टिफिन के व्यवसाय ने महिलाओं को दी एक नयी पहचान

  • कई सेंटर में धीरे-धीरे बढ़े टिफिन के ऑर्डर
  • टिफिन रोजगार ने बनाया आत्मनिर्भर, लगातार बढ़ रहा बिजनेस

 ऐश्वर्या गुप्ता
लखनऊ। आज के समय में नौकरी मिल पाना एक बड़ी बात बनती जा रही है। ऐसे में अगर किसी अवसर का फायदा उठाने का मौका मिले तो उसके लिए सबसे जरूरी है अपने हुनर को पहचानना। आज ऐसे कई रोजगार हैं, जिसमें लोग आगे बढ़ रहे हैं। अगर लोगों को नौकरी नहीं भी मिल रही तो भी मेहनत करने वाले लोग अपने लिए रास्ता ढूंढ ले रहे हैं। शहर में इन दिनों लंच-बॉक्स के बढ़ते क्रेज ने कई महिलाओं को स्वरोजगार के क्षेत्र में मजबूत बना दिया है। अब महिलाएं भी इस छोटे से बिजनेस में आगे बढ़ती नजर आ रही हैं। शहर में करीब 40 से 50 प्रतिशत टिफिन सेंटर्स महिलाएं ही चला रही हैं। उनका खाना बनाने का शौक उन्हें एक नई पहचान भी दे रहा है। ऐसे में अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए और खुद को एक नई पहचान देने के लिए लड़कियां और महिलाएं नए-नए हुनर भी सीख रही हैं।

एक टिफिन से चार सौ टिफिन रोजाना तक का सफर

अलीगंज में सुप्रिया फूड टिफिन सर्विस चलाने वाली सरला वर्मा बताती हैं कि उनके टिफिन सेंटर में उन सभी लड़कियों और महिलाओं को एक पहचान भी मिलती है, जो शायद कुछ बन नहीं पातीं। यहां खाना बनाने के साथ करीब कई महिलाएं ट्रेनिंग भी ले रही हैं। जिसके पूरा होने के बाद उन्हें जॉब या सेल्फ एम्प्लॉयमेंट की तरफ भी आगे बढ़ाया जाता है। सरला बताती हैं कि उन्होंने जब अपना टिफिन सेंटर शुरू किया था, तो एक टिफिन पहुंचाने से शुरुआत की थी। अब वही संख्या 400 टिफिन तक पहुंच चुकी है।

टिफिन पहुंचाने के लिए सीखी ड्राइविंग

गोमतीनगर में दीदी का खाना में काम करने वाली एक महिला वर्कर अनीता ने तो टिफिन पहुंचाने के लिए कार चलाने का हुनर भी सीख लिया । वह अब दो या चार नहीं बल्कि एक साथ 30 से 40 टिफिन तक एक साथ पहुंचा रही हैं। अनीता का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं कि भागदौड़ करने वाला हर काम सिर्फ आदमी ही कर सकते हैं। अब औरतों ने भी आगे बढऩे का बीड़ा उठा लिया है। अनीता चाहती हैं कि उनकी तरह और भी महिलाएं भी इस फील्ड में आगे बढ़े। वे बताती हैं कि कार ड्राइविंग सीखने के बाद एक साथ ज्यादा से ज्यादा टिफिन ले जाने के साथ ही टाइम की भी बहुत बचत होती है।

ऑफिस के साथ घरों में भी मंगवाए जाते हैं टिफिन

महानगर रोड स्थित मां का किचन नाम से टिफिन व्यवसाय कर रहीं श्वेता तिवारी बताती हैं कि मेरे यहां मंथली टिफिन के साथ अलग से एक या दो टिफिन मंगवाने के लिए होम डिलेवरी की भी सुविधा है। जहां एक टिफिन की कॉस्ट 40 से 45 रुपए तक होती है। उनके यहां रोजाना 50 से 55 टिफिन तक सप्लाई किए जाते हैं। डिमांड करने पर खाने में चेंज भी किया जाता है जबकि लखनऊ में लंचबॉक्स सिस्टम काफी पॉपुलर हो चुका है। जहां पहले सिर्फ होस्टल्स में ही खाना जाता था, अब ऑफिस हो या घर सभी जगह लंच बॉक्स मंगवाए जा रहे हैं। कहीं-कहीं कंपनी भी अपने एम्प्लॉइज को लंच बॉक्सेस प्रोवाइड करती हैं।

दिक्कतें भी कम नहीं

इंदरानगर में टिफिन सेंटर चला रही आस्था बताती हैं कि कभी-कभी लोग अचानक बताते हैं कि उन्हें आज टिफिन नहीं चाहिए। इससे कई बार उनका काफी खाना वेस्ट भी हो जाता है। वह बताती हैं कि कस्टमर को संतुष्टï करना इतना आसान नहीं होता। कभी रोटी पतली होने की शिकायत करते हैं कभी दाल कम होने की। उनका कहना है कि ऐसा सिर्फ अलग-अलग वर्कर्स के खाना बनाने की वजह से होता है।
टिफिन सर्विस चलाने वाली शिखा के मुताबिक हर मौसम में सुबह चार बजे से ही काम शुरू हो जाता है। हम जल्दी उठ कर खाना बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं ताकि लोगों को समय पर खाना पहुंचाया जा सके। टिफिन सेंटर चलाना कोई आसान काम नहीं होता। इसमें भी उतनी ही मेहनत और जिम्मेदारी की जरूरत होती है, जितनी दूसरे कामों में। ऑफिस में जाने वाले टिफिन अगर लेट हो जाये तो कस्टमर की शिकायत आने लगती है क्योंकि उनका एक फिक्स लंच टाइम होता है। इसलिए टाइम से खाना पहुंचना हमारे बिजनेस का एक इम्पोर्टेंट एलिमेंट है।

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