ट्रेन हादसों से कब सबक लेगी सरकार

क्या सरकारें ऐसे हादसों से कोई सबक लेने को तैयार नहीं हैं? यह कि जब सामान्य ट्रेनें हादसों का शिकार हो रही हैं तो क्या सरकार को बुलेट ट्रेन चलाने का सपना देखना चाहिए? क्या केवल मुआवजे की घोषणा कर सरकार हादसे से अपना पल्ला झाड़ सकती है? क्या हादसे में मरने वालों का हिसाब सरकार देगी? सच यह है कि सरकार ने ट्रेनों की संख्या और फेरे तो बढ़ा दिए हैं लेकिन इसके सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम आज तक नहीं किया।

कानपुर के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का शिकार हो गई। सौ से अधिक परिवार उजड़ गए। हादसे ने किसी की बेटी छीन ली तो किसी का बेटा। किसी ने अपनी पत्नी खोई तो किसी ने अपना पति। लोsajnaysharmaग अपनों के शवों को लेकर इधर से उधर दौड़ते रहे। चारों ओर लाशें बिखरीं थीं। चीख पुकार और परिजनों के विलाप के अलावा यहां कुछ भी सुनाई नहीं पड़ रहा था। बोगियों को काटकर लोगों को निकाला गया। सरकार ने आनन-फानन में मामले की जांच के आदेश दिए। मृतकों के परिजनों को मुआवजे का ऐलान भी किया गया है। हादसे से हर कोई दु:खी है। लेकिन एक सवाल अपनी जगह आज भी खड़ा है। क्या सरकारें ऐसे हादसों से कोई सबक लेने को तैयार नहीं हैं? यह कि जब सामान्य ट्रेनें हादसों का शिकार हो रही हैं तो क्या सरकार को बुलेट ट्रेन चलाने का सपना देखना चाहिए? क्या केवल मुआवजे की घोषणा कर सरकार हादसे से अपना पल्ला झाड़ सकती है? क्या हादसे में मरने वालों का हिसाब सरकार देगी? सच यह है कि सरकार ने ट्रेनों की संख्या और फेरे तो बढ़ा दिए हैं लेकिन इसके सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम आज तक नहीं किया। रेल पटरियों में संकट के समय अलर्ट करने वाले किसी प्रकार के उपकरण तक नहीं लगाए गए। हालांकि हर हादसे के बाद सरकार बयान देती है कि यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा के लिए रेलों को आधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस किया जाएगा। वर्षों से ऐसी किसी योजना पर किसी सरकार ने गंभीरता से काम नहीं किया है जबकि पिछले छह वर्षों में बीस से अधिक बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं हो चुकी है और सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। आज भी भारत में सैकड़ों मानवरहित रेल फाटक हैं। ट्रेन आने के समय यहां फाटक बंद करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लिहाजा ऐसे फाटकों पर कई बार ट्रेनें दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। जाहिर है संकट के समय ट्रेन चालक अपनी सूझ-बूझ पर निर्भर रहता है। उसे किसी प्रकार की तकनीकी मदद नहीं मिल पाती है। यही वजह है कि विदेशों की तुलना में भारत में रेल दुर्घटनाएं न केवल अधिक होती हैं बल्कि जान-माल का भी भारी नुकसान होता है। इसकी बड़ी वजह संकट के समय चालक को सावधान करने के लिए कोई आधुनिक सुरक्षा तकनीकी का प्रयोग नहीं होना है। प्रथम दृष्टïया इंदौर-पटना एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने का कारण इमरजेंसी ब्रेक को माना जा रहा है। लेकिन जांच के बाद ही वास्तविकता का पता चल सकेगा। सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द रेल और इनके यात्रियों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करे अन्यथा हादसों को रोकना मुश्किल होगा।

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