जेलों की सुरक्षा भ्रष्टाचार और नाकामी

हाई सिक्युरिटी जेलों की सुरक्षा में बार-बार सेंध क्यों लग रही है? तमाम सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद अपराधी जेल तोडक़र भागने में सफल कैसे हो रहे हैं? क्या सरकार और जेल प्रशासन को इस पर आत्ममंथन की जरूरत नहीं है? दरअसल, हाई सिक्युरिटी नाभा जेल में जैसी घटना घटी है उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।

sajnaysharmaएक बार फिर जेलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की वर्दी में आए चंद हथियारबंद हमलावरों ने पटियाला की नाभा सेंट्रल जेल पर हमला किया और एक खालिस्तानी आतंकवादी हरमिंदर सिंह मिंटू समेत पांच कुख्यात अपराधियों को छुड़ाकर ले गए। इस दौरान हमलावरों ने दहशत फैलाने के लिए सौ राउंड फायरिंग भी की। इस मामले में डीजी जेल को सस्पेंड कर दिया गया। जेल अधीक्षक परमजीत संधू और उपाधीक्षक करणदीप संधू बर्खास्त कर दिए गए। स्पेशल टास्क फोर्स को भागे कैदियों की तलाश में लगाया गया है। इस जेल को हाई-सिक्युरिटी वाली जेल माना जाता है। गौरतलब है कि एक माह पूर्व भोपाल सेंट्रल जेल से भी सिमी के आठ आतंकवादी भाग गए थे। हालांकि उन्हें पुलिस ने मुठभेड़़ में मार गिराया था। लेकिन असली सवाल अपनी जगह है। हाई सिक्युरिटी जेलों की सुरक्षा में बार-बार सेंध क्यों लग रही है? तमाम सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद अपराधी जेल तोडक़र भागने में सफल कैसे हो रहे हैं? क्या सरकार और जेल प्रशासन को इस पर आत्ममंथन की जरूरत नहीं है? दरअसल, हाई सिक्युरिटी नाभा जेल में जैसी घटना घटी है उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। सवाल यह है कि महज कुछ हथियारबंद हमलावर कैसे यहां के तमाम सुरक्षाकर्मियों को डराकर अपने साथियों को छुड़ा ले गए। कहीं इस घटना के पीछे बड़ी साजिश तो नहीं है। यह घटना तब घटी है जब पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। हकीकत यह है कि देश की तमाम जेलें भ्रष्टïाचार का अड्डा बन चुकी हैं। ये अपराधियों और आतंकवादियों के लिए ऐशगाह में तब्दील हो चुकी हैं। सुरक्षाकर्मी गले तक भ्रष्टïाचार में डूबे हैं। पैसे के बल पर अपराधी जेल के भीतर तमाम सुख-सुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं। वे जेल के भीतर से गैंग चलाते हैं। नशे का कारोबार कर रहे हैं। रंगदारी वसूल रहे हैं। देश के कई राज्यों की पुलिस अपने खुलासे में इसकी पुष्टिï भी कर चुकी है। इन अपराधियों की दबंगई बाहर से अधिक जेल में चलती है। कुल मिलाकर जिन लोगों पर कैदियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी है वे ही उनकी सेवा टहल कर रहे हैं। ऐसे में जेलें टूटती रहेंगी, अपराधी भागते रहेंगे और सरकार हाथ मलती रहेगी। यदि सरकार वाकई जेलों को सुरक्षित रखना चाहती है तो उसे इसकी पुरानी व्यवस्था को बदलना होगा। एक मजबूत रणनीति बनानी होगी ताकि जेलों में परिंदा भी पर न मार सके। इसके लिए सतत निगरानी और भ्रष्टïाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की नीति भी अपनानी होगी।

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