चाय वालों ने बहुत परेशान कर रखा है: जावेद अख्तर

सोशल मीडिया के महत्व को ठीक से समझा नहीं गया: ओम थानवी 

लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल में हस्तियों ने व्यक्त किये विचार

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल का समापन सत्र शानदार रहा। रविवार को फेस्टिवल के आखिरी दिन मशहूर गीतकार जावेद अख्तर मौजूद रहे। कार्यक्रम में पंकज कपूर को भी मौजूद रहना था लेकिन किसी वजह से वे कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पाये उनकी जगह जावेद ने नई शायरी पर बात की। वहीं, सोशल मीडिया पर बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने कहा कि सोशल मीडिया को ठीक से समझा नहीं गया है। ये बस अपनी बात कहने का तरीका है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज के समय में भड़ास निकालने का जरिया बनकर रह गया है। इसका इस्तेमाल विमर्श व संवाद के विकेंद्रीकरण के रूप में कम व राजनैतिक दायरे में ज्यादा हो रहा है।

जावेद ने अपने चुटीले अंदाज में श्रोताओं को हंसाया। स्टेज पर जब उनको चाय दी गई तो बोले ये चाय वालों ने बड़ा परेशान कर रखा है। उनकी इस राजनैतिक टिप्पणी पर खूब तालियां बजीं। जावेद की कई बातों पर खूब तालियां बजीं। मसलन जब उन्होंने उर्दू के मुताल्लिक कहा कि जुबान मजहब की नहीं इलाके की होती है। उन्होंने बॉब डिलन पर बात करते हुए कहा कि हम हिन्दुस्तानी बोरिंग और आसानी से न समझ आने वाली चीजों को महान समझते हैं। सरल चीजों को अच्छा नहीं मानते। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे मुश्किल काम है तैयार ट्यून पर गीत लिखना। यह कुछ ऐसा है जैसे आपके सामने कब्र खुदी है और अब मुर्दा तलाशना है। जावेद ने कई बार श्रोताओं को संजीदा भी कर दिया। मसलन, उन्होंने अपने पुरखों के घर खैराबाद की बातें साझा कीं। बुलेया गीत से चर्चा में आए लखनऊ के अमित मिश्रा ने माइक संभाला तो एक के बाद एक कई फास्ट बीट के गीत पेश किए। अमित ने अपने गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की जिन्दगी के कई रोचक तथ्य किताब ‘लता सुर गाथा लिखने वाले लेखक यतींद मिश्र और मालिनी अवस्थी की बातें भी सामने आई। यतींद्र मिश्र ने कहा कि इस किताब को लेकर जब पहली बार लता जी से मिला था तो मैंने कहा था कि आप पर अच्छी किताबें नहीं लिखी गईं है। उन्होंने म़ुझे जवाब देते हुए कहा कि तुम लिख सकते हो तो मैंने कहा कि अगर आप साथ देंगी तो। यतीन्द्र ने बताया कि लता दीदी ने शर्त रखी थी कि जब मेरा दिल होगा तभी इंटरव्यू दूंगी जबरदस्ती नहीं। मालिनी अवस्थी ने कहा कि आज के समय में जो संगीत के क्षेत्र में अपना मुकाम बनाना चाहते है उनको यह किताब जरूर पडऩी चाहिए। वहीं

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