जनता की जान की फिक्र नहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण को

  • प्राकृतिक आपदा के दौरान होने वाली भयावह स्थिति का एलडीए कर रहा इंतजार
  • कॉन्फ्रेन्स रूम बनने के चलते सीढिय़ों को किया गया बंद

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। गोमतीनगर स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण की नई बिल्डिंग में ग्राउण्ड फ्लोर से ऊपर तक आने-जाने के लिए लिफ्ट के साथ-साथ सीढिय़ों को बनवाया गया था। इस 11 मंजिला बिल्डिंग में तीन लिफ्ट और दो सीढिय़ों का निर्माण कराया गया है, जिसमें से एक सीढ़ी को आपातकाल के दौरान उपयोग करने के लिए या फिर अधिकारियों की सुविधा के लिए कभी-कभी खोला जाता है।
इस सीढ़ी का उपयोग ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी करते हैं। वहीं दूसरी सीढ़ी का उपयोग अभी तक आम जनता करती थी। लेकिन कुछ दिनों से बिल्डिंग के दसवें फ्लोर पर कॉन्फ्रेन्स रूम बनाने का काम चल रहा है। इसलिए आम जनता के लिए इस्तेमाल होने वाली सीढ़ी को बंद कर दिया गया है। ऐसे में अब आम जनता के लिए सिर्फ लिफ्ट का ही सहारा है। यदि लिफ्ट में किसी प्रकार की गड़बड़ी या कोई भी आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
एलडीए प्रशासन कार्यालय में आने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। कार्यालय में काम के सिलसिले में आने वाले लोगों की जान माल के साथ एलडीए प्रशासन खिलवाड़ कर रहा है। यहां बिल्डिंग में नीचे से ऊपर जाने के लिए बनी सीढिय़ों का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया गया है। इसलिए लोग मजबूरन लिफ्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन सरकारी इमारतों में लिफ्ट खराब होना आम बात हो गई है। यदि लिफ्ट खराब होती है या किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा आती है, तो 11 मंजिल से कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों का सुरक्षित नीचे पहुंच पाना मुश्किल हो जायेगा। ऐसी प्राकृतिक आपदाओं में व्यक्ति के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल भी खतरनाक होता है। इस बात को एलडीए के अधिकारी अच्छी तरह जानते हैं लेकिन अनजान बने हुए हैं। हालांकि इस सब के बीच एलडीए वीसी डॉ. अनूप यादव का कहना है कि सीढ़ी को बंद नहीं किया गया है। यहां पर दो सीढिय़ां हैं। एक आम आदमी के इस्तेमाल के लिए और दूसरी आपात स्थिति में उपयोग के लिए। हालांकि कॉन्फ्रेन्स हॉल बनने के लिए कुछ समय के लिए सीढिय़ों को बंद किया गया था। अब कोई भी इन सीढिय़ों को इस्तेमाल करके ऊपर आ-जा सकता है। वहीं आपात स्थिति में आम जनता भी आपातकालीन सीढिय़ों का इस्तेमाल कर सकती है।

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