ड्यूटी के नाम पर होमगार्डों से वसूली कर रहे अफसर

  • विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा खुला खेल
  • हर महीने ड्यूटी लगाने के नाम पर किया जा रहा शोषण

आमिर अब्बास
captureलखनऊ। होमगार्डों की हर महीने ड्यूटी लगाने के नाम पर उनके ही अधिकारी शोषण कर रहे हैं। जब तक अधिकारियों की डिमांड पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी होमगार्ड की ड्यूटी नहीं लगाई जाती है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर बड़े ही सुनयोजित ढंग से नजराना लेकर ड्यूटी लगाने का खेल हो रहा है। होमगार्डों के साथ मजबूरी ये है कि वे पूरी तरह उन अधिकारियों पर निर्भर रहते हैं, जो ड्यूटी चार्ट तैयार करता है क्योंकि होमगार्ड के वेतन का भुगतान डेली लगने वाली ड्यूटी के हिसाब से किया जाता है। होमगार्डों को नियमित वेतन नहीं मिलता है, ड्यूटी लगने पर ही उन्हें रोजमर्रा के हिसाब से भुगतान दिया जाता है। यही कारण है कि उनके अधिकारी ड्यूटी लगाने के नाम पर होमगार्डों से मोटी रकम वसूलते हैं।
नियमित न होने के बावजूद कार्य करने को मजबूर होमगार्डों को अपने ही अधिकारियों की वसूली का शिकार होना पड़ रहा है। ये वे होमगार्ड हैं, जो न सिर्फ पुलिस विभाग में हमेशा ड्यूटी करते हैं बल्कि महज 300 रुपये दैनिक में अपने पूरे परिवार का पेट पालते हैं, लेकिन अधिकारी इन मजबूर होमगार्डों से भी वसूली करने से बाज नहीं आते हैं।
राजधानी के वीवीआईपी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कुल 4200 होमगार्डों की तैनाती को स्वीकृति दी गयी है, जिसमें 3600 से लेकर 3700 होमगार्डों को ड्यूटी पर तैनात किया जाता है।
हर होमगार्ड की ड्यूटी का भुगतान महीने के हिसाब से न होकर रोजमर्रा की ड्यूटी के आधार पर किया जाता है। उन्हें 8 घंटे की ड्यूटी के एवज में मात्र 300 रुपए प्रतिदिन दिया जाता है। यही कारण है कि मजबूर और बेबस होमगार्ड इस 300 रुपयों की खातिर अपने ही अधिकारियों के आगे-पीछे दौड़ते हैं। सूत्रों की मानें तो ड्ïयूटी लगाने के नाम पर इनके अधिकारी प्रति होमगार्ड एक हजार रुपये की वसूली करते हैं। अगर 1000 रुपए प्रति होमगार्ड के हिसाब से देखा जाए तो राजधानी में तैनात होने वाले 3600 होमगार्डों से प्रतिमाह 36 लाख की मोटी रकम वसूली जाती है। इस तरह अफसर मोटी कमाई करने में जुटे हैं। वहीं होमगार्ड ड्ïयूटी लगवाने के लिए यह नजराना देने के लिए मजबूर हैं। यदि होमगार्ड ड्ïयूटी से पूर्व नजराना न दें तो उनकी ड्यूटी नहीं लगाई जाती। यही कारण है कि हर होमगार्ड को मजबूर होकर अपने ही अधिकारियों के शोषण का शिकार होना पड़ रहा है।

किसी भी होमगार्ड से नहीं हो रही वसूली: कमांडर

राजधानी में होमगार्डों से हो रही वसूली के सम्बन्ध में जब कंपनी कमांडर अरुण कुमार रावत से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि यहां किसी भी होमगार्ड से कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है। जो होमगार्ड ऐसा आरोप लगा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं और झूठा आरोप लगा रहे हैं। सभी होमगार्डों को 300 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पूरा पैसा दिया जाता है। किसी का कोई पैसा न तो लिया जाता है और ही काटा जाता है। वहीं होमगार्ड की संख्या अधिक होने के चलते कुछ की ड्यूटी नहीं लग पाती है। लेकिन उन्हें भी अगले माह तैयार होने वाले ड्ïयूटी चार्ट में प्राथमिकता दी जाती है।

माह के अंतिम दिन से ही शुरू होता है वसूली का खेल

जानकारों की माने तो हर महीने होमगार्डों से वसूले जाने वाले पैसों का खेल माह के अंतिम दिन से ही शुरू हो जाता है। जो आने वाले माह की 5 तारीख तक जारी रहता है। उस दौरान लगभग सभी होमगार्ड अपने ही अफसर के सामने नजराना लिए हुए ड्यूटी लगवाने की गुहार लगाते नजर आते हैं। सूत्र बताते हैं कि जो होमगार्ड अपने मनचाहे स्थान पर ड्यूटी लगवाना चाहते हैं। उनसे 1500 रुपए प्रतिमाह लिया जाता है। वहीं जो होमगार्ड पैसा देने असमर्थ रहते हैं, उनकी ड्यूटी लगाना तो दूर उन्हें दुुत्कार कर भगा दिया जाता है। नतीजतन होमगार्डों को मजबूर होकर इन अधिकारियों की कृपा पर निर्भर रहना पड़ता है और उनकी कृपा तब होती है जब होमगार्ड उन्हें निश्चित धनराशि दे दें।

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