ग्रीन लखनऊ की तर्ज पर हाईटेक होंगे शहर के 12 बस स्टॉप

  • ई-टॉयलेट से होगी पानी की बचत, फर्टिलाइजर के रूप में होगा सॉलिड वेस्ट मैटीरियल का उपयोग
  • आधुनिकीकरण से लैस बस शेल्टरों के लिए नगर निगम को मिले 10 करोड़ रुपये

 अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। राजधानी लखनऊ में अगर आपको बस स्टॉप किसी होटल, मॉल या रेलवे स्टेशन की तरह दिखाई दे तो चौंकिएगा मत क्योंकि स्मार्ट सिटी बन रही राजधानी में अब बस स्टेशन व बस स्टॉप भी अत्याधुनिक होंगे। ग्रीन लखनऊ के आधार पर शहर के मुख्य मार्गों पर स्थित 12 बस स्टॉपों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। यहां बस शेल्टर, ई टॉयलेट व कियोस्क संकुल की सुविधा मिलेगी। ग्रीन बस शेल्टर बनाने के लिए नगरीय परिवहन निदेशालय से नगर निगम को दस करोड़ रुपए मिल चुके हैं। वहीं नगर निगम ने प्रोटोटाइप मॉडल बनाने के साथ ही एजेंसी फाइनल कर ली है। मेसर्स मैजिक जीनी सर्विसेज लिमिटेड का चयन छह फर्मों में से किया गया है।
यात्रियों के उपयोग के लिए यह बस स्टॉप 12 प्रमुख स्थानों पर बनाए जाएंगे। दस करोड़ की लागत से बनने वाले इन बस स्टॉप पर इको टॉयलेट की सुविधा भी मिलेगी। एक बस स्टॉप पर दो ई टॉयलेट सीट, शेल्टर व कियोस्क स्थापित किया जाएगा। ग्रीन टॉयलेट की यह खासियत रहेगी कि इसे सीवर लाइन से जोडऩ़े की जरूरत नहीं होगी। इको टेक स्मार्ट ग्रीन टॉयलेट में पानी की भी कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आधुनिक तरीके से बनाए जाने वाले इस टॉयलेट में अपना पानी खुद जेनरेट होगा।

पानी की आवश्यकता नहीं

ग्रीन टॉयलेट में सॉलिड वेस्ट का उपयोग फर्टिलाइजर के रूप में हो सकेगा। यह टॉयलेट साफ सुथरे रहेंगे, जिससे पर्यावरण के लिए किसी प्रकार से यह हानिकारक भी नहीं होंगे। अधिशासी अभियंता एसके जैन ने बताया कि इन टॉयलेट में सिर्फ एक बार पानी की जरूरत होगी इसके बाद पानी जेनरेट होगा। इसमें टॉप अप वाटर व सीवर लाइन की भी जरूरत नहीं होगी।

पांच किलोवाट बिजली का होगा उपयोग

बस शेल्टर के लिए पांच किलोवाट बिजली लोड की जरूरत होगी। इसमें दो किलो टॉयलेट, एक किलो बस शेल्टर व दो किलो वाट कियोस्क के लिए जरूरत होगी। बस स्टॉप पर दो ई टॉयलेट सीट, बस शेल्टर व कियोस्क स्थापित करने के लिए 28.55 लाख का खर्च आएगा।

प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए मिले निर्देश

बस स्टापों के वार्षिक अनुरक्षण व संचालन पर 8.40 लाख व उपकरणों के वार्षिक रख रखाव पर 2.855 लाख सहित 39.84 लाख का खर्च प्रस्तावित किया गया है। ए टू जेड इंफ्रा गु्रप की कंपनी मैजिक जीनी सर्विसेज लिमिटेड को प्रोटोटाइप तैयार कर अनुमोदन के लिए प्रस्ताव देने को निर्देश दिया गया है। इसके लिए एनबीआरआई के पास चयनित स्थल पर संकुल की स्थापना के लिए एजेंसी मॉडल का प्रस्तुतीकरण करेगी।

टॉयलेट में होगा आधुनिक तकनीक का प्रयोग

हाईटेक बस स्टॉपों के टॉयलेट का दरवाजा कार्ड रीडर से खुलेगा। टॉयलेट के कार्य, बिजली व सफाई को लेकर किसी प्रकार की समस्या होने पर इसमें अलार्म सिस्टम भी रहेगा। यह मुख्य सर्वर से जुड़ा रहेगा। ग्रीन टॉयलेट में आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा। ऑटोमैटिक तरीके से फ्लोर की सफाई होगी। जबकि आरओ वाटर की सप्लाई, एयर एग्जास्ट सिस्टम, सेल्फ जेनरेटड क्रिस्टल क्लीन वाटर सप्लाई की सुविधा रहेगी।
साधारण टॉयलेट में पानी का खर्च होता है। एक अनुमान के मुताबिक प्रत्येक सीट के लिए प्रतिदिन 100 उपयोग करने पर दस लीटर पानी खर्च होता है। ऐसे में एक वर्ष में लगभग 30 हजार लीटर पानी की बर्बादी होती है। वहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भी 30 हजार लीटर सीवेज निस्तारण करना होता है। वहीं यह टॉयलेट एक स्थान पर फिक्स होते हैं। इससे कभी दूसरे स्थान पर बनाने के लिए दोबारा निर्माण पर खर्च नहीं होता है। वहीं ग्रीन इको टॉयलेट को कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता है।

वाई-फाई की सुविधा

मेंटिनेंस की लागत निकालने के लिए बस स्टॉप पर विज्ञापन लगाया जाएगा। प्रोजेक्ट मैनेजर एसएफए जैदी ने बताया कि यहां पर वाई-फाई की सुविधा भी दी जाएगी। इसके लिए निजी कंपनियों से बात भी की जा रही है, जो कुछ समय के लिए फ्री वाई-फाई की सुविधा देंगी। जैसे हजरतगंज और हेरिटेज जोन इलाके में कंपनियां यह सुविधा दे रही हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

नगर आयुक्त उदयराज सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी के तहत शहर में बस स्टॉप को हाईटेक करने का काम किया जाना है। इसके लिए स्थानीय निकाय निदेशालय ने अर्बन ट्रांसपोर्ट फंड से पहली किस्त के रूप में 10 करोड़ रुपये दिए हैं। जल्द मॉडल बस स्टॉप का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसके बनने के बाद टेंडर कर बाकी को चिंहित करने का काम शुरू किया जाएगा।

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