जहरीली हवा हर साल ले रही दस लाख बच्चों की जान

पर्यावरण प्रदूषण बढ़ा रहा निमोनिया का संक्रमण

captureभारत में 20 प्रतिशत बच्चों की मौत का कारण बना निमोनिया

वीरेंद्र पांडेय
लखनऊ। जहरीली हवा बच्चों की सांसों में जहर घोल रही है। दूषित पर्यावरण हर साल कई लाख बच्चों की जान ले रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय निरंजन के अनुसार हर साल पूरे विश्व में निमोनिया के चलते 8 से 10 लाख बच्चों की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि भारत में सबसे ज्यादा मौतें निमोनिया के चलते होती हैं। भारत में 20 प्रतिशत बच्चे निमोनिया से अपनी जान गवां रहे हैं। उन्होंने बताया कि फेफड़े में संक्रमण व अन्य सांस संबंधी बीमारियों के साथ निमोनिया का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों में होने वाली सबसे जानलेवा बीमारी निमोनिया की रोकथाम के लिए 2017 में पांच राज्यों में टीकाकरण की शुरुआत की जायेगी। यह वादा गत 8 नवम्बर को केन्द्रीय स्वास्थ्य जेपी नड्ïडा ने किया था। शुरुआती दौर में पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार तथा राजस्थान के टीकाकरण अभियान में शामिल किया जाायेगा। भारत से पहले पाकिस्तान तथा बांग्ला देश के टीकाकारण अभियान में निमोनिया का टीका शामिल हो चुका है।

पांच साल से कम आयु के बच्चों के लिए अधिक घातक
पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए निमोनिया अधिक घातक है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के सचिव डॉ.आशुतोष वर्मा का कहना है कि स्लम एरिया में रहने वाले बच्चों में निमोनिया तेजी से फैलता है। इसको देखते हुए अब मल्टीडोज वैक्सीन शुरू की जायेगी। उन्होंने बताया कि निमोनिया की वैक्सीन काफी महंगी होती है। मल्टीडोज वैक्सीन से यह फायदा होगा कि अधिक से अधिक बच्चों को लग सकेगी। यह वैक्सीन बुजुर्गों व बीमार लोगों को भी संक्रमण से बचायेगी। डॉ.वर्मा ने बताया कि शुगर, व अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज के लिए भी यह वैक्सीन लाभदायक होगी।

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