जहरीली होती हवा सरकार और हम

सवाल यह है कि इस प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है? क्या प्रदूषण नियंत्रण केंद्र की इस पर कोई जवाबदेही नहीं है? क्या नागरिकों को जहरीली हवा में ही सांस लेना होगा? इन सबसे इतर एक और सवाल यह कि क्या प्रदूषण को बढ़ाने के लिए हम सब जिम्मेदार नहीं है 

sanjay sharma editor5दिल्ली का वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर को पार कर गया है। बच्चों की सेहत पर इसके नकारात्मक असर को देखते हुए दिल्ली और गुडग़ांव के दो स्कूलों में फिलहाल अवकाश घोषित कर दिया गया है। इससे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) भी हरकत में आ गया है। उसने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर स्ट्ेटस रिपोर्ट तलब की है। राष्टीय राजधानी की ताजा घटना एक बानगी भर है। हकीकत यह है कि देश के अधिकांश महानगरों की हवा जहरीली होती जा रही है और इसमें साल-दर-साल इजाफा होता जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हालत भी बदतर होती जा रही है। पहले से प्रदूषित प्रदेश की राजधानी दीवाली पर छोड़े गए पटाखों से और प्रदूषित हो गई है। यहां प्रदूषण का स्तर पहले से कई गुना बढ़ गया है। सवाल यह है कि इस प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है? क्या प्रदूषण नियंत्रण केंद्र की इस पर कोई जवाबदेही नहीं है? क्या नागरिकों को जहरीली हवा में ही सांस लेना होगा? इस सबसे इतर एक और सवाल यह कि क्या प्रदूषण को बढ़ाने के लिए हम सब जिम्मेदार नहीं हैïं? लखनऊ में दीवाली के पहले प्रदूषण का स्तर 85.6 माइक्रोग्राम मीटर क्यूब था जिसमें त्यौहार के बाद कई गुना इजाफा हुआ है। इसका प्रमुख कारण पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसें हैं। हालांकि केवल पटाखे ही प्रदूषण के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। विकास की अंधी दौड़ में हमने हरियाली से नाता तोड़ लिया है, जिसके कारण प्रदूषण को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है। शहरों में कंकरीट के जंगल उग आए हैं। इन्होंने पेड़-पौधों को निगल लिया है। पुरानी डीजल गाडिय़ां, वाहन और खास प्रकार के उद्योग-धंधे भी हवा को जहरीली बना रहे हैं। इसका खामियाजा लोग भुगतने को अभिशप्त हैं। वे कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। उनमें सांस और एलर्जी जैसी बीमारियां हो रही हैं। यदि प्रदूषण पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह बेहद खतरनाक होगा। सरकार को इसके लिए न केवल नई रणनीति बनानी होगी बल्कि उस पर ठोस कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाने की भी जरूरत है। हमें भी प्रदूषण के कारकों पर ध्यान देना होगा अन्यथा प्रदूषण के दंश से पृथ्वी और खुद दोनों को बचाना नामुमकिन होगा।

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