिश में जुटे अधिकारी

अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। आवास-विकास परिषद में कमीशनखोरी के चक्कर में रिटायर्ड और पूर्व में कार्यरत कर्मचारियों को दोबारा आउटसोर्सिंग पर रखने की कवायद चल रही है। जबकि सरकारी विभागों में नौकरी मिलने की आस लगाये हजारों की संख्या में बेरोजगार युवकों और युवतियों को मौका ही नहीं मिल पा रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों से रिटायर होने और पेंशन पा रहे कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने की कवायद चल रही है। ये ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्हें बुजुर्ग होने और तय उम्र के बाद रिटायर कर दिया गया था।
आवास-विकास परिषद में युवा बेरोजगारों को अनदेखा कर बुजुर्गों से काम लिया जा रहा है। बुजुर्ग तिहरे लाभ के साथ विभाग में जमे हैं और लाखों की कमाई कर सरकार को चपत लगा रहे हैं। जानकारों की मानें तो विभाग में लगभग 40 से 50 कर्मचारी, अधिकारी आउटसोर्सिंग के जरिए रखे गए हैं। इनमें से बहुत रिटायर होने के बाद भी आउटसोर्सिंग के कारण जमे हुए हैं। इन्हें पेंशन, मानदेय व दलाली का तिहरा लाभ मिल रहा है। इस मामले में कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत की थी, इसलिए जब मुख्यमंत्री कार्यालय से रिपोर्ट मांगी गयी, तो विभाग की ओर से अधूरी रिपोर्ट भेजकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लेकिन कर्मचारी संगठनों के लगातार संघर्ष के बाद बीते माह ३० जून को आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारियों-अधिकारियों को कार्य पर न आने का आदेश दिया था। इसके बावजूद उन्ही से काम लिया जा रहा है। इतना ही नहीं कुछ और रिटायर कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के माध्मय से लाने की कोशिशें चल रही हैं।

खाली हैं पद, नहीं हो रही भर्ती

आवास-विकास परिषद में कई वर्षों से लगभग 250 पद रिक्त हैं। इसके बाद भी भर्तियां नहीं की जा रही हैं। समन्वय विभाग के प्रशासनिक अधिकारी केडी शर्मा ने बताया कि हम लोगों को जब कर्मचारियों व अधिकारियों की जरूरत पड़ती है, तो हम आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों को रखते हैं और उनसे काम लिया जाता है। आउटसोर्सिंग वाले जिसको भेज देते हैं, हम उनसे काम लेते हैं, फिर चाहे वह युवा हों या फिर सेवानिवृत्त। हालांकि युवाओं को रखने से काम में तेजी तो आएगी ही और काम भी समय पर कम्पलीट हो जाएगा।

कर्मचारी संघ की मांग

आवास-विकास परिषद की कम्प्यूटर सेल हो या फिर समन्वय विभाग दोनों में ही लगभग 40 से 50 कर्मचारी व अधिकारी जो 60 वर्ष से ऊपर हैं, वो तिहरा फायदा लेते हुए विभाग में जमे हुए थे। इन कर्मचारियों को हटाकर नये युवाओं की भर्ती करने के लिए कई बार कर्मचारी संघ ने मांग की है और आवास आयुक्त से आदेश भी कराया गया। इसके बाद भी उन लोगों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखने की कवायद चल रही है। कर्मचारी संघ के अनुसार अब तक बुजुर्गों से काम लिया जा रहा है, जिससे कार्य की गति धीमी है। इसलिए युवाओं को नियुक्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा तिहरा लाभ लेने वालों की नियुक्ति पर रोक लगनी चाहिए।
सरकार हर तीन माह में कोर्ई न कोई परियोजना निकालकर लोगों को समय से आवास दिलाने का वायदा करती है। लेकिन वहां तैनात बुजुर्ग कर्मचारियों के माध्यम से काम में लेटलतीफी होती है। इसलिए समय पर परियोजनाओं का लाभ आम जनता को मिल पाना टेढ़ी खीर है। हालांकि आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने आउटसोर्सिंग के जरिए विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे कार्मिकों से बीते 30 जून, २०१६ के बाद से कार्य न लिये जाने का आदेश दिया था। लेकिन यह आदेश सिर्फ आदेश तक ही सीमित रहा।

ऐसा कोई भी मामला मेरी संज्ञान में नहीं आया है, किन्तु अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि उच्च अधिकारी चाहें तो उन्हें दोबारा रखा भी जा सकता है। ऐसा कोई असंभव कार्य तो नहीं है।
अखिलेश सिंह, अपर आवास आयुक्त, आवास-विकास परिषद

तिहरा फायदा उठाते थे कर्मचारी

आवास-विकास परिषद में आउटसोर्सिंग पर रखे गये कर्मचारी-अधिकारी तिहरा फायदा उठाते हुए यहां जमे हुए थे। इस पर आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने उन्हें ३० जून को कार्यमुक्त होने का आदेश दिया था। इसके बाद भी कुछ कर्मचारी-अधिकारी कई दिनों तक आवास आयुक्त के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए लगातार कार्यरत रहे। वहीं तीन माह बीत जाने के बाद एक बार फिर उन्हीं कर्मचारियों को दोबारा रखने के लिए जद्दोजहद की जा रही है। ये कर्मचारी पेंशन भी पा रहे थे और आवास-विकास से भी उन्हें दस हजार रुपये का मानदेय हर माह मिल रहा था। इसके साथ-साथ वह अपने पद पर बने रहकर दलाली करके हजारों रुपयों की कमार्ई करके अपनी जेबें भर रहे थे।

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